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अन्ना जानवरों से त्रस्त किसान नहीं बोएंगे फसल
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 17 Oct 2016 11:46 PM IST
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गाय
- फोटो : अमर उजाला
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बदौसा। फसलों के दुश्मन बने अन्ना पशुओं के प्रति शासन-प्रशासन की उपेक्षा से आहत किसानों ने इस साल रबी की बुआई न करने का फैसला किया है। नतीजतन क्षेत्र की हजारों बीघा भूमि खाली पड़ी रहेगी। क्षेत्र के बदौसा, बरछा (ब), दुबरिया, भुसासी, उदयपुर, तुर्रा समेत दर्जन भर गांवों के किसानों ने खरीफ में हजारों बीघे में ज्वार, अरहर, उर्द, मूंग की फसलें बोईं थी। अन्ना पशुओं ने इन्हें सफाचट कर दिया।
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सिर्फ अरहर के ठूंठ (डंठल) बचे हैं। अपनी पूंजी गंवा बैठे किसान कंगाल हो गए हैं। प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा। ऐसे में क्षुब्ध किसानों ने एक राय होकर यह फैसला लिया है कि रबी के लिए खेतों में बुवाई नहीं करेंगे। सीडीओ ने एक बार अन्ना प्रथा के खिलाफ गांवों में डुग्गी पिटवाने के कागजी फरमान जारी करने की रस्म अदायगी कर ली, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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दुबरिया गांव के किसान नसीम खां, खालिक खां, श्यामलाल, मेवालाल ने बताया कि कई सालों से दैवी आपदा से परेशान होने के बावजूद खरीफ में पूंजी जुटाकर फसल बोई, लेकिन अन्ना पशुओं ने कहीं का नहीं छोड़ा। पूरी फसल उजाड़ दी। बरछा (ब) गांव के किसान रामानंद, अशोक, विजय प्रताप, दयाशंकर रामकिशोर आदि ने बताया कि उनके पास रबी के लिए न खाद का पैसा है और न ही बीज का जुगाड़।
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बदौसा के किसान रत्नाकर सिंह, कल्लू केवट, मुकेश, सीताशरण ने कहा कि अन्ना पशुओं पर विराम नहीं लगा तो खेत परती पड़े रहेंगे। उधर, अतर्रा एसडीएम अरविंद कुमार तिवारी ने कहा कि प्रशासन अन्ना पशुओं पर पाबंदी लगाने के लिए तत्पर है। किसान और पशुपालक सहयोग करें तभी अन्ना प्रथा को खत्म किया जा सकेगा।