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पुल निर्माण कछुआ चाल, कोरोना को बनाया ढाल
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बांदा। कानपुर में नौ किलोमीटर मेट्रो रूट का निर्माण महज दो साल में पूरा हो गया। काशी विश्वनाथ धाम परियोजना भी नीयत समय पर पूरी हो गई। मगर जिले में यमुना और बागै नदी पर बन रहे दो पुल 11 साल बाद भी तैयार नहीं हुए। पांच अन्य पुल बीते छह साल से बन रहे हैं। ये कब तैयार होंगे, इसकी किसी को चिंता नहीं।
अफसरों ने पुलों के निर्माण में देरी के लिए कोरोना को ढाल बना लिया है। हकीकत ये है कि प्रदेश में तीन दलों की सरकारें आईं-गईं, लेकिन पुल अधूरे रहे। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड जिले में 300 करोड़ की लागत से सात पुलों का निर्माण करा रहा है। यमुना और बागै नदी के पुलों का निर्माण 72 फीसदी पूरा होना बताया जा रहा है, जबकि पैसा 85 फीसदी खर्च हो गया है।
शासन 48.93 रुपये मिलना बाकी है। अफसरों का कहना है कि धन मिले तो काम आगे बढ़े। सेतु निर्माण निगम ने पुलों की लेटलतीफी में जो कारण गिनाए हैं उनमें कोरोना को प्रमुखता से शामिल किया है। बजट न मिलना भी राह में रुकावट है। समाजसेवी और आरटीआई एक्टीविस्ट कुलदीप शुक्ला की ओर से सेतु निगम से मांगी गई जानकारी में निगम के उप परियोजना प्रबंधक एसके निरंजन ने पुलों के निर्माण का ब्योरा उपलब्ध कराया है।
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निर्माणाधीन पुलों का विवरण
यमुना नदी में औगासी घाट पुल वर्ष 2011 में स्वीकृत। 50.97 रुपये मिल चुके। 2.68 करोड़ मिलना बाकी। 95 फीसदी काम पूरा
यमुना नदी मरका घाट पुल वर्ष 2011 में स्वीकृत। 38.96 करोड़ मिले। 31.34 करोड़ बाकी। 71 फीसदी काम पूरा।
बागै नदी में ओरा-ममसी मार्ग पुल वर्ष 2016 में स्वीकृत। 14.50 करोड़ रुपये मिल चुके। 76.32 करोड़ बाकी। 84 फीसदी काम पूरा।
नरैनी-कालिंजर बाईपास मार्ग पर फोरलेन पुल 2016 में स्वीकृत। 53. 88 करोड़ मिल चुके। 2.83 करोड़ बाकी। 78 फीसदी काम पूरा।
केन नदी पर पुल वर्ष 2016 में स्वीकृत। 39. 57 करोड़ मिल चुके। 2.8 करोड़ बाकी। 33 फीसदी काम पूरा।
झांसी-मानिकपुर रेलवे लाइन में नया बाईपास फोरलेन पुल 2016 में स्वीकृत। 48. 44 करोड़ मिले। 8.17 करोड़ बाकी। 93 फीसदी निर्माण पूरा।
बागै नदी में भदावल-भसौंधा मार्ग में पुल 2019 में मंजूर। 16.64 करोड़ मिल चुके। 87.64 करोड़ बाकी। 53 फीसदी कार्य पूरा।
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अफसरों ने पुलों के निर्माण में देरी के लिए कोरोना को ढाल बना लिया है। हकीकत ये है कि प्रदेश में तीन दलों की सरकारें आईं-गईं, लेकिन पुल अधूरे रहे। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड जिले में 300 करोड़ की लागत से सात पुलों का निर्माण करा रहा है। यमुना और बागै नदी के पुलों का निर्माण 72 फीसदी पूरा होना बताया जा रहा है, जबकि पैसा 85 फीसदी खर्च हो गया है।
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शासन 48.93 रुपये मिलना बाकी है। अफसरों का कहना है कि धन मिले तो काम आगे बढ़े। सेतु निर्माण निगम ने पुलों की लेटलतीफी में जो कारण गिनाए हैं उनमें कोरोना को प्रमुखता से शामिल किया है। बजट न मिलना भी राह में रुकावट है। समाजसेवी और आरटीआई एक्टीविस्ट कुलदीप शुक्ला की ओर से सेतु निगम से मांगी गई जानकारी में निगम के उप परियोजना प्रबंधक एसके निरंजन ने पुलों के निर्माण का ब्योरा उपलब्ध कराया है।
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निर्माणाधीन पुलों का विवरण
यमुना नदी में औगासी घाट पुल वर्ष 2011 में स्वीकृत। 50.97 रुपये मिल चुके। 2.68 करोड़ मिलना बाकी। 95 फीसदी काम पूरा
यमुना नदी मरका घाट पुल वर्ष 2011 में स्वीकृत। 38.96 करोड़ मिले। 31.34 करोड़ बाकी। 71 फीसदी काम पूरा।
बागै नदी में ओरा-ममसी मार्ग पुल वर्ष 2016 में स्वीकृत। 14.50 करोड़ रुपये मिल चुके। 76.32 करोड़ बाकी। 84 फीसदी काम पूरा।
नरैनी-कालिंजर बाईपास मार्ग पर फोरलेन पुल 2016 में स्वीकृत। 53. 88 करोड़ मिल चुके। 2.83 करोड़ बाकी। 78 फीसदी काम पूरा।
केन नदी पर पुल वर्ष 2016 में स्वीकृत। 39. 57 करोड़ मिल चुके। 2.8 करोड़ बाकी। 33 फीसदी काम पूरा।
झांसी-मानिकपुर रेलवे लाइन में नया बाईपास फोरलेन पुल 2016 में स्वीकृत। 48. 44 करोड़ मिले। 8.17 करोड़ बाकी। 93 फीसदी निर्माण पूरा।
बागै नदी में भदावल-भसौंधा मार्ग में पुल 2019 में मंजूर। 16.64 करोड़ मिल चुके। 87.64 करोड़ बाकी। 53 फीसदी कार्य पूरा।