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Banda News: आवासीय विद्यालय पहुंचे अरुण के दादा, दूसरे पौत्र की ली टीसी

Mon, 07 Sep 2026 11:56 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Mon, 07 Sep 2026 11:56 PM IST
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Arun's grandfather arrived at the residential school and collected the transfer certificate (TC) of his other grandson.
बांदा। शहर के झील का पुरवा स्थित निजी आवासीय विद्यालय में 17 अगस्त को हुई दो छात्रों की मौत के बाद सोमवार को दोनों छात्रों के परिजन विद्यालय पहुंचे। विद्यालय खुला हुआ मिला।
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वहां छात्र अरुण के दादा विजयपाल कुशवाहा ने अपने दूसरे पौत्र उत्कर्ष की टीसी मांगी। विद्यालय की ओर से तुरंत टीसी नहीं दी गई बल्कि आधा घंटे के बाद महाराणा प्रताप चौक पर उन्हें रोककर टीसी मुहैया कराई गई। हालांकि परिजन और विद्यालय की ओर से छात्रों की फीस वापस करने पर कोई बातचीत नहीं हुई।
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आवासीय विद्यालय में छात्र रहे नितिन और अरुण की 17 अगस्त की सुबह मौत हो गई थी। दोनों को पेट दर्द की शिकायत हुई थी। इस प्रकरण में 20 अगस्त को अरुण के दादा विजय पाल की ओर से कोतवाली में विद्यालय प्रबंधक ओम प्रकाश कुशवाहा और उनके बेटे साेनू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने दोनों छात्रों का विसरा नमूना जांच के लिए भेजा है और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने जांच के दौरान लिए गए फास्ट फूड के सैंपल भी जांच के लिए लैब भेजे हैं। इसकी रिपोर्ट अभी तक दोनों विभागों को नहीं मिल सकी है और जांच रुकी हुई है।
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सोमवार को नितिन के पिता सुनील कुमार और अरुण के दादा विजय पाल झील का पुरवा स्थित विद्यालय पहुंचे। विजयपाल ने बताया कि स्कूल के अंदर प्रबंधक नहीं मिले जबकि कुछ शिक्षक जरूर मौजूद थे। उन्होंने अपने दूसरे पौत्र उत्कर्ष जो कक्षा पांच का छात्र है। उसकी टीसी मांगी। इसके बाद उन्हें बाद में आने की बात कहकर वापस किया गया।
हालांकि आधे घंटे के बाद महाराणा प्रताप चौक पर उन्हें रोककर उत्कर्ष की टीसी दे दी गई। विजय पाल ने बताया कि वह अपने पौत्र का प्रवेश दूसरे विद्यालय में कराएंगे। नितिन के पिता सुनील ने अपने दूसरे बेटे हर्ष की टीसी नहीं ली है। हर्ष कक्षा एक का छात्र है।
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भारी भरकम है विद्यालय की फीस
बांदा। परिजन ने बताया कि आवासीय विद्यालय में एक बच्चे की फीस 40 हजार रुपये सालाना है। थाना गिरवां के गांव सरस्वाह निवासी सुनील के दो बेटे नितिन व हर्ष दोनों यहां पढ़ते थे।
इसी तरह से विजयपाल के दो पौत्र अरुण व उत्कर्ष भी यहां पढ़ रहे थे। इसमें नितिन व अरुण की मौत हो चुकी है। विजयपाल ने दोनों बच्चों की 20-20 हजार रुपए फीस जमा कर रखी थी। 40 शेष थी।

इसी तरह से सुनील ने भी अपने बच्चों की फीस का अधिकांश हिस्सा जमा कर दिया था। छात्र अब विद्यालय में नहीं हैं तो परिजन फीस वापसी की मांग रखते सकते हैं। (संवाद)
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