{"_id":"5c87f10ebdec2239135eacaa","slug":"81552412942-banda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुंदेलखंड में फूलों की खेती से फलफूल सकते हैं किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुंदेलखंड में फूलों की खेती से फलफूल सकते हैं किसान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। बुंदेलखंड में फूलों की खेती से भी किसान फलफूल सकते हैं। इसकी यहां काफी संभावनाएं हैं। इसी श्रृंखला में कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग में गेंदा, चाइना एस्टर और ग्लैडियोलस फूलों का शोध मूल्यांकन चल रहा है। गेंदा की छह प्रमुख प्रजातियों का मूल्यांकन किया जा रहा है।
कृषि विश्वविद्यालय में मंगलवार को कुलपति डा. यूएस गौतम ने उद्यान महाविद्यालय का निरीक्षण किया। यहां हो रही सब्जी, फल और फूलों को देखा। उन्होंने कहा बुंदेलखंड में दलहन व तिलहन प्रमुख फसल है। लेकिन मौजूदा परिवेशों में इनके अलावा भी अन्य फसलों की संभावनाएं बढ़ी हैं।
बुंदेलखंड में उपलब्ध संसाधनों से कृषक पुष्प उत्पादन से अपनी आमदनी दोगुनी कर सकते हैं। इसके लिए यहां की जलवायु और मृदा दोनों ही मुफीद हैं। फूलों की खेती के इच्छुक किसान इसकी तकनीकी जानकारी के लिए विश्वविद्यालय से सलाह ले सकते हैं। उद्यान महाविद्यालय के फ्लोरी कल्चर एवं लैंड स्कैप आर्किटेक्चर विभागाध्यक्ष डा. अजय कुमार सिंह ने बताया विश्वविद्यालय में गेंदा, चाइना एस्टर और ग्लैडियोलस फूलों में शोध मूल्यांकन किया जा रहा है।
विज्ञापन
गेंदा की छह प्रमुख प्रजातियां शामिल हैं। इनमें पांच प्रजातियों पूसा नारंगी, पूसा बसंती, पूसा अर्पिता, पूसा दीप और पूसा केसर तथा एक स्थानीय प्रजाति कल्याण-दो का मूल्यांकन किया जा रहा है। यहां की परिस्थिति अनुकूल और मृदा एवं जलवायु तथा सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी के आधार पर ही मूल्यांकन किया जा रहा है।
डा. सिंह ने बताया बुंदेलखंड में गेंदा की अपार संभावनाएं हैं। यहां प्रजातियों के हिसाब से इसके भाव अलग-अलग हैं। उन्होंने बताया चाइना एस्टर के मूल्यांकन के लिए आईआईएचआर की पांच प्रजातियां और महाराष्ट्र की एक प्रजाति को चयनित किया गया है। ग्लैडियोलस के मूल्यांकन के लिए राष्ट्रीय वनस्पति शोध संस्थान, लखनऊ की 12 प्रजातियां चुनी गई हैं।
शोध टीम के वैज्ञानिक और सहायक अध्यापक डा. राकेश कुमार ने बताया गेंदा के फूल की गुणवत्ता बहुत अच्छी है। फसल का प्रबंधन यदि सही किया जाए तो कम क्षेत्र में भी इससे अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। शोध टीम के वैज्ञानिक केएस तोमर ने बताया कि बुंदेलखंड की सभी मृदाओं (मिट्टी) में गेंदा और ग्लैडियोलस की सफलतम खेती की जा सकती है।
इन सभी फूलों का व्यवसायिक उपयोग है। बाजार में इन्हें कट फ्लावर के रूप में बेचा जा सकता है। बताया 8-10 किसान अगर पुष्पों की खेती करते हैं तो उन्हें बाजार तलाशने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। स्थानीय बाजार में ही सीजन तथा बिना सीजन के उचित मूल्य मिल सकेगा।
बुंदेली मिट्टी कई फूलों के लिए है मुफीद, कृषि विश्वविद्यालय में पांच प्रजातियों पर चल रहा शोध
बुंदेलखंड में गेंदा की अपार संभावनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
कृषि विश्वविद्यालय में मंगलवार को कुलपति डा. यूएस गौतम ने उद्यान महाविद्यालय का निरीक्षण किया। यहां हो रही सब्जी, फल और फूलों को देखा। उन्होंने कहा बुंदेलखंड में दलहन व तिलहन प्रमुख फसल है। लेकिन मौजूदा परिवेशों में इनके अलावा भी अन्य फसलों की संभावनाएं बढ़ी हैं।
विज्ञापन
बुंदेलखंड में उपलब्ध संसाधनों से कृषक पुष्प उत्पादन से अपनी आमदनी दोगुनी कर सकते हैं। इसके लिए यहां की जलवायु और मृदा दोनों ही मुफीद हैं। फूलों की खेती के इच्छुक किसान इसकी तकनीकी जानकारी के लिए विश्वविद्यालय से सलाह ले सकते हैं। उद्यान महाविद्यालय के फ्लोरी कल्चर एवं लैंड स्कैप आर्किटेक्चर विभागाध्यक्ष डा. अजय कुमार सिंह ने बताया विश्वविद्यालय में गेंदा, चाइना एस्टर और ग्लैडियोलस फूलों में शोध मूल्यांकन किया जा रहा है।
विज्ञापन
गेंदा की छह प्रमुख प्रजातियां शामिल हैं। इनमें पांच प्रजातियों पूसा नारंगी, पूसा बसंती, पूसा अर्पिता, पूसा दीप और पूसा केसर तथा एक स्थानीय प्रजाति कल्याण-दो का मूल्यांकन किया जा रहा है। यहां की परिस्थिति अनुकूल और मृदा एवं जलवायु तथा सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी के आधार पर ही मूल्यांकन किया जा रहा है।
डा. सिंह ने बताया बुंदेलखंड में गेंदा की अपार संभावनाएं हैं। यहां प्रजातियों के हिसाब से इसके भाव अलग-अलग हैं। उन्होंने बताया चाइना एस्टर के मूल्यांकन के लिए आईआईएचआर की पांच प्रजातियां और महाराष्ट्र की एक प्रजाति को चयनित किया गया है। ग्लैडियोलस के मूल्यांकन के लिए राष्ट्रीय वनस्पति शोध संस्थान, लखनऊ की 12 प्रजातियां चुनी गई हैं।
शोध टीम के वैज्ञानिक और सहायक अध्यापक डा. राकेश कुमार ने बताया गेंदा के फूल की गुणवत्ता बहुत अच्छी है। फसल का प्रबंधन यदि सही किया जाए तो कम क्षेत्र में भी इससे अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। शोध टीम के वैज्ञानिक केएस तोमर ने बताया कि बुंदेलखंड की सभी मृदाओं (मिट्टी) में गेंदा और ग्लैडियोलस की सफलतम खेती की जा सकती है।
इन सभी फूलों का व्यवसायिक उपयोग है। बाजार में इन्हें कट फ्लावर के रूप में बेचा जा सकता है। बताया 8-10 किसान अगर पुष्पों की खेती करते हैं तो उन्हें बाजार तलाशने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। स्थानीय बाजार में ही सीजन तथा बिना सीजन के उचित मूल्य मिल सकेगा।
बुंदेली मिट्टी कई फूलों के लिए है मुफीद, कृषि विश्वविद्यालय में पांच प्रजातियों पर चल रहा शोध
बुंदेलखंड में गेंदा की अपार संभावनाएं
अमर उजाला ब्यूरो