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गोवंश के चारा-भूसा में घोटाले का आरोप
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अतर्रा। नरैनी तहसील के छतैनी गांव में गोवंश के नाम पर चारा-भूसा घोटाला के आरोप लग रहे हैं। भाजपा के क्षेत्रीय विधायक ने भी मुख्यमंत्री को जांच और कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है।
छतैनी गांव में अस्थाई गोशाला बनाई गई है। इसमें 530 अन्ना पशु पंजीकृत बताए गए थे। उनके चारा-भूसा आदि के लिए हर माह 4.72 लाख रुपये पशु चिकित्सा विभाग से यहां तहसील प्रशासन को दिए जाते थे। यहां से यह पैसा खंड विकास अधिकारी को भेजा जाता है। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव संयुक्त हस्ताक्षरों से पैसा निकालकर खर्च करते हैं।
आरोप है कि मात्र एक बार 10 क्विंटल भूसा लेकर उसी की खरीद कई बार दिखा दी। मौजूदा समय में गोशाला में कोई पशु नहीं है। अस्थाई गोशाला में पशु जंगल में ही घूमकर भूख-प्यास मिटाते रहे। इसकी पुष्टि नरैनी पशु अस्पताल के कर्मचारियों और कालिंजर पशु अस्पताल के ड्रेसर ने भी की है। आरोप है कि फर्जी बाउचर से भूसा खरीद का भुगतान लिया जाता रहा है।
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उधर, प्रभारी चिकित्साधिकारी रामवृक्ष ने इसकी जांच के लिए अधिकारियों को पत्र भेजा है। गोशाला की शुरुआत में मंडलायुक्त ने भी इसका निरीक्षण किया था। उधर, इस बारे में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आईएन सिंह ने दो माह का भुगतान लगभग 9 लाख रुपया रोक दिया है। साथ ही प्रभारी चिकित्साधिकारी से जांच रिपोर्ट मांगी है। उधर, विधायक राजकरन कबीर ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जांच का अनुरोध किया है।
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छतैनी गांव में अस्थाई गोशाला बनाई गई है। इसमें 530 अन्ना पशु पंजीकृत बताए गए थे। उनके चारा-भूसा आदि के लिए हर माह 4.72 लाख रुपये पशु चिकित्सा विभाग से यहां तहसील प्रशासन को दिए जाते थे। यहां से यह पैसा खंड विकास अधिकारी को भेजा जाता है। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव संयुक्त हस्ताक्षरों से पैसा निकालकर खर्च करते हैं।
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आरोप है कि मात्र एक बार 10 क्विंटल भूसा लेकर उसी की खरीद कई बार दिखा दी। मौजूदा समय में गोशाला में कोई पशु नहीं है। अस्थाई गोशाला में पशु जंगल में ही घूमकर भूख-प्यास मिटाते रहे। इसकी पुष्टि नरैनी पशु अस्पताल के कर्मचारियों और कालिंजर पशु अस्पताल के ड्रेसर ने भी की है। आरोप है कि फर्जी बाउचर से भूसा खरीद का भुगतान लिया जाता रहा है।
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उधर, प्रभारी चिकित्साधिकारी रामवृक्ष ने इसकी जांच के लिए अधिकारियों को पत्र भेजा है। गोशाला की शुरुआत में मंडलायुक्त ने भी इसका निरीक्षण किया था। उधर, इस बारे में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आईएन सिंह ने दो माह का भुगतान लगभग 9 लाख रुपया रोक दिया है। साथ ही प्रभारी चिकित्साधिकारी से जांच रिपोर्ट मांगी है। उधर, विधायक राजकरन कबीर ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जांच का अनुरोध किया है।