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ध्वनि प्रदूषण न रोकने पर विधिक सेवा प्राधिकरण ने जताई आपति
Updated Wed, 14 Mar 2018 11:32 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, डीजे और आतिशबाजी पर रोक संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और दिशा-निर्देशों पर कड़ाई से अमल न होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर सख्त आपत्ति जताई है। तत्काल रोक लगाकर रिपोर्ट मांगी है।
विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव खल्लीकुज्जमां द्वारा बुधवार को डीएम व एसपी को भेजे पत्र में कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने रिट पिटीशन संख्या-72/1998 में आदेश पारित किया है कि रात 10 बजे के बाद किसी भी सार्वजनिक स्थान पर सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर न बजने दें। पटाखे आदि भी न जलाए जाएं। भारत सरकार की ध्वनि प्रदूषण नियमावली 2000 में भी यही प्रावधान किया गया है। सचिव ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों और दिशा-निर्देशों का अनुपालन पुलिस और प्रशासन का परम कर्तव्य है लेकिन इसमें उदासीनता बरती जा रही है।
यह शादियों का सीजन है साथ ही बोर्ड और अन्य परीक्षाएं चल रही हैं। शादियों व अन्य कार्यक्रमों में रात 10 बजे के बाद भी लाउडस्पीकर, डीजे पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। परीक्षार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सचिव ने कहा है कि हम सभी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अक्षरश: अनुपालन कराने के लिए बाध्य हैं। सचिव ने डीएम और एसपी से रिट का हवाला देकर रात 10 से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर, डीजे, बैंड आदि कोई भी ध्वनि प्रदूषण कार्यक्रमों पर रोक लगाने को कहा है। साथ ही अनुपालन आख्या प्रेषित करने को कहा है ताकि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ को भेजी जा सके।
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-प्राधिकरण सचिव ने डीएम-एसपी को जारी किया पत्र
-शादियों में शोर से परीक्षार्थियों को भी हो रही परेशानी
-सुप्रीम कोर्ट के आदेश लागू करना सभी की बाध्यता
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बांदा। रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, डीजे और आतिशबाजी पर रोक संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और दिशा-निर्देशों पर कड़ाई से अमल न होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर सख्त आपत्ति जताई है। तत्काल रोक लगाकर रिपोर्ट मांगी है।
विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव खल्लीकुज्जमां द्वारा बुधवार को डीएम व एसपी को भेजे पत्र में कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने रिट पिटीशन संख्या-72/1998 में आदेश पारित किया है कि रात 10 बजे के बाद किसी भी सार्वजनिक स्थान पर सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर न बजने दें। पटाखे आदि भी न जलाए जाएं। भारत सरकार की ध्वनि प्रदूषण नियमावली 2000 में भी यही प्रावधान किया गया है। सचिव ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों और दिशा-निर्देशों का अनुपालन पुलिस और प्रशासन का परम कर्तव्य है लेकिन इसमें उदासीनता बरती जा रही है।
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यह शादियों का सीजन है साथ ही बोर्ड और अन्य परीक्षाएं चल रही हैं। शादियों व अन्य कार्यक्रमों में रात 10 बजे के बाद भी लाउडस्पीकर, डीजे पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। परीक्षार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सचिव ने कहा है कि हम सभी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अक्षरश: अनुपालन कराने के लिए बाध्य हैं। सचिव ने डीएम और एसपी से रिट का हवाला देकर रात 10 से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर, डीजे, बैंड आदि कोई भी ध्वनि प्रदूषण कार्यक्रमों पर रोक लगाने को कहा है। साथ ही अनुपालन आख्या प्रेषित करने को कहा है ताकि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ को भेजी जा सके।
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-प्राधिकरण सचिव ने डीएम-एसपी को जारी किया पत्र
-शादियों में शोर से परीक्षार्थियों को भी हो रही परेशानी
-सुप्रीम कोर्ट के आदेश लागू करना सभी की बाध्यता