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30 लाख बह गए, नाले फिर भी जाम
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 22 Jun 2016 11:30 PM IST
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नाले-नालियाें की सफाई के दावोें की पोल खोलती शहर के स्वराज कालोनी की गली।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। बारिश के दस्तक देते ही मंडल मुख्यालय में जलभराव और बाढ़ जैसे नजारे दिखने लगे हैं। चंद मिनटों की बारिश से उफना रहे नाले-नालियां घर के चौकों तक गंदगी फैला रही हैं। उधर, नगर पालिका ने नाला सफाई के नाम पर अब तक 30 लाख रुपये खर्च कर डाले हैं। पालिका के अभिलेखों में दो सौ से ज्यादा सफाई कर्मचारियों को लगाया गया है।
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बारिश के तेज झाेंकों ने शहर के जल निकास (ड्रेनेज सिस्टम) की पोल खोल दी है। नगर पालिका एक माह पहले से ही जोर-शोर से नाले साफ कराने का प्रचार कर रही थी। कुछेक स्थानों पर सफाई कराई भी गई। साफ किए गए नाले वाले क्षेत्रों में भी बारिश ने क्षेत्रीय बाशिंदों के लिए जलभराव का संकट खड़ा कर दिया है। शहर में कुछेक इलाकों को छोड़कर अधिकांश सड़कें और गलियां बारिश के झोंके में ही उफना रही हैं।
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एक हफ्ते मेें दो बार हुई बारिश ने पालिका के इन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। बुधवार को भी कुछ मिनटों की बारिश ने शहर के तमाम इलाकों मेें नरकीय स्थितियां पैदा कर दीं। उफनाई नालियों का गंदा पानी घर के चौकों तक समा गया। सड़क पर घुटनों तक पानी भर गया।
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दूसरी तरफ नगर पालिका के दावे कुछ और हैं। पालिका के सफाई निरीक्षक एचएस निरंजन का कहना है कि शहर मेें कुल 42 नाले हैं। इनमें 25 की सफाई कराई जा चुकी है। पांच में काम चल रहा है। बताया कि नालों की सफाई में अब तक 30 लाख रुपये खर्च हो गए हैं।
नाला सफाई के लिए 80 कर्मचारी लगाए गए हैं। बकौल सफाई निरीक्षक इनमें 10 कर्मियों की टीम कहीं भी नाला या नाली चोक होने पर तत्काल भेजने के लिए आरक्षित की गई हैं। निरीक्षक के मुताबिक आउटसोर्सिंग में रखे गए सफाई कर्मियों की संख्या 204 है। स्थानीय कर्मचारी सिर्फ 88 हैं। आउट सोर्सिंग वालों को 7500 रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है।
हैरत की बात यह है कि पालिका अधिकारी चार माह पहले से नाला गैंग रखे जाने की बात रखे जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 25 नाले ही साफ होना बता रहे हैं। अध्यक्ष विनोद जैन का कहना है कि नाला, नाली जाम होने में स्थानीय लोगों का भी दोष है। ये अपना कूड़ा, कचरा और पॉलिथीन नाली-नालों में फेंक रहे हैं।