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90 फीसदी सरकारी कर्मचारी खा रहे फ्री का राशन

Wed, 18 May 2022 11:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 May 2022 11:12 PM IST
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90 percent government employees are eating free ration
90 percent government employees are eating free ration - फोटो : BANDA
बांदा। सरकारी नौकरी, घर में ट्रैक्टर, कार और करोड़ों की कीमत के मकान मालिक दो साल से फ्री का राशन ले रहे हैं। शासन की सख्ती के बाद ऐसे राशन कार्डों के सरेंडर के लिए जिला पूर्ति विभाग सहित तहसील स्तर पर पूर्ति निरीक्षक कार्यालयों में लाइनें लगी हैं। अब तक दो हजार से अधिक लोगों ने राशन कार्ड सरेंडर कर दिए हैं। इनमें 90 फीसदी सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
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जिले में शहर सहित ग्रामीण अंचलों में 702 दुकानें हैं। इनमें तीन लाख से अधिक अंत्योदय व पात्र गृहस्थी के राशन कार्ड धारक हैं। शासन की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना व प्रधानमंत्री अन्न योजना के तहत इन्हें गेहूं, चावल, नमक, तेल, चना दिया जा रहा है।
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पहली मई को जिलाधिकारियों को राशन कार्डों के सत्यापन व अपात्र पाए जाने पर 24 रुपये किलो गेहूं व 32 रुपये किलो चावल सहित चना, तेल, नमक की वसूली बाजार रेट में किए जाने के आदेश दिए थे। साथ ही 20 मई तक स्वेच्छा से राशन कार्डों का सरेंडर करने वालों को कार्रवाई से छूट प्रदान करने को कहा था। इसके बाद जिला पूर्ति विभाग व तहसील स्तर पर पूर्ति निरीक्षक कार्यालयों में राशन कार्ड सरेंडर करने वालों की लंबी लाइनें लगी हैं। अब तक जनपद में दो हजार से अधिक राशन कार्डों का सरेंडर किया गया है।
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पात्र व अपात्र के मानक स्पष्ट न होने से असमंजस
राशन कार्ड की पात्रता में गरीबों के लिए बाइक व पक्का मकान बाधक है। पात्र व अपात्र के मानक स्पष्ट न होने से कार्ड धारक असमंजस की स्थिति में फंसे हैं। विभाग ने राशन कार्ड में ऐसे लोगों को अपात्र माना है जिनके पास बाइक, रंगीन टीवी व पक्का मकान, एसी, चार पहिया वाहन, जनरेटर, दुकान, सरकारी नौकरी पेंशनधारक हैं। सरकार खुद ही गरीबों को पीएम, सीएम, लोहिया आवास जैसी योजनाओं से पक्के मकान बनवाकर दे रही है। ऐसे में बाइक व मकान का मानक गलत है।

वर्जन -
किसी योजना के तहत मकान बना है तो वह अपात्र की श्रेणी में नहीं आता है। खुद का बनवाया मकान नहीं होना चाहिए। बाइक, बिजली, नल कनेक्शन, एसी आदि है तो वह अपात्र की श्रेणी में आता है। राशन कार्ड सरेंडर करने वालों से फार्म में यह सब डिटेल लिखवाया जा रहा है। जो पात्र हैं उसे वापस कर दिया जाता है। - उबैदुर्रहमान, जिला पूर्ति विभाग, बांदा
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