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बांदा: नाव पर लगी रोक, 2.50 लाख आबादी आवाजाही प्रभावित, मर्का हादसे के बाद चेता प्रशासन, केन व यमुना घाटों पर सख्ती
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बांदा के खप्टियाकलां घाट पर केन नदी पार कर फतेहपुर जाने के लिए बैठे ग्रामीण। सुवाद
- फोटो : BANDA
बांदा/खप्टिहा कलां। रक्षाबंधन पर गुरुवार को भाइयों को राखी बांधने जा रहीं महिलाओं से भरी नाव यमुना नदी की बीच धारा में पलट जाने के बाद प्रशासन चेता है। जिले भर के लगभग 12 घाटों पर नौका संचालन पर रोक लगा दी है। इससे 231 गांवों की 2.50 लाख से अधिक आबादी का आवागमन बंद हो गया। इससे लोगों को आवागमन के लिए 41 किमी का चक्कर लगाना होगा। शुक्रवार को नाव नहीं चलने से इन गांवों के लोग काम पर नहीं जा पाए। कई बहनें भी भाइयों को राखी नहीं बांध पाईं।
मर्का थाना क्षेत्र के नौका घाट पर यह हादसा हुआ था। शुक्रवार को केन नदी पर नौका घाट, यमुना नदी पर नौका घाट, बागै नदी पर नौका घाट आदि में प्रशासन ने नाव नहीं चलने दीं। सुबह से ही इन घाटों पर नदी के रास्ते सफर करने वालों की भीड़ रही। केन नदी से 40, यमुना से 132 और चंद्रावल से 59 गांवों के करीब ढाई लाख लोग रोज नाव से यात्रा करते हैं। लोगों में आक्रोश रहा कि हादसे के बाद प्रशासन को सुध आई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुल बनवाए जाने की मांग की है। ताकि नदी के रास्ते नाव से उन्हें न जाना पड़े।
चंद्रावल नदी से गुजरते हैं 187 छात्र
खप्टिहा कलां गांव के विनय तिवारी, गणेशा सविता, इंद्रपाल सिंह, जयमूल निषाद, छोटेलाल तिवारी, राजू तिवारी, चुन्नू निषाद, अर्जुन सिंह शास्त्री, चुनुबाद सिंह आदि ने बताया कि जसपुरा में चंद्रावल नदी पड़ती है। इसमें कोई पुल नहीं है, बल्कि रपटा बना हुआ है। बाढ़ के दौरान इस रपटे के ऊपर से पानी गुजरता है। जहां से लोग आ जा नहीं सकते। केन नदी के उस पार कुटी डेरा तक प्रतिदिन 16 अध्यापक व 187 छात्र-छात्राएं इसी नाव से प्रतिदिन आते जाते हैं।
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41 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा किसानों को
थानाध्यक्ष पैलानी नंदराम प्रजापति ने बताया कि विद्यार्थी और ग्रामीण जसपुरा से घूम कर आएं और जाएं। नाव नहीं चलाई जाएगी। उधर, ग्रामीणों ने कहा कि जसपुरा से होकर खेतों तक पहुंचने के लिए उन्हें 41 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ेगा। नाव बंद होने से डेरा में बसे किसानों को रक्षाबंधन पर्व में राखी भी नहीं बंध सकीं।
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मर्का थाना क्षेत्र के नौका घाट पर यह हादसा हुआ था। शुक्रवार को केन नदी पर नौका घाट, यमुना नदी पर नौका घाट, बागै नदी पर नौका घाट आदि में प्रशासन ने नाव नहीं चलने दीं। सुबह से ही इन घाटों पर नदी के रास्ते सफर करने वालों की भीड़ रही। केन नदी से 40, यमुना से 132 और चंद्रावल से 59 गांवों के करीब ढाई लाख लोग रोज नाव से यात्रा करते हैं। लोगों में आक्रोश रहा कि हादसे के बाद प्रशासन को सुध आई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुल बनवाए जाने की मांग की है। ताकि नदी के रास्ते नाव से उन्हें न जाना पड़े।
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चंद्रावल नदी से गुजरते हैं 187 छात्र
खप्टिहा कलां गांव के विनय तिवारी, गणेशा सविता, इंद्रपाल सिंह, जयमूल निषाद, छोटेलाल तिवारी, राजू तिवारी, चुन्नू निषाद, अर्जुन सिंह शास्त्री, चुनुबाद सिंह आदि ने बताया कि जसपुरा में चंद्रावल नदी पड़ती है। इसमें कोई पुल नहीं है, बल्कि रपटा बना हुआ है। बाढ़ के दौरान इस रपटे के ऊपर से पानी गुजरता है। जहां से लोग आ जा नहीं सकते। केन नदी के उस पार कुटी डेरा तक प्रतिदिन 16 अध्यापक व 187 छात्र-छात्राएं इसी नाव से प्रतिदिन आते जाते हैं।
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41 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा किसानों को
थानाध्यक्ष पैलानी नंदराम प्रजापति ने बताया कि विद्यार्थी और ग्रामीण जसपुरा से घूम कर आएं और जाएं। नाव नहीं चलाई जाएगी। उधर, ग्रामीणों ने कहा कि जसपुरा से होकर खेतों तक पहुंचने के लिए उन्हें 41 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ेगा। नाव बंद होने से डेरा में बसे किसानों को रक्षाबंधन पर्व में राखी भी नहीं बंध सकीं।