{"_id":"41-107417","slug":"Banda-107417-41","type":"story","status":"publish","title_hn":"40.17 करोड़ से शुरू होगी आईडब्ल्यूएमपी परियोजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
40.17 करोड़ से शुरू होगी आईडब्ल्यूएमपी परियोजना
Banda
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
बांदा। बुंदेलखंड पैकेज के तहत 40.176 करोड़ रुपए की लागत से आईडब्ल्यूएमपी परियोजना शुरू की गई है। इसमें सात ब्लाकों का चयन किया गया है। इसके तहत वर्ष 2017 तक पैकेज का धन खर्च कर पिछड़े जिलेवासियों की आय बढ़ानी है। परियोजना क्रियान्वयन को पहली बार स्वयं संस्थाओं को इसका दायित्व सौंपा गया है। संस्थाएं प्रत्येक राजस्व ग्राम में समूहों का गठन कर ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराएंगी। कम लागत में दोहरी फसलों के उत्पादन को प्रेरित करेंगी।
केंद्र सरकार ने चित्रकूट मंडल में पिछड़ापन दूर कर ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुधारने को बुंदेलखंड पैकेज के तहत अरबों रुपए झोली में डाले। सरकारी विभाग बजट से न तो निर्धारित काम करा पाए और न ही धन खर्च कर सके। अब सरकार ने सारा काम एनजीओ को सौंप दिया है। सरकारी विभाग सिर्फ वित्तीय कार्य देखेंगे। बुंदेलखंड पैकेज के तहत जिले में 40.176 करोड़ की लागत से इंट्रीगेटर वाटर शेड मैनेजमेंट प्रोग्राम (आईडब्ल्यूएमपी) स्वयंसेवी संस्था संचालित करेंगी।
केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड विशेष पैकेज के तहत जिले में वर्ष 2010-11 में 40.176 करोड़ रुपए की लागत से आईडब्ल्यूएमपी परियोजना शुरू की थी। परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी रामगंगा कमांड विभाग को सौंपी गई थी। पूरा साल बीत गया, पर विभाग परियोजना का 50 फीसदी भी धन नहीं खर्च कर सका। कुछ खर्च भी किया तो वह जमीनी स्तर कहीं दिखा ही नहीं। परियोजना पूर्ण करने का समय 2017 निर्धारित कर दिया है। अब इसका दायित्व रामगंगा कमांड के अलावा भूमि सरंक्षण विभाग को सौंपा दिया गया है। वित्तीय खर्च का लेखा-जोखा विभाग रखेगा और पहली बार स्वयंसेवी संस्था परियोजना के संचालन का कार्य देखेंगी। परियोजना के तहत प्रत्येक राजस्व गांव में जल उपभोक्ता व प्रयोक्ता दो तरह के समूह गठित होंगे। जल उपभोक्ता समूह के तहत खेतों की मेड़ बंदी, चेकडेम, वाटर टैंक व लेआउट बनाने का कार्य होगा। इसका कुल लक्ष्य 33 हजार 480 हेक्टेयर क्षेत्रफल रखा गया है। जबकि प्रयोक्ता समूह गरीबी उन्मूलन के लिए कार्य करेगी। इसके तहत किसानों को शून्य लागत से फसलों का उत्पादन कराना, गरीबों को रोजगार मुहैया कराना आदि शामिल होगा। समूहों के पदाधिकारी भ्रमण पर राजस्थान जाएंगे। वहां से खेती व विकास का तौर-तरीका सीखेंगे।
विज्ञापन
भूमि संरक्षण विभाग में परियोजना का सारा खाका तैयार किया जा चुका है। लखनऊ की संस्था मानव विकास एवं सेवा संस्थान बबेरू तथा कमासिन ब्लाक में परियोजना क्रियान्वित करेगी। संस्थान ने समूहों के संचालन के लिए पदाधिकारियों का चयन कर उन्हें जिम्मेदारियां सौंप दी हैं जबकि बिसंडा, तिंदवारी, जसपुरा, बड़ोखर, नरैनी आदि ब्लाकों के लिए नामित एनजीओं ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले।
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने चित्रकूट मंडल में पिछड़ापन दूर कर ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुधारने को बुंदेलखंड पैकेज के तहत अरबों रुपए झोली में डाले। सरकारी विभाग बजट से न तो निर्धारित काम करा पाए और न ही धन खर्च कर सके। अब सरकार ने सारा काम एनजीओ को सौंप दिया है। सरकारी विभाग सिर्फ वित्तीय कार्य देखेंगे। बुंदेलखंड पैकेज के तहत जिले में 40.176 करोड़ की लागत से इंट्रीगेटर वाटर शेड मैनेजमेंट प्रोग्राम (आईडब्ल्यूएमपी) स्वयंसेवी संस्था संचालित करेंगी।
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड विशेष पैकेज के तहत जिले में वर्ष 2010-11 में 40.176 करोड़ रुपए की लागत से आईडब्ल्यूएमपी परियोजना शुरू की थी। परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी रामगंगा कमांड विभाग को सौंपी गई थी। पूरा साल बीत गया, पर विभाग परियोजना का 50 फीसदी भी धन नहीं खर्च कर सका। कुछ खर्च भी किया तो वह जमीनी स्तर कहीं दिखा ही नहीं। परियोजना पूर्ण करने का समय 2017 निर्धारित कर दिया है। अब इसका दायित्व रामगंगा कमांड के अलावा भूमि सरंक्षण विभाग को सौंपा दिया गया है। वित्तीय खर्च का लेखा-जोखा विभाग रखेगा और पहली बार स्वयंसेवी संस्था परियोजना के संचालन का कार्य देखेंगी। परियोजना के तहत प्रत्येक राजस्व गांव में जल उपभोक्ता व प्रयोक्ता दो तरह के समूह गठित होंगे। जल उपभोक्ता समूह के तहत खेतों की मेड़ बंदी, चेकडेम, वाटर टैंक व लेआउट बनाने का कार्य होगा। इसका कुल लक्ष्य 33 हजार 480 हेक्टेयर क्षेत्रफल रखा गया है। जबकि प्रयोक्ता समूह गरीबी उन्मूलन के लिए कार्य करेगी। इसके तहत किसानों को शून्य लागत से फसलों का उत्पादन कराना, गरीबों को रोजगार मुहैया कराना आदि शामिल होगा। समूहों के पदाधिकारी भ्रमण पर राजस्थान जाएंगे। वहां से खेती व विकास का तौर-तरीका सीखेंगे।
विज्ञापन
भूमि संरक्षण विभाग में परियोजना का सारा खाका तैयार किया जा चुका है। लखनऊ की संस्था मानव विकास एवं सेवा संस्थान बबेरू तथा कमासिन ब्लाक में परियोजना क्रियान्वित करेगी। संस्थान ने समूहों के संचालन के लिए पदाधिकारियों का चयन कर उन्हें जिम्मेदारियां सौंप दी हैं जबकि बिसंडा, तिंदवारी, जसपुरा, बड़ोखर, नरैनी आदि ब्लाकों के लिए नामित एनजीओं ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले।