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नर्सिंगहोम ले गए 13 घायलों को
Banda
Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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बांदा। शादी की रस्म के दौरान छत ढहने से घायल हुए महिला-पुरुषों और बच्चों के इलाज में जिला अस्पताल नाकाम साबित हुआ। लापरवाही का आरोप लगाते हुए एक दर्जन से ज्यादा गंभीर घायलों को उनके परिजन जिला अस्पताल से निजी अस्पताल उठा ले गए। दूसरी ओर डाक्टरों के मुताबिक डीएम ने घायलों के इलाज में डाक्टरों की भूमिका को सराहा है।
कबौली गांव में मोहम्मद शफीक हुसैन की पुत्री मेहनाज की शादी के दौरान स्लेब ढहने से लगभग 70 लोग घायल हो गए। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। जिला अस्पताल में 28 गंभीर घायलों को भर्ती किया गया। लगभग एक दर्जन घायलों को मरहम-पट्टी के बाद छुट्टी दे दी गई। इन 28 घायलों में से 13 घायलों को उनके परिजन बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल से उठा ले गए। निजी अस्पतालों में इलाज शुरू कराया। इनमें अब्दुल रहमान (31), बशीर (70), अहमद (25), शहनाज (40), नफीस फात्मा (18), बेबी (19), रूबीना (21), कनीज फात्मा (30) और फरीदा (46) शामिल हैं। उधर, आसमां (15), रजिया (15) और जायदा (14) को कानपुर रिफर कर दिया गया है। तीमारदारों ने आरोप लगाया कि मरहम-पट्टी के बाद किसी ने सुध नहीं ली। घायल रातभर कराहते रहे।
दूसरी तरफ जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डा.जीएस धानिक का कहना है कि सभी घायलों का उचित इलाज किया जा रहा है। 44 एक्स-रे हुए हैं। उपलब्ध दवाएं दी जा रही हैं। खाना भी उपलब्ध कराया जा रहा है। फिर भी कुछ मरीजों को व्यवस्था नहीं पसंद आईं। ऐसे में वह दूसरी जगह चले गए। अन्य डाक्टरों ने भी कहा कि डीएम ने उनकी भूमिका को सराहा है।
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कबौली गांव में मोहम्मद शफीक हुसैन की पुत्री मेहनाज की शादी के दौरान स्लेब ढहने से लगभग 70 लोग घायल हो गए। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। जिला अस्पताल में 28 गंभीर घायलों को भर्ती किया गया। लगभग एक दर्जन घायलों को मरहम-पट्टी के बाद छुट्टी दे दी गई। इन 28 घायलों में से 13 घायलों को उनके परिजन बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल से उठा ले गए। निजी अस्पतालों में इलाज शुरू कराया। इनमें अब्दुल रहमान (31), बशीर (70), अहमद (25), शहनाज (40), नफीस फात्मा (18), बेबी (19), रूबीना (21), कनीज फात्मा (30) और फरीदा (46) शामिल हैं। उधर, आसमां (15), रजिया (15) और जायदा (14) को कानपुर रिफर कर दिया गया है। तीमारदारों ने आरोप लगाया कि मरहम-पट्टी के बाद किसी ने सुध नहीं ली। घायल रातभर कराहते रहे।
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दूसरी तरफ जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डा.जीएस धानिक का कहना है कि सभी घायलों का उचित इलाज किया जा रहा है। 44 एक्स-रे हुए हैं। उपलब्ध दवाएं दी जा रही हैं। खाना भी उपलब्ध कराया जा रहा है। फिर भी कुछ मरीजों को व्यवस्था नहीं पसंद आईं। ऐसे में वह दूसरी जगह चले गए। अन्य डाक्टरों ने भी कहा कि डीएम ने उनकी भूमिका को सराहा है।
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