{"_id":"5c4f3f81bdec224df422d38c","slug":"31548697473-banda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंदियों की मौत पर आयोग ने मांग अभिलेख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंदियों की मौत पर आयोग ने मांग अभिलेख
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। दो विचाराधीन बंदियों की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जेल अधिकारियों से न्यायिक जांच रिपोर्ट समेत मृत्यु से संबंधित समस्त अभिलेख तलब किए हैं। बंदियों की मौत पर उनके परिजनों ने आशंकाएं जाहिर की थीं।
फतेहगंज थाना क्षेत्र के कस्बा निवासी अशोक सिंह पुत्र राम बहादुर सिंह को 20 जनवरी 2018 को हत्या के आरोप में जेल भेजा गया था। 26 मार्च को जेल में मौत हो गई। इसी प्रकार कमासिन कस्बा निवासी धर्मपाल उर्फ चिंटू पुत्र हर प्रसाद दहेज हत्या के मामले में 10 अगस्त 2018 को जेल आया था।
13 अक्तूबर को हालत बिगड़ने पर जेल से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां उसकी मौत हो गई। दोनों मौतों में जेल अधिकारियों ने मृत्यु की वजह बीमारी बताई थी। दूसरी तरफ मृतकों के परिजनों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि जेल में उत्पीड़न और मारपीट से मौत हुई हैं। दोनों मौतों पर मजिस्ट्रेटी जांच भी हुई थी।
विज्ञापन
वरिष्ठ अधीक्षक (कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं), लखनऊ वीके सिंह ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (नई दिल्ली) के आदेशों का हवाला देते हुए यहां के वरिष्ठ अधीक्षक (जिला कारागार) को निर्देश दिए हैं कि मृत्यु से संबंधित स्वास्थ्य परीक्षण रिपोर्ट सहित घटना की विस्तृत रिपोर्ट, पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कैसेट/सीडी, उपचार से संबंधित अभिलेख, बिसरा रिपोर्ट व न्यायिक जांच रिपोर्ट आदि एक सप्ताह के अंदर आयोग को उपलब्ध कराएं। उधर, डिप्टी जेलर तारकेश्वर सिंह ने बताया कि आदेश प्राप्त हो गया है। कार्रवाई की जा रही है।
विज्ञापन
फतेहगंज थाना क्षेत्र के कस्बा निवासी अशोक सिंह पुत्र राम बहादुर सिंह को 20 जनवरी 2018 को हत्या के आरोप में जेल भेजा गया था। 26 मार्च को जेल में मौत हो गई। इसी प्रकार कमासिन कस्बा निवासी धर्मपाल उर्फ चिंटू पुत्र हर प्रसाद दहेज हत्या के मामले में 10 अगस्त 2018 को जेल आया था।
विज्ञापन
13 अक्तूबर को हालत बिगड़ने पर जेल से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां उसकी मौत हो गई। दोनों मौतों में जेल अधिकारियों ने मृत्यु की वजह बीमारी बताई थी। दूसरी तरफ मृतकों के परिजनों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि जेल में उत्पीड़न और मारपीट से मौत हुई हैं। दोनों मौतों पर मजिस्ट्रेटी जांच भी हुई थी।
विज्ञापन
वरिष्ठ अधीक्षक (कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं), लखनऊ वीके सिंह ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (नई दिल्ली) के आदेशों का हवाला देते हुए यहां के वरिष्ठ अधीक्षक (जिला कारागार) को निर्देश दिए हैं कि मृत्यु से संबंधित स्वास्थ्य परीक्षण रिपोर्ट सहित घटना की विस्तृत रिपोर्ट, पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कैसेट/सीडी, उपचार से संबंधित अभिलेख, बिसरा रिपोर्ट व न्यायिक जांच रिपोर्ट आदि एक सप्ताह के अंदर आयोग को उपलब्ध कराएं। उधर, डिप्टी जेलर तारकेश्वर सिंह ने बताया कि आदेश प्राप्त हो गया है। कार्रवाई की जा रही है।