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नरैनी क्षेत्र में मनरेगा में जमकर हुई धांधली

Banda Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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बांदा। नरैनी ब्लाक के दस्यु प्रभावित व मध्य प्रदेश सीमावर्ती गांवों में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का बुरा हाल है। लाखों खर्च होने के बाद न मजदूरों का पलायन रुका और न गांव की तस्वीर बदली। ज्यादातर मॉडल तालाबों में धूल उड़ रही है। छोटे किसानों के खेतों में बंधियां बनाने के नाम पर भी जमकर धांधली हुई है। दूसरी ओर परियोजना निदेशक (डीआरडीए) का कहना है कि गलत फीडिंग डिलीट कराकर शिकायत पर मामले की जांच करवाई जाएगी। दोषी मिलन पर कार्रवाई भी होगी।
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नरैनी विकास खंड के अधिकांश गांव मध्य प्रदेश की सीमा से जुडे़ हैं। पहाड़ों व ऊबड़-खाबड़ जंगलों के बीच लंबे समय से दस्यु दलों की तूती बोलती रही। नतीजे में यहां अधिकारी कभी कभार ही जांच को पहुंच पाए। अलबत्ता जिन गांवों में जांच हुई वहां लाखों रुपए के घोटाले उजागर हुए। खुद डीआरडीए परियोजना निदेशक एससी राय कई गांवों की जांच कर चुके हैं। कुछ पंचायत सचिवों व प्रधानों पर कार्रवाई भी हुई। स्वयंसेवी संगठन प्रवास सोसायटी के आशीष सागर ने मनरेगा की वेबसाइट पर ग्राम पंचायत कुरूहूं व उदयपुर को मिली धनराशि और खर्च व मस्टररोल आदि का ब्योरा देखने के बाद ग्रामीणों से असलियत पूछी तो बदहाली उजागर हुई। वित्तीय वर्ष 2009-10 में कुरूहूं ग्राम पंचायत में गांव के मजरा जरैला निवासी राजाभइया पुत्र बबलू समेत पांच किसानों के खेत में बंधी बनाने पर नौ लाख 54 हजार रुपए खर्च दिखाया गया। राजाभइया का कहना है कि इन बंधियों के निर्माण में किसी भी हालत में 40-50 हजार से अधिक का काम नहीं हुआ। अधिकारी मस्टररोल की जांच करें तो घोटाला सामने आएगा। उधर, रही-सही कसर मनरेगा की एमआईएस फीडिंग ने पूरी कर दी। वेबसाइट में 9.54 लाख रुपए की रकम राजाभइया के नाम 14 बार फीड की गई है। यह कुल रकम एक करोड़ 33 लाख 56 हजार होती है। फीडिंग के मुताबिक प्रदेश व केंद्र सरकार तक यह आंकड़ा पहुंच गया। इस बारे में पीडी (डीआरडीए) एससी राय का कहना है कि एक ही नंबर के मस्टर रोल व बाउचर संबंधी फीडिंग गलत हुई है। ऐसी रिपोर्ट डिलीट करा दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2009-10 में उदयपुर ग्राम पंचायत में भी यही हाल रहा। मॉडल तालाब, बंधी निर्माण, नाला खुदाई व संपर्क मार्ग निर्माण में 30 लाख रुपए से अधिक खर्च किए गए हैं। रामजानकी मंदिर के पास मॉडल तालाब में दो लाख 26 हजार रुपए और मरगदहा में रामजानकी मंदिर के पास तालाब खुदाई में तीन लाख 28 हजार रुपए खर्च दिखाया गया है। हालांकि भीटों में मामूली मिट्टी के सिवा कोई काम नजर नहीं आ रहा। जाडे़ के महीनों में ही इन तालाबों में धूल उड़ने लगी थी। खेत-तालाब योजना के तहत भइयालाल के खेत में तालाब बनाने में 78 हजार, रामप्रसाद पुत्र चुन्ना, जगन्नाथ पुत्र सधरवा और रजवा पुत्र भूरा के खेत में तालाब बनाने में 59-59 हजार रुपए खर्च दिखाया गया। नत्थू, भइयालाल, जियालाल, राजाराम, रामजस, मोहनलाल, रामबहोरी आदि के खेतों में बंधी निर्माण में 10 लाख रुपए से अधिक खर्च दिखाया गया है। वृक्षारोपण के नाम पर एक लाख 74 हजार रुपए खर्च हो गए लेकिन पौधों का अता-पता नहीं है। पीडी श्री राय का कहना है कि अधिकांश गांवों में उनसे जांच की मांग की जाती है। कई जगह जांच के बाद कार्रवाई कर चुके हैं। शिकायत पर जांच में दोषी मिलने पर धनराशि की वसूली और गबन की कार्रवाई करने से नहीं चूकेंगे।

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