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विधायक समेत 13 सपाइयों का कोर्ट में सरेंडर
Banda
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:32 AM IST
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बांदा। प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय मार्ग जाम करने में अभियुक्त बनाए गए सपा विधायक सहित एक दर्जन सपाइयों ने सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया। इनके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।
25 दिसंबर 2008 को दोपहर सपा ने मुख्यालय में जन समस्याओं को लेकर तत्कालीन बसपा सरकार के विरुद्ध आंदोलन किया था। कचहरी तिराहा के पास धरना देकर नेशनल हाइवे जाम कर दिया था। इस पर पुलिस ने सपा विधायक विशंभर सिंह यादव समेत आठ लोगों को नामजद और कई सौ अज्ञात के विरुद्ध धारा 147, 427, 188, 504, 506 आईपीसी और सात क्रिमिनल ला एमेडमेंट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामला सीजेएम अदालत में चल रहा है। आरोपी विधायक अदालत में पेशी पर नहीं आए। इस पर उनके और नामजद अन्य सपाइयों के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किए गए। वारंट जारी हुए काफी अर्सा बीत गया। विधायक और आरोपी सपाई अदालत में पेश नहीं हुए।
सोमवार को अधिवक्ता मनोज यादव ने सीजेएम के समक्ष अर्जी देकर विधायक विशंभर सिंह यादव की वकालत करते हुए उन्हें सरेंडर कराया और कहा कि बीमारी की वजह से अदालत नहीं आ सके। अब भूल नहीं होगी। अग्रिम तारीख दे दी जाए। सीजेएम रामदयाल ने अदालत की अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गैर जमानती वारंट तभी निरस्त होगा जब सभी18 आरोपी अदालत में पेश हों। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय सांसदों और विधायकों के लंबित मामलों की मानीटरिंग कर रहे हैं। सीजेएम ने जमानत देने से इनकार किया। इस पर अधिवक्ता ने तमाम दलीलों के साथ विशेष अनुरोध किया। अंतत: सीजेएम ने दोपहर बाद 13 आरोपियों के गैर जमानती वारंट निरस्त कर अगली सुनवाई के लिए 11 नवंबर तय कर दी। सभी को 10-10 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया गया। आरोपियों को अदालत में पेश करने की जिम्मेदारी अधिवक्ता मनोज यादव ने ली।
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इस दौरान विधायक सहित सभी आरोपियों को लगभग पांच घंटे अदालत में रुकना पड़ा। उनके समर्थकों का हुजूम भी अदालत के बाहर इकट्ठा था। अन्य आरोपियों में पूर्व जिलाध्यक्ष इमरान अली सहित अभिमन्यु सिंह, अशोक श्रीवास, असलम खां, मोहम्मद हनीफ, राजेंद्र यादव, रामकरन सिंह उर्फ बच्चे, शिवहरी यादव, प्रमोद गुप्ता, बाबूलाल व बालेंद्र कुमार शामिल हैं।
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25 दिसंबर 2008 को दोपहर सपा ने मुख्यालय में जन समस्याओं को लेकर तत्कालीन बसपा सरकार के विरुद्ध आंदोलन किया था। कचहरी तिराहा के पास धरना देकर नेशनल हाइवे जाम कर दिया था। इस पर पुलिस ने सपा विधायक विशंभर सिंह यादव समेत आठ लोगों को नामजद और कई सौ अज्ञात के विरुद्ध धारा 147, 427, 188, 504, 506 आईपीसी और सात क्रिमिनल ला एमेडमेंट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामला सीजेएम अदालत में चल रहा है। आरोपी विधायक अदालत में पेशी पर नहीं आए। इस पर उनके और नामजद अन्य सपाइयों के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किए गए। वारंट जारी हुए काफी अर्सा बीत गया। विधायक और आरोपी सपाई अदालत में पेश नहीं हुए।
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सोमवार को अधिवक्ता मनोज यादव ने सीजेएम के समक्ष अर्जी देकर विधायक विशंभर सिंह यादव की वकालत करते हुए उन्हें सरेंडर कराया और कहा कि बीमारी की वजह से अदालत नहीं आ सके। अब भूल नहीं होगी। अग्रिम तारीख दे दी जाए। सीजेएम रामदयाल ने अदालत की अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गैर जमानती वारंट तभी निरस्त होगा जब सभी18 आरोपी अदालत में पेश हों। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय सांसदों और विधायकों के लंबित मामलों की मानीटरिंग कर रहे हैं। सीजेएम ने जमानत देने से इनकार किया। इस पर अधिवक्ता ने तमाम दलीलों के साथ विशेष अनुरोध किया। अंतत: सीजेएम ने दोपहर बाद 13 आरोपियों के गैर जमानती वारंट निरस्त कर अगली सुनवाई के लिए 11 नवंबर तय कर दी। सभी को 10-10 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया गया। आरोपियों को अदालत में पेश करने की जिम्मेदारी अधिवक्ता मनोज यादव ने ली।
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इस दौरान विधायक सहित सभी आरोपियों को लगभग पांच घंटे अदालत में रुकना पड़ा। उनके समर्थकों का हुजूम भी अदालत के बाहर इकट्ठा था। अन्य आरोपियों में पूर्व जिलाध्यक्ष इमरान अली सहित अभिमन्यु सिंह, अशोक श्रीवास, असलम खां, मोहम्मद हनीफ, राजेंद्र यादव, रामकरन सिंह उर्फ बच्चे, शिवहरी यादव, प्रमोद गुप्ता, बाबूलाल व बालेंद्र कुमार शामिल हैं।