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बांदाः धान कटाई करने वाले साधारण कंबाइन हार्वेस्टर होंगे सीज
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बांदा। प्रदूषण कम करने और खेतों में पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने एक और सख्त निर्णय लिया है। अब सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट से लैस कंबाइन हार्वेस्टर से ही धान की फसल की कटाई होगी। धान की कटाई करते पाए जाने पर साधारण कंबाइन हार्वेस्टर सीज किए जाएंगे।
कृषि विभाग किसानों में इसके प्रचार-प्रसार में जुट गया है। सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम से फसलों के अवशेष बारीक टुकड़ों में कटकर खेतों में ही मिल जाते हैं। जिले में लगभग एक लाख हेक्टेयर में धान की फसल होती है।
धान की फसल के तुरंत बाद किसान रबी की फसल की तैयारियों में जुट जाते हैं। धान के अवशेषों को खेतों में जलाकर नष्ट करने की किसानों में प्रवृत्ति है। इससे वायु प्रदूषण होता है। खेतों में पराली जलाने को लेकर एनजीटी का रुख भी सख्त है। शासन ने भी पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए जुर्माना सहित कई ठोस कदम उठा रखे हैं।
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इसके बावजूद तमाम किसान पराली जला देते हैं। अब किसानों को धान कटाई के दौरान ही खेत में पराली नष्ट हो जाने की तकनीक अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगे कंबाइन हार्वेस्टर से धान फसल कटाई नहीं हो सकेगी। साधारण हार्वेस्टर से कटाई होने पर सीज करने का फरमान जारी किया गया है।
पंजाब और हरियाणा से 10 से 15 हार्वेस्टर मशीनें हर वर्ष यहां किराये पर धान की कटाई करने आती हैं। ज्यादातर इनका इस्तेमाल वृहद काश्तकार करते हैं। किराया अदा कर पाने में असमर्थ छोटे किसानों के सामने समस्या पहले जैसी है।
उप निदेशक (कृषि) एके सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष खेत में पराली जलाने पर 26 किसानों पर एफआईआर हुई थी। सबसे ज्यादा केस बबेरू तहसील के थे। पराली जलाने पर जुर्माना किया जाता है। दो एकड़ तक ढाई हजार रुपये, 5 एकड़ तक 5000 और इसके ऊपर 15 हजार रुपये जुर्माना वसूलने के निर्देश हैं।
बताया कि सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट तकनीक वाले कंबाइन हार्वेस्टर से फसल के अवशेष भूसा में तब्दील हो जाता है। इससे जलाने की नौबत नहीं रहती। किसानों को इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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कृषि विभाग किसानों में इसके प्रचार-प्रसार में जुट गया है। सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम से फसलों के अवशेष बारीक टुकड़ों में कटकर खेतों में ही मिल जाते हैं। जिले में लगभग एक लाख हेक्टेयर में धान की फसल होती है।
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धान की फसल के तुरंत बाद किसान रबी की फसल की तैयारियों में जुट जाते हैं। धान के अवशेषों को खेतों में जलाकर नष्ट करने की किसानों में प्रवृत्ति है। इससे वायु प्रदूषण होता है। खेतों में पराली जलाने को लेकर एनजीटी का रुख भी सख्त है। शासन ने भी पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए जुर्माना सहित कई ठोस कदम उठा रखे हैं।
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इसके बावजूद तमाम किसान पराली जला देते हैं। अब किसानों को धान कटाई के दौरान ही खेत में पराली नष्ट हो जाने की तकनीक अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगे कंबाइन हार्वेस्टर से धान फसल कटाई नहीं हो सकेगी। साधारण हार्वेस्टर से कटाई होने पर सीज करने का फरमान जारी किया गया है।
पंजाब और हरियाणा से 10 से 15 हार्वेस्टर मशीनें हर वर्ष यहां किराये पर धान की कटाई करने आती हैं। ज्यादातर इनका इस्तेमाल वृहद काश्तकार करते हैं। किराया अदा कर पाने में असमर्थ छोटे किसानों के सामने समस्या पहले जैसी है।
उप निदेशक (कृषि) एके सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष खेत में पराली जलाने पर 26 किसानों पर एफआईआर हुई थी। सबसे ज्यादा केस बबेरू तहसील के थे। पराली जलाने पर जुर्माना किया जाता है। दो एकड़ तक ढाई हजार रुपये, 5 एकड़ तक 5000 और इसके ऊपर 15 हजार रुपये जुर्माना वसूलने के निर्देश हैं।
बताया कि सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट तकनीक वाले कंबाइन हार्वेस्टर से फसल के अवशेष भूसा में तब्दील हो जाता है। इससे जलाने की नौबत नहीं रहती। किसानों को इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है।