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बांदा : खेती को राष्ट्रीय कार्य घोषित करने की वकालत, हल-बैल की खेती को आर्थिक प्रोत्साहन दिए जाने की मांग

Thu, 18 Aug 2022 12:48 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 18 Aug 2022 12:48 AM IST
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Banda: Advocating for declaring agriculture as a national work, demand for economic incentives for plow-bull farming
प्राकृतिक खेती वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते काड़ सिद्धेश्वर महाराज। - फोटो : BANDA
बांदा। खेती को राष्ट्रीय कार्य घोषित करने और हल-बैल की खेती को आर्थिक प्रोत्साहन दिए जाने के साथ ही प्राकृतिक खेती को ही मान्यता देने की मांगें किसानों के राष्ट्रीय सम्मेलन और किसान संसद में रखी गईं। दो दिवसीय सम्मेलन के आखिरी दिन कई प्रस्ताव पारित किए गए। इन्हें प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा।
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यहां बड़ोखर खुर्द गांव स्थित ह्यूमन एग्रेरियन सेंटर में आयोजित प्राकृतिक खेती के 12वें वार्षिक सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन बुधवार को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल आदि से आए प्रगतिशील किसानों को केंद्र सरकार की प्राकृतिक खेती एवं एमएसपी समिति के किसान प्रतिनिधि (सदस्य) पद्मश्री भारत भूषण त्यागी ने संबोधित किया। प्राकृतिक खेती के बुनियादी उपाय और फायदे बताए।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील स्वागत योग्य कदम है। इस सम्मेलन में पारित किए जा रहे प्रस्ताव और सुझावों का मसौदा वह खुद प्रधानमंत्री को सौंपेंगे। पिछले कई दशक से प्राकृतिक खेती करके बुंदेलखंड के किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित कर रहे प्रगतिशील किसान और सम्मेलन के मेजबान प्रेम सिंह को सराहा। सम्मेलन में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश के लगभग दो दर्जन जनपदों से आए प्रतिनिधियों सहित केरल और महाराष्ट्र आदि के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कई प्रगतिशील महिला किसानों ने भी भाग लिया।
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आयोजक किसान प्रेम सिंह सहित खेत-तालाब योजना संयोजक पुष्पेंद्र भाई ने सभी की अगुवानी की। भारतीय जैविक कृषि संगठन (ओएफएआई) अध्यक्ष और केरल के प्रगतिशील किसान इलियास तथा पद्मश्री भारत भूषण त्यागी और काड़ सिद्धेश्वर महाराज को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री बाबूलाल दाहिया (मध्य प्रदेश) ने की। उन्हें सम्मानित भी किया गया।
प्राकृतिक खेती सम्मेलन में पारित प्रस्ताव-
- खेती को राष्ट्रीय कार्य घोषित किया जाए। किसानी को सम्मान का दर्जा मिले। इससे युवा वर्ग खेती के प्रति प्रेरित होगा और पलायन रुकेगा।
- प्राकृतिक खेती के लिए अलग से पोर्टल खोला जाए, ताकि इच्छुक किसान स्वेच्छा से इस पर आवेदन कर सकें। इसके लिए कुछ टोकन मनी भी रखी जाए।
- किसान के बजाय खेत को मानक बनाया जाए। क्षेत्रफल के अनुपात में जल संचयन, पेड़-पौधे, पशु पक्षी, खाद्यान्न की मात्रा आदि निर्धारित करते हुए एक नक्शा/प्रारूप किसानों से लिया जाए।

सम्मेलन में मुख्य रूप से उपस्थित प्रगतिशील किसान-
रश्मि सचान (कानपुर), सचिन (देहरादून), सत्यपाल सिंह (आजमगढ़), राजेंद्र, बेबी राजा व मंसूर खां (खजुराहो), सविता (बदायूं), शेखर त्रिपाठी (रायबरेली), प्राची शुक्ला (कोलकाता/उन्नाव), रुद्र (चंदौली), कृष्णा व भवन द्विवेदी (फतेहपुर), राघवेंद्र यादव (मैनपुरी), आलोक सूर्यकांत (कानपुर देहात), शिवविजय सिंह व डॉ. देव सिंह (हमीरपुर), धर्मवीर व रविंद पाल (अमौली), जाहिद अली (बांदा), पुष्पेंद्र भाई (बांदा), राजा भइया (नरैनी), ललिता, सबल सिंह, शैलेंद्र बुंदेला आदि।
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