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Banda News: गर्मी शुरू होते ही शहर के 197 हैंडपंपों ने दम तोड़ा
Tue, 16 Apr 2024 11:15 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 16 Apr 2024 11:15 PM IST
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बांदा। भीषण गर्मी के बावजूद सड़कों पर न प्याऊ दिख रहे हैं न वाटर कूलर। 38-39 डिग्री तापमान के बीच कड़ी धूप में शहर आने वाले राहगीरों के हलक सूख रहे हैं। प्यास बुझाने के लिए लगे जल संस्थान के ज्यादातर हैंडपंप भी शोपीस बने हुए हैं। प्यास बुझाने के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। जल संस्थान ने रिबोर के लिए हैंडपंपों की सूची जल निगम भेजी थी, पर एक वर्ष बीत गए अभी तक एक भी हैंडपंपों का रिबोर नहीं हो सका। हालात यह है कि 950 में से 197 हैंडपंप जवाब दे गए हैं।
शहर में पांच सौ की आबादी पर एक सार्वजनिक हैंडपंप लगाने का नियम है। यहां मानक से कहीं ज्यादा हैंडपंप लगा तो दिए गए हैं, पर मरम्मत और रिबोर को लेकर लापरवाही की जा रही है। नगर पालिका क्षेत्र बांदा में 946 सार्वजनिक हैंडपंप लगवाए गए हैं। इनमें अधिकांश हैंडपंप मरम्मत मांग रहे हैं या फिर उनके रिबोर की जरूरत है। जल संस्थान हैंडपंपों में मामूली खराबी पर मरम्मत तो करवा देता है, पर रिबोर के नाम पर हाथ खड़े कर देता है। दरअसल एक हैंडपंप के रिबोर में करीब 60 से 70 हजार रुपये का खर्च आता है।
जल निगम भी बजट का अभाव बताकर पल्ला झाड़ रहा है। जल संस्थान के मुताबिक पिछले वर्ष जल संस्थान ने 95 हैंडपंपों के रिबोर के लिए सूची जल निगम को भेजी थी। इनका रिबोर आज तक नहीं हो पाया। इस वर्ष भी करीब 102 हैंडपंप ध्वस्त हो गए हैं। इनके रिबोर की जरूरत है। जल संस्थान इन हैंडपंपों की सूची बनाकर जल निगम को भेज रहा है। हालांकि अभी तक पिछले वर्ष के हैंडपंपों का रिबोर नहीं हो सका।
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हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर होता खेल
सार्वजनिक हैंडपंपों के मरम्मत के नाम पर जल संस्थान में जमकर खेल होता है। फर्जी मरम्मत दिखाकर लाखों के वारे-न्यारे कर लिए जाते हैं। मोहल्लेवासी हैंडपंप मरम्मत का आवेदन जल संस्थान में देते हैं। इसके बाद फर्जी इस्टीमेट बनवाकर इसका भुगतान करा लिया जाता है। मौके पर हैंडपंप की मरम्मत नहीं होती। लोग एक-एक बाल्टी पानी के लिए भटकते हैं।
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सबमर्सिबल चलने से हैंडपंप का पानी पहुंचा नीचे
शहर में मानक व नियमों को दरकिनार कर घर-घर सबमर्सिबल लगाए गए हैं। ज्यादा भूजल दोहन के चलते भूगर्भ जलस्तर में लगातार गिरावट आ रही है। गर्मी में ज्यादातर हैंडपंप जवाब दे जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि अधिकारी इन्हें रिबोर योग्य बताकर फाइल में चढ़ा लेते हैं। गर्मी के बाद जहां जल स्तर में सुधार हुआ तो यह हैंडपंप फिर पानी देने लगते हैं। तब बिना रिबोर कराए ही बिल का भुगतान भी हो जाता है।
- इन इलाकों में है पेयजल किल्लत
कालूकुआं की नई बस्ती, धीरज नगर, खाईं पार, इंद्रानगर, सर्वोदय नगर, कुशवाह नगर, जेल रोड, निमनीपार, मर्दननाका, अलीगंज आदि मोहल्लों में हैंडपंप खराब होने से पेयजल की किल्लत है।
वर्जन
-शहर में करीब 950 हैंडपंप हैं। पिछले वर्ष के 95 हैंडपंपों का रिबोर अभी तक नहीं हो सका। कुछ स्थानों पर नए हैंडपंप भी लगवाने का प्रयास किया जा रहा है। -राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, बांदा
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शहर में पांच सौ की आबादी पर एक सार्वजनिक हैंडपंप लगाने का नियम है। यहां मानक से कहीं ज्यादा हैंडपंप लगा तो दिए गए हैं, पर मरम्मत और रिबोर को लेकर लापरवाही की जा रही है। नगर पालिका क्षेत्र बांदा में 946 सार्वजनिक हैंडपंप लगवाए गए हैं। इनमें अधिकांश हैंडपंप मरम्मत मांग रहे हैं या फिर उनके रिबोर की जरूरत है। जल संस्थान हैंडपंपों में मामूली खराबी पर मरम्मत तो करवा देता है, पर रिबोर के नाम पर हाथ खड़े कर देता है। दरअसल एक हैंडपंप के रिबोर में करीब 60 से 70 हजार रुपये का खर्च आता है।
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जल निगम भी बजट का अभाव बताकर पल्ला झाड़ रहा है। जल संस्थान के मुताबिक पिछले वर्ष जल संस्थान ने 95 हैंडपंपों के रिबोर के लिए सूची जल निगम को भेजी थी। इनका रिबोर आज तक नहीं हो पाया। इस वर्ष भी करीब 102 हैंडपंप ध्वस्त हो गए हैं। इनके रिबोर की जरूरत है। जल संस्थान इन हैंडपंपों की सूची बनाकर जल निगम को भेज रहा है। हालांकि अभी तक पिछले वर्ष के हैंडपंपों का रिबोर नहीं हो सका।
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हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर होता खेल
सार्वजनिक हैंडपंपों के मरम्मत के नाम पर जल संस्थान में जमकर खेल होता है। फर्जी मरम्मत दिखाकर लाखों के वारे-न्यारे कर लिए जाते हैं। मोहल्लेवासी हैंडपंप मरम्मत का आवेदन जल संस्थान में देते हैं। इसके बाद फर्जी इस्टीमेट बनवाकर इसका भुगतान करा लिया जाता है। मौके पर हैंडपंप की मरम्मत नहीं होती। लोग एक-एक बाल्टी पानी के लिए भटकते हैं।
सबमर्सिबल चलने से हैंडपंप का पानी पहुंचा नीचे
शहर में मानक व नियमों को दरकिनार कर घर-घर सबमर्सिबल लगाए गए हैं। ज्यादा भूजल दोहन के चलते भूगर्भ जलस्तर में लगातार गिरावट आ रही है। गर्मी में ज्यादातर हैंडपंप जवाब दे जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि अधिकारी इन्हें रिबोर योग्य बताकर फाइल में चढ़ा लेते हैं। गर्मी के बाद जहां जल स्तर में सुधार हुआ तो यह हैंडपंप फिर पानी देने लगते हैं। तब बिना रिबोर कराए ही बिल का भुगतान भी हो जाता है।
- इन इलाकों में है पेयजल किल्लत
कालूकुआं की नई बस्ती, धीरज नगर, खाईं पार, इंद्रानगर, सर्वोदय नगर, कुशवाह नगर, जेल रोड, निमनीपार, मर्दननाका, अलीगंज आदि मोहल्लों में हैंडपंप खराब होने से पेयजल की किल्लत है।
वर्जन
-शहर में करीब 950 हैंडपंप हैं। पिछले वर्ष के 95 हैंडपंपों का रिबोर अभी तक नहीं हो सका। कुछ स्थानों पर नए हैंडपंप भी लगवाने का प्रयास किया जा रहा है। -राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, बांदा