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मेढक-मेढकी की शादी करा बारिश की प्राथऱ्र्थना
Banda
Updated Wed, 18 Jun 2014 05:31 AM IST
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बांदा। मौसम वैज्ञानिकों द्वारा की गई मानसून में देरी और औसत बारिश कम होने की भविष्यवाणी से बेचैन बुंदेलखंड के किसानों ने इंद्र को मनाने के लिए पुराने टोटके का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में यहां कालिंजर क्षेत्र के दूरस्थ क्षेत्र में आबाद आनंदपुर (सढ़ा) गांव में किसानों ने मेढक-मेढकी की शादी धूमधाम से रचा डाली। कई गांवों के हजारों किसान इसके साक्षी बने। ग्रामीणों का मानना है कि बरसात के प्रमुख प्राणी और बारिश के लिए रात-दिन नदी-तालाबों में टर्र-टर्र करने वाले मेढक और मेढकी (नर-मादा) का विवाह कर देने से बारिश पर्याप्त होती है।
टीचर और किसान ने संभाली जिम्मेदारी
इस अनोखी शादी की तैयारियां कई दिन से चल रही थी। मोहनपुर गांव के पेशे से टीचर यशवंत पटेल और आनंदपुर गांव के मजदूर किसान चंद्रपाल ने कन्या और वर पक्ष की जिम्मेदारियां संभाल कर यह अनोखी शादी कराई। शादी की रस्में मोहनपुर गांव में ही संपन्न कराईं। यशवंत पटेल ने मेढकी के हल्दी-चावल लगाकर स्नान कराया और शादी की चुनरी ओढ़ाई। कन्या पक्ष से पीला और वर पक्ष की ओर से लाल सिंदूर लगाया गया। उधर दूल्हा बने मेढक को हल्दी का उबटन लगाकर स्नान कराने के बाद उसकी आंखों में काजल लगाकर शादी का जोड़ा पहनाया गया। मेढक के सिर पर मौर (मुकुट) भी लगाया। काली मां मंदिर के लिए बारात रवाना हुई। रास्ते भर तीन घोड़े और महिलाएं तथा एक किन्नर बाजे की धुन पर नाचते-गाते रहे।
वर को गोद में उठाया
बारात कन्या पक्ष के दरवाजे पहुंचते ही वर (मेढक) को कन्या के भाई बने राजेश ने गोद में उठाकर मंडप तक पहुंचाया। यहां मेढक-मेढकी को जयमाला और 7 फेरे कराए गए। इसके बाद कुछ दूरी पर स्थित मध्य प्रदेश के पन्ना जनपद में स्थित मिर्दहा तालाब में नवविाहित जोड़े (मेढक और मेढकी) को छोड़कर विदाई दी गई। तालाब में छोड़े जाने से पहले उनका श्रृंगार हटा दिया गया। शादी का यह पूरा कार्यक्रम लगभग साढ़े तीन घंटे चला।
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कन्या पक्ष की ओर से यशवंत पटेल और उसकी पत्नी सुमनलता पटेल, मां राजाबाई, पिता बुआराम सहित गांव के लखन, गोविंद, नीरज, ठाकुरदीन, हेमा देवी, गायत्री, ममता, हेमा, शांति देवी और उपेंद्र इत्यादि शामिल रहे। उधर, वर पक्ष में चंद्रपाल सहित उसकी पत्नी सुदामा देवी सहित रेखा तिवारी, रामस्वरूप (छतरपुर, एमपी) और बाबूलाल इत्यादि सम्मलित रहे। पंडित कमलेश त्रिपाठी (सढ़ा) और बद्री त्रिपाठी (गुरइया, सतना) ने क्रमश: वर और कन्या पक्ष की ओर से अनुष्ठान कराए। स्वयंसेवी संगठन प्रवास सोसाइटी के आशीष सागर सहित राकेश प्रजापति (बड़ोखर), दिनेश यादव (गोपरा), रेखा आदि ने पूरे समय उपस्थित रहकर आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। संयोग से शादी की रस्म के कुछ देर बाद जोरदार बारिश भी हो गई।
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टीचर और किसान ने संभाली जिम्मेदारी
इस अनोखी शादी की तैयारियां कई दिन से चल रही थी। मोहनपुर गांव के पेशे से टीचर यशवंत पटेल और आनंदपुर गांव के मजदूर किसान चंद्रपाल ने कन्या और वर पक्ष की जिम्मेदारियां संभाल कर यह अनोखी शादी कराई। शादी की रस्में मोहनपुर गांव में ही संपन्न कराईं। यशवंत पटेल ने मेढकी के हल्दी-चावल लगाकर स्नान कराया और शादी की चुनरी ओढ़ाई। कन्या पक्ष से पीला और वर पक्ष की ओर से लाल सिंदूर लगाया गया। उधर दूल्हा बने मेढक को हल्दी का उबटन लगाकर स्नान कराने के बाद उसकी आंखों में काजल लगाकर शादी का जोड़ा पहनाया गया। मेढक के सिर पर मौर (मुकुट) भी लगाया। काली मां मंदिर के लिए बारात रवाना हुई। रास्ते भर तीन घोड़े और महिलाएं तथा एक किन्नर बाजे की धुन पर नाचते-गाते रहे।
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वर को गोद में उठाया
बारात कन्या पक्ष के दरवाजे पहुंचते ही वर (मेढक) को कन्या के भाई बने राजेश ने गोद में उठाकर मंडप तक पहुंचाया। यहां मेढक-मेढकी को जयमाला और 7 फेरे कराए गए। इसके बाद कुछ दूरी पर स्थित मध्य प्रदेश के पन्ना जनपद में स्थित मिर्दहा तालाब में नवविाहित जोड़े (मेढक और मेढकी) को छोड़कर विदाई दी गई। तालाब में छोड़े जाने से पहले उनका श्रृंगार हटा दिया गया। शादी का यह पूरा कार्यक्रम लगभग साढ़े तीन घंटे चला।
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कन्या पक्ष की ओर से यशवंत पटेल और उसकी पत्नी सुमनलता पटेल, मां राजाबाई, पिता बुआराम सहित गांव के लखन, गोविंद, नीरज, ठाकुरदीन, हेमा देवी, गायत्री, ममता, हेमा, शांति देवी और उपेंद्र इत्यादि शामिल रहे। उधर, वर पक्ष में चंद्रपाल सहित उसकी पत्नी सुदामा देवी सहित रेखा तिवारी, रामस्वरूप (छतरपुर, एमपी) और बाबूलाल इत्यादि सम्मलित रहे। पंडित कमलेश त्रिपाठी (सढ़ा) और बद्री त्रिपाठी (गुरइया, सतना) ने क्रमश: वर और कन्या पक्ष की ओर से अनुष्ठान कराए। स्वयंसेवी संगठन प्रवास सोसाइटी के आशीष सागर सहित राकेश प्रजापति (बड़ोखर), दिनेश यादव (गोपरा), रेखा आदि ने पूरे समय उपस्थित रहकर आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। संयोग से शादी की रस्म के कुछ देर बाद जोरदार बारिश भी हो गई।