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बकस्वाहा में 30 हजार पुराने शैल चित्र और मिले
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30 thousand old rock paintings found in Bakswaha
- फोटो : BANDA
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बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल के नजदीक ही भीमगढ़ में भी दुर्लभ शैल चित्र पाए गए हैं। इन्हें लगभग 25 से 30 हजार पुराना बताया जा रहा है। सभी शैल चित्रों को बकस्वाहा जंगल बचाओ अभियान के पर्यावरण पैरोकारों ने विश्व संरक्षित घोषित करने की मांग को लेकर अभियान छेड़ दिया है।
इसके पूर्व बकस्वाहा जंगल में बड़ी संख्या में पाषाण सभ्यता के शैल चित्र (रॉक पेटिंग्स) पाए जा चुके हैं। जंगल बचाओ अभियान और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और शरद कुमरे आदि की टीम जंगल की चट्टानों में छिपे शैल चित्रों को खोज निकालने के मिशन में लगी है। टीम को जटाशंकर धाम (भीमगढ़) में शैल चित्र मिले हैं। यह सिंधु घाटी से पुरानी पाषाण सभ्यता के बताए गए हैं। छत्रसाल महाराजा कॉलेज में चित्रकला विभागाध्यक्ष प्रो. एसके छारी ने वर्ष 2016 में शोध पत्र के माध्यम से बकस्वाहा और जटाशंकर के शैल चित्रों को दुनियां के सबसे प्राचीन शैल चित्र होने का दावा किया था। अब एक बार फिर शैल चित्रों का मुद्दा गरमा रहा है।
जंगल में शैल चित्र खोज रही है टीम
बकस्वाहा (छतरपुर) क्षेत्र के कसेरा निमानी वन रेंज, भीमगढ़, कुसमार आदि में पाषाण कालीन शैल चित्र मिल चुके हैं। पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम अब बिजावर, किशनगढ़ में कई स्थानों पर शैल चित्रों की खोज के लिए जुटी हुई है। पुरातत्वविदें से विचार विमर्श किया जा रहा है।
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150 किमी की बेल्ट में शैल चित्र
बकस्वाहा जंगल बचाओ अभियान कार्यकर्ता अमित भटनागर के अनुसार आदिवासियों का यह इलाका पर्यटन हब का रूप ले सकता है। बताया कि अर्जुन कुंड, जैन तीर्थ नैनागिरी, बकस्वाहा, भीमगढ़, कसेरा, निमानी, भीमकुंड, मोना शैया, जटाशंकर, देवरा, हथनी टोर, किशनगढ़, सुखवाहा तक लगभग 150 किलोमीटर जंगल की बेल्ट में शैल चित्र देखें जा चुके हैं। माना जा रहा है कि शैल चित्रों की यह श्रंखला खजुराहो, अजयगढ़, पन्ना के आगे तक होगी।
पर्यटन हब बने, रोजगार के अवसर होंगे
सिंधु घाटी से काफी पुराने पाषाण कालीन सभ्यता के प्रमाण बकस्वाहा जंगलों में मिले हैं। अमित का कहना है कि यह प्राकृतिक रूप से भरपूर हैं। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से यह प्रमाणित भी हो चुका है। सरकार को चाहिए इस पिछड़े क्षेत्र को पर्यटन हब के रूप में विकसित करे। इससे रोजगार के अवसर मिलेंगे।
शैल चित्र खोजने में जुटी है ये टीम
शैल चित्रों को खोजने की मुहिम में अमित भटनागर (बिजावर), शरद सिंह कुमरे (भोपाल) सहित बहादुर आदिवासी, राहुल अहिरवार, भगत राम तिवारी, प्रेमलाल यादव, शंकर लाल लोधी, तुलसी आदिवासी, जुगुल कुशवाहा, बबलू कुशवाहा, खरगा राजगोड़ और भगवती आदि शामिल हैं।
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इसके पूर्व बकस्वाहा जंगल में बड़ी संख्या में पाषाण सभ्यता के शैल चित्र (रॉक पेटिंग्स) पाए जा चुके हैं। जंगल बचाओ अभियान और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और शरद कुमरे आदि की टीम जंगल की चट्टानों में छिपे शैल चित्रों को खोज निकालने के मिशन में लगी है। टीम को जटाशंकर धाम (भीमगढ़) में शैल चित्र मिले हैं। यह सिंधु घाटी से पुरानी पाषाण सभ्यता के बताए गए हैं। छत्रसाल महाराजा कॉलेज में चित्रकला विभागाध्यक्ष प्रो. एसके छारी ने वर्ष 2016 में शोध पत्र के माध्यम से बकस्वाहा और जटाशंकर के शैल चित्रों को दुनियां के सबसे प्राचीन शैल चित्र होने का दावा किया था। अब एक बार फिर शैल चित्रों का मुद्दा गरमा रहा है।
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जंगल में शैल चित्र खोज रही है टीम
बकस्वाहा (छतरपुर) क्षेत्र के कसेरा निमानी वन रेंज, भीमगढ़, कुसमार आदि में पाषाण कालीन शैल चित्र मिल चुके हैं। पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम अब बिजावर, किशनगढ़ में कई स्थानों पर शैल चित्रों की खोज के लिए जुटी हुई है। पुरातत्वविदें से विचार विमर्श किया जा रहा है।
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150 किमी की बेल्ट में शैल चित्र
बकस्वाहा जंगल बचाओ अभियान कार्यकर्ता अमित भटनागर के अनुसार आदिवासियों का यह इलाका पर्यटन हब का रूप ले सकता है। बताया कि अर्जुन कुंड, जैन तीर्थ नैनागिरी, बकस्वाहा, भीमगढ़, कसेरा, निमानी, भीमकुंड, मोना शैया, जटाशंकर, देवरा, हथनी टोर, किशनगढ़, सुखवाहा तक लगभग 150 किलोमीटर जंगल की बेल्ट में शैल चित्र देखें जा चुके हैं। माना जा रहा है कि शैल चित्रों की यह श्रंखला खजुराहो, अजयगढ़, पन्ना के आगे तक होगी।
पर्यटन हब बने, रोजगार के अवसर होंगे
सिंधु घाटी से काफी पुराने पाषाण कालीन सभ्यता के प्रमाण बकस्वाहा जंगलों में मिले हैं। अमित का कहना है कि यह प्राकृतिक रूप से भरपूर हैं। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से यह प्रमाणित भी हो चुका है। सरकार को चाहिए इस पिछड़े क्षेत्र को पर्यटन हब के रूप में विकसित करे। इससे रोजगार के अवसर मिलेंगे।
शैल चित्र खोजने में जुटी है ये टीम
शैल चित्रों को खोजने की मुहिम में अमित भटनागर (बिजावर), शरद सिंह कुमरे (भोपाल) सहित बहादुर आदिवासी, राहुल अहिरवार, भगत राम तिवारी, प्रेमलाल यादव, शंकर लाल लोधी, तुलसी आदिवासी, जुगुल कुशवाहा, बबलू कुशवाहा, खरगा राजगोड़ और भगवती आदि शामिल हैं।

30 thousand old rock paintings found in Bakswaha- फोटो : BANDA

30 thousand old rock paintings found in Bakswaha- फोटो : BANDA