पानी के लिए जाम किया शहर का मुख्य तिराहा

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 11 May 2019 11:27 PM IST
पानी के लिए जाम किया शहर का मुख्य तिराहा
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पानी के लिए जाम किया शहर का मुख्य तिराहा
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फोटो 11 बीएनडी पी 5 : बलखंडीनाका पुलिस चौकी के सामने जाम लगाए लोगों को समझाते तहसीलदार अवधेश कुमार निगम व कोतवाली प्रभारी।
बांदा। पानी संकट से जूझ रहे शहर के बाशिंदों का सब्र शनिवार को टूट गया। कई मोहल्लों के लोगों ने शहर की आदर्श पुलिस चौकी बलखंडीनाका के सामने तिराहे पर पानी के खाली बर्तन लेकर जाम लगा दिया। प्रशासन और जल संस्थान के विरोध में नारे लगाए। बाजार, महेश्वरी देवी मंदिर, कचहरी, जजी, अस्पताल, स्कूल-कालेज आदि के लिए यही सड़क है। इसे जाम किए जाने से डेढ़ घंटे तक अफरा तफरी रही। छात्र-छात्राओं के वाहनों को भी नहीं निकलने दिया। काफी देर बाद सदर तहसीलदार अवधेश कुमार निगम और कोतवाली प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने उत्तेजित उपभोक्ताओं को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया। चौकी इंचार्ज उपेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों में कांग्रेस नेता अल्लारक्खू, गुड्डन गुप्ता, चुन्नू सैनी, अनिल भारतीय, राकेश गुप्ता, हीरालाल, मायावती, दुलरिया, सावित्री, परशुराम, राजू, अमरजीत, महेश गुप्ता, अनिल कुमार आदि शामिल रहे। ब्यूरो

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फोटो 11 बीएनडी पी 8 : विधायक प्रकाश द्विवेदी।
33 टैंकर लगाए, 19 से खुद निकलेंगे विधायक
बांदा। शहर क्षेत्र में पीने के पानी की मची हायतौबा पर क्षेत्रीय विधायक प्रकाश द्विवेदी 19 मई से जल संस्थान की खबर लेंगे। फिलहाल प्रदेश के आखिरी चरण में होने वाले चुनावों के प्रचार में जुटे विधायक ने बताया कि दो दिन पूर्व पेयजल संकट को लेकर डीएम हीरालाल से मिले थे। उनसे कहा था कि पेयजल के लिए संसाधन उपलब्ध कराएं। 90 प्लस अभियान की तरह इस पर भी काम कराएं। विधायक ने कहा कि उन्होंने पिछले वर्ष की तर्ज पर अपनी खुद की व्यवस्था से शहर में 33 टैंकर लगाए हैं। यह बिना किसी भेदभाव के जलापूर्ति कर रहे हैं। 19 मई को प्रचार से फुर्सत पाते ही बांदा पहुंचेंगे और रोजाना सुबह शहर में खुद भ्रमण कर जलापूर्ति पर नजर रखेंगे। जल संस्थान अभियंताओं को साथ रखेंगे। विधायक ने कहा कि जलापूर्ति में कहीं भी ढिलाई या लापरवाही की बात सामने आई तो संबंधित अभियंता के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जरूर कराई जाएगी। ब्यूरो


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अमृत योजना के कनेक्शनों से बढ़ गई खपत
बांदा। शहर में भीषण पेयजल संकट के पीछे जल संस्थान अमृत योजना को जिम्मेदार ठहरा रहा है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक योजना के तहत शहर में 1200 कनेक्शन किए गए। सभी को जलापूर्ति हो रही है। करीब एक लाख लीटर की और खपत बढ़ गई, जबकि योजना के तहत पहले फेज में जल स्रोत बचाना, दूसरे फेज में पाइप लाइनों की क्षमता बढ़ाना और तीसरे फेज में कनेक्शन देने की व्यवस्था है। ब्यूरो

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गैर राजनीतिक संगठन करेंगे आंदोलन
बांदा। शहर में पेजयल संकट के विरुद्ध गैर राजनीतिक संगठन भी लामबंद हो रहे हैं। ब्राह्मण महासभा, कायस्थ सभा चित्रगुप्त समाज और वैश्य समाज की संयुक्त बैठक में शीघ्र जलापूर्ति में सुधार न होने पर आंदोलन का निर्णय लिया गया। ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष अधिवक्ता संतोष द्विवेदी ने बताया कि शहर के अधिकांश इलाकों में अभूतपूर्व पानी का संकट है। आंदोलनों का भी कोई असर नहीं पड़ रहा। पिछली सरकारों ने चिल्ला घाट यमुना नदी से पाइप डालकर शहर को जलापूर्ति की व्यवस्था की थी। यह योजना भी चालू नहीं हो रही। क्षेत्रीय विधायक और जिलाधिकारी के निर्देश भी जल संस्थान पर बेअसर रहे। भीषण गर्मी में पेयजल संकट बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। शीघ्र ही आंदोलन किया जाएगा। बैठक में रामजी गुप्ता, विजय निगम, संतोष श्रीवास्तव, अद्भुत शर्मा, चिंटू शुक्ला, मनोज शुक्ला, राजेश गुप्ता, नीरज त्रिपाठी, लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी आदि शामिल रहे। ब्यूरो

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सबको गुमराह कर रहे एक्सईएन
शहर में पेयजल संकट की मची हायतौबा के बीच जल संस्थान के खिलाफ कार्य प्रणाली पर अधिशासी अभियंता आम उपभोक्ताओं के साथ जन प्रतिनिधियों और प्रशासन के अफसरों को भी गुमराह कर रहे हैं। शहर के अधिकांश इलाकों में पेयजल संकट है। अधिशासी अभियंता एक ही रटी रटाई दलील दे रहे हैं कि बांदा-भूरागढ़ नेशनल हाइवे में सड़क निर्माण और फोन केबिल की खुदाई से मेन राइजिंग लाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे यह संकट पैदा हुआ है, जबकि असलियत यह है कि जो लाइन क्षतिग्रस्त हुई है, उससे शहर के एक-दो इलाकों में ही जलापूर्ति होती है। केन नदी का पानी सिविल लाइन और कटरा जोन के कुछ ही इलाकों में ही आपूर्ति होता है। अधिकांश मोहल्लों में अतर्रा रोड, बबेरू रोड, तिंदवारी रोड, कनवारा आदि में लगे जल संस्थान के 10 नलकूपों से आपूर्ति होती है। नदी के पानी की लाइनों का इन इलाके से कोई जुड़ाव या वास्ता नहीं है। उनकी लाइनें अलग है। जबकि पेयजल संकट नलकूप आपूर्ति वाले इलाकों में भी है। अधिशासी अभियंता की कार्य प्रणाली से ही जल संस्थान, शासन व प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की साख पर बट्टा लग रहा है। ब्यूरो

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फोटो 11 बीएनडी पी 7 : जल संस्थान कंट्रोल रूम में ड्यूटी पर बैठे कर्मचारी।
हैलो-हैलो, आवाज नहीं आ रही
अवस्थी पार्क स्थित जल संस्थान कार्यालय में बनाया गया कंट्रोल पेयजल संकट कंट्रोल रूम महज रस्म अदायगी साबित हो रहा है। कंट्रोल रूप का बेसिक फोन 05192-227177 कई दिनों से खराब है। चालू होने की हालत में यहां काल किए जाने पर रिसीव करने वाला कर्मचारी कई बार हैलो-हैलो की पुकार लगाने के बाद यह कहकर कि आवाज नहीं आ रही है, फोन रख देता है। कंट्रोल रूम की ड्यूटी पर बैठे लिपिक राम किशोर ने बताया कि फोन की खराबी के बारे में अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

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पूर्व विधायक के गांव में दो दिन से पानी नहीं
बांदा। मुख्यालय के अलावा कस्बों और गांवों में भी जल संस्थान और जल निगम आपूर्ति कर पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। वीआईपी गांव में भी पानी को तरस रहे हैं। लगातार एक दशक तक विधायक रहे शिरोमणि भाई के पैतृक गांव पल्हरी (बबेरू) में दो दिनों से भीषण पेयजल संकट है। गांव में जल निगम के ट्यूबवेल की मोटर फुंक गई है। ग्रामीण एक-एक बाल्टी पानी के लिए तरस रहे हैं। जलापूर्ति का अन्य कोई जरिया नहीं है। पूर्व विधायक ने मंडलायुक्त और डीएम से तत्काल पंप बदलाकर ट्यूबवेल चालू कराने की मांग की है। ब्यूरो





जरूरत 36 एमएलडी, मिल रहा 26 एमएलडी पानी
शहर में रोजाना 10 मिलियन लीटर पानी की कमी
केन नदी के इंटेकवेलों को पानी के लाले
एक्सईएन बोले- हाइवे निर्माण से हालात बिगड़े
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। शहर में पेयजल संकट गहराने की एक खास वजह नलकूप और कुओं से पानी का डिस्चार्ज कम होना भी है। मांग 36 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) की है, जबकि मिल पा रहा है सिर्फ 26 एमएलडी पानी।
शहर की बड़ी आबादी को मुख्य जलापूर्ति केन नदी पर 1970 में बने दो इंटेकवेलों से होती है, लेकिन अधाधुंध बालू खनन से जलधारा प्रभावित होने पर इन इंटेकवेलों तक पानी पर्याप्त नहीं पहुंच रहा। हाल ही में डीएम हीरालाल के आदेश पर जल संस्थान ने नदी में तीन किलोमीटर रेत (बालू) की दीवार के सहारे इंटेकवेलों तक पानी पहुंचाया। यह कोशिश भी नाकाफी साबित हुई। इंटेकवेल से 19.5 एमएलडी पानी मिल रहा है, जबकि क्षमता 26.5 एमएलडी की है। विभाग के मुताबिक 24 घंटे लगातार पंप चलने पर इंटेकवेलों के कुएं सूख जाते हैं।
इसके अलावा शहर के 44 कुओं और करीब 10 नलकूपों से 4-4 एमएलडी पानी मिल पा रहा है। शहर में 996 हैंडपंप हैं। इनमें 89 खराब हैं। इनका रिबोर होना है। एक्सईएन वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि भीषण जल संकट वाले शहर के 10 मोहल्लों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। चार ट्रैक्टरों के सहारे 42 टैंकर लगे हैं। नगरीय इलाकों में कुल 44 नलकूप हैं। भूजल स्तर घटने से 25 फीसदी से ज्यादा डिस्चार्ज घटा है।

चार्ट
जलापूर्ति का ब्योरा
2 इंटेकवेल- 19.5 एमएलडी
44 कुएं- 4.0 एमएलडी
10 नलकूप- 4.0 एमएलडी
42 टैंकर- 4500 लीटर प्रति क्षमता

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16 गांव भी प्रभावित
खंडेह इकाई ठप होने से मटौंध, खैराडा, मोहन पुरवा, अछरौंड़, गोयरा मुगली, उजरेहटा, मरौली, इचौली, भैंसता, कपसा, टिकरी, दुरेड़ी, भूरेड़ी आदि 16 गांवों में पेयजल संकट हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण से भूरागढ़ में 14 इंची पाइप लाइन कई स्थानों में क्षतिग्रस्त हो गई। करीब 16 फिट गहराई में पाइप लाइन दबने से मरम्मत में समय लग रहा है। एक-दो दिन में आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। जिन इलाकों में पानी संकट है वहां मांग के मुताबिक टैंकर भेजे जा रहे हैं। -वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, बांदा।

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