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पीएम-सीएम को अपनाया, फिर भी कुछ खास न पाया
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फोटो-10बीएनडीपी-10 : बृजेश प्रजापति (सपा), रामकेश निषाद (भाजपा), जयराम सिंह (बसपा), आदिशक्ति दीक्षित (कां
- फोटो : BANDA
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बांदा। देश का प्रधानमंत्री और प्रदेश का मुख्यमंत्री चुनने का सौभाग्य तो मिला पर जो उम्मीदें संजोई गई थीं वह पूरी नहीं हो पाईं। वीआईपी सीट की शोहरत भी कुछ काम न आई। पिछले करीब चार दशकों से जनपद का मशहूर तिंदवारी विधान सभा क्षेत्र की हालत जस की तस रही।
ज्ञात हो कि बिजली, पानी, सड़क, सिंचाई, यातायात, पलायन, अन्ना मवेशी इत्यादि मुद्दे आज भी यहां बरकरार हैं। वर्ष 1974 में बांदा सदर सीट में कटौती कर तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ। 1981 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह इसी सीट से उप चुनाव लड़कर विधायक बने। प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए वीपी सिंह फतेहपुर से लोकसभा का चुनाव जीते थे।
तब तिंदवारी सीट फतेहपुर संसदीय क्षेत्र में ही शामिल थी। यहां के मतदाताओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री को बड़ी संख्या में वोट दिए थे। बाद में तिंदवारी को हमीरपुर-महोबा संसदीय क्षेत्र में शामिल कर दिया गया। वीपी सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में जनपद के मवई गांव में कताई मिल की स्थापना हुई थी।
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लेकिन 1990 में यह बंद हो गई। आज तक दोबारा चालू नहीं हो पाई। हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए। मिल का मुद्दा अभी भी बरकरार है। यह बात अलग है कि चुनाव में कोई दल या प्रत्याशी इसे अपने एजेंडे में शामिल नहीं किए हैं।
----------------
तिंदवारी विधान सभा क्षेत्र में मतदाता-
-------------------
कुल मतदाता- 3,14,424
पुरुष मतदाता- 1,72,875
महिला मतदाता- 1,41,544
मतदान केंद्र- 225
मतदेय स्थल- 384
------------------------
तिंदवारी क्षेत्र से आज तक विधायक-
1974 : जगन्नाथ सिंह (भारतीय जनसंघ)। 1977 : जगन्नाथ सिंह (जनता पार्टी)। 1980 : शिव प्रताप सिंह (कांग्रेस)। 1981 : वीपी सिंह (कांग्रेस)। 1985 : अर्जुन सिंह (कांग्रेस)। 1989 : चंद्रभान सिंह (जनता दल)। 1991 : विशंभर प्रसाद निषाद (बसपा)। 1993 : विशंभर प्रसाद निषाद (बसपा)।
1996 : महेंद्र पाल निषाद (बसपा)। 2002 : विशंभर प्रसाद निषाद (सपा)। 2007 : विशंभर प्रसाद निषाद (सपा)। 2012 : दलजीत सिंह (कांग्रेस)। 2017 : बृजेश प्रजापति (भाजपा)
तिंदवारी विधान सभा के 13 चुनावों में सर्वाधिक चार बार कांग्रेस के विधायक हुए। इसके बाद तीन बार यहां के मतदाताओं ने बसपा को अपनाया। सपा को दो बार सफलता मिली। भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी, जनता दल और भाजपा को एक-एक बार मौका मिला।
नए परिसीमन में बांदा के 15 गांव तिंदवारी में
बांदा। वर्ष 2012 में विधान सभा क्षेत्रों के परिसीमन में बदलाव हुआ। तब तक तिंदवारी क्षेत्र बांदा सदर क्षेत्र में शामिल था। सदर क्षेत्र के करीब 15 गांव काटकर तिंदवारी विधानसभा में शामिल कर दिए गए। इनमें मुस्लिम बाहुल्य गांव हथौरा, छनेहरा लालपुर, करबई आदि भी शामिल हैं। इनके अलावा दोहा, कुलकुम्हारी, महोखर, करबई, चिल्ली, गुरेह, बिलबई, मौदहा, कलेक्टर पुरवा, कमनौड़ी, बड़ेहा और फतपुरवा आदि गांव तिंदवारी क्षेत्र में शामिल हो गए। परिसीमन में कुछ गांव तिंदवारी से हटाकर बांदा में शामिल कर दिए गए। इनमें मवई बुजुर्ग, कनवारा, पिपरी, छानी, दरदा, अरबई आदि गांव शामिल हैं।
मतदाताओं का जातीय समीकरण (अनुमानित)
अनुसूचित जाति- 62 हजार, क्षत्रिय- 55 हजार, निषाद- 52 हजार, ब्राह्मण- 23 हजार, मुस्लिम- 20 हजार, यादव- 19 हजार, कुम्हार- 18 हजार, कुशवाहा- 12 हजार, वैश्य- 10 हजार, आरख- 9 हजार, लोधी- 8 हजार, नाई- 5 हजार, साहू- 4 हजार। शेष अन्य जातियां।
मौजूदा चुनाव में तिंदवारी सीट से प्रत्याशी-
प्रत्याशी पार्टी
बृजेश प्रजापति सपा
रामकेश निषाद भाजपा
जयराम सिंह बसपा
आदि शक्ति कांग्रेस
रामचंद्र भाकपा
मूलचंद्र भाशचेपा
अरविंद कुमार निर्दलीय
उत्तम निर्दलीय
मधुराज निर्दलीय
पिछले चुनाव 2017 में प्रमुख चार दलों के प्रत्याशियों को मिले वोट-
बृजेश प्रजापति (भाजपा)- 82,197
जगदीश प्रजापति (बसपा)- 44,790
दलजीत सिंह (कांग्रेस/सपा गठबंधन)- 42,089
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ज्ञात हो कि बिजली, पानी, सड़क, सिंचाई, यातायात, पलायन, अन्ना मवेशी इत्यादि मुद्दे आज भी यहां बरकरार हैं। वर्ष 1974 में बांदा सदर सीट में कटौती कर तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ। 1981 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह इसी सीट से उप चुनाव लड़कर विधायक बने। प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए वीपी सिंह फतेहपुर से लोकसभा का चुनाव जीते थे।
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तब तिंदवारी सीट फतेहपुर संसदीय क्षेत्र में ही शामिल थी। यहां के मतदाताओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री को बड़ी संख्या में वोट दिए थे। बाद में तिंदवारी को हमीरपुर-महोबा संसदीय क्षेत्र में शामिल कर दिया गया। वीपी सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में जनपद के मवई गांव में कताई मिल की स्थापना हुई थी।
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लेकिन 1990 में यह बंद हो गई। आज तक दोबारा चालू नहीं हो पाई। हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए। मिल का मुद्दा अभी भी बरकरार है। यह बात अलग है कि चुनाव में कोई दल या प्रत्याशी इसे अपने एजेंडे में शामिल नहीं किए हैं।
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तिंदवारी विधान सभा क्षेत्र में मतदाता-
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कुल मतदाता- 3,14,424
पुरुष मतदाता- 1,72,875
महिला मतदाता- 1,41,544
मतदान केंद्र- 225
मतदेय स्थल- 384
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तिंदवारी क्षेत्र से आज तक विधायक-
1974 : जगन्नाथ सिंह (भारतीय जनसंघ)। 1977 : जगन्नाथ सिंह (जनता पार्टी)। 1980 : शिव प्रताप सिंह (कांग्रेस)। 1981 : वीपी सिंह (कांग्रेस)। 1985 : अर्जुन सिंह (कांग्रेस)। 1989 : चंद्रभान सिंह (जनता दल)। 1991 : विशंभर प्रसाद निषाद (बसपा)। 1993 : विशंभर प्रसाद निषाद (बसपा)।
1996 : महेंद्र पाल निषाद (बसपा)। 2002 : विशंभर प्रसाद निषाद (सपा)। 2007 : विशंभर प्रसाद निषाद (सपा)। 2012 : दलजीत सिंह (कांग्रेस)। 2017 : बृजेश प्रजापति (भाजपा)
तिंदवारी विधान सभा के 13 चुनावों में सर्वाधिक चार बार कांग्रेस के विधायक हुए। इसके बाद तीन बार यहां के मतदाताओं ने बसपा को अपनाया। सपा को दो बार सफलता मिली। भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी, जनता दल और भाजपा को एक-एक बार मौका मिला।
नए परिसीमन में बांदा के 15 गांव तिंदवारी में
बांदा। वर्ष 2012 में विधान सभा क्षेत्रों के परिसीमन में बदलाव हुआ। तब तक तिंदवारी क्षेत्र बांदा सदर क्षेत्र में शामिल था। सदर क्षेत्र के करीब 15 गांव काटकर तिंदवारी विधानसभा में शामिल कर दिए गए। इनमें मुस्लिम बाहुल्य गांव हथौरा, छनेहरा लालपुर, करबई आदि भी शामिल हैं। इनके अलावा दोहा, कुलकुम्हारी, महोखर, करबई, चिल्ली, गुरेह, बिलबई, मौदहा, कलेक्टर पुरवा, कमनौड़ी, बड़ेहा और फतपुरवा आदि गांव तिंदवारी क्षेत्र में शामिल हो गए। परिसीमन में कुछ गांव तिंदवारी से हटाकर बांदा में शामिल कर दिए गए। इनमें मवई बुजुर्ग, कनवारा, पिपरी, छानी, दरदा, अरबई आदि गांव शामिल हैं।
मतदाताओं का जातीय समीकरण (अनुमानित)
अनुसूचित जाति- 62 हजार, क्षत्रिय- 55 हजार, निषाद- 52 हजार, ब्राह्मण- 23 हजार, मुस्लिम- 20 हजार, यादव- 19 हजार, कुम्हार- 18 हजार, कुशवाहा- 12 हजार, वैश्य- 10 हजार, आरख- 9 हजार, लोधी- 8 हजार, नाई- 5 हजार, साहू- 4 हजार। शेष अन्य जातियां।
मौजूदा चुनाव में तिंदवारी सीट से प्रत्याशी-
प्रत्याशी पार्टी
बृजेश प्रजापति सपा
रामकेश निषाद भाजपा
जयराम सिंह बसपा
आदि शक्ति कांग्रेस
रामचंद्र भाकपा
मूलचंद्र भाशचेपा
अरविंद कुमार निर्दलीय
उत्तम निर्दलीय
मधुराज निर्दलीय
पिछले चुनाव 2017 में प्रमुख चार दलों के प्रत्याशियों को मिले वोट-
बृजेश प्रजापति (भाजपा)- 82,197
जगदीश प्रजापति (बसपा)- 44,790
दलजीत सिंह (कांग्रेस/सपा गठबंधन)- 42,089