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स्वतंत्रता सेनानी रामभजन नहीं रहे

Banda Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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बांदा। स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद रामभजन निगम नहीं रहे। 100 वर्ष की लंबी उम्र के बाद शनिवार को तड़के उन्होंने बांदा शहर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनते ही बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। स्वतंत्रता सेनानी होने के बावजूद उन्होंने सरकारी खजाने से कभी कोई पैसा नहीं लिया।
किरन कालेज के संस्थापक, प्रसिद्ध शिक्षाविद, विचारक, चितंक और किसी जमाने में कम्युनिस्ट पार्टी के अग्रणी नेता रहे रामभजन निगम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रसारण अधिकारी थे। महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने सरकारी नौकरी त्याग दी और स्वतंत्रता संग्राम में कूद पडे़। 1946 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे। इसके बाद 1949 में बांदा में किरन कालेज की स्थापना की। ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लेने के साथ ही पुर्तगाल सरकार से भी मोर्चा संभाला। देश की आजादी के लिए जेल भी गए। 1975 में आपातकाल के दौरान दो साल अलीगढ़ जेल में बिताए। हालांकि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री निगम ने कभी सक्रिय राजनीति में भाग नहीं लिया। 1955 में गोवा में पुर्तगालियों की गोलियों से गंभीर रूप से घायल हो गए। मुंबई में उनका इलाज जर्मन के डाक्टर ने किया। इसी वर्ष 12 जनवरी को उन्होंने उम्र का सौवां पड़ाव पार किया था। उल्लेखनीय है कि उनका जन्म बांदा के मटौंध कसबे में हुआ था। बताते हैं अंतिम समय तक वह अपने विचारों को कलमबंद करते रहे।

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