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फिर 950 तालाब खुदवाने की तैयारी
Updated Fri, 19 Jan 2018 11:04 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में पिछले साल 547 तालाब खुदवाए गए थे। ज्यादातर का अतापता नहीं है। लक्ष्य एक हजार का था। अब फिर 950 तालाब खुदवाने की तैयारी है। इनमें 10.84 करोड़ रुपये खर्च होंगे। भूमि संरक्षण विभाग की ओर से खेत-तालाब योजना के तहत भेजे प्रस्ताव पर शासन ने मंजूरी दे दी है। बांदा में 20 व चित्रकूट में 45 तालाबों पर काम चल रहा है।
मंडल के सभी 24 ब्लाकों में से 16 में अत्यधिक जल दोहन और वाटर रिचार्ज न होने से डार्क जोन में शामिल हो चुके हैं। वर्ष 2015-16 में 22 मीटर लंबे, 20 मीटर चौड़े और तीन मीटर गहरे तालाब खुदवाए गए थे। एक तालाब में 52 हजार रुपये शासन से अनुदान दिया गया और इतनी ही रकम किसानों को अंशदान के रूप में लगानी पड़ी। वर्ष 2016-17 में बांदा में 150 छोटे और 157 बड़े तालाब खोदे गए। बड़े तालाबों की साइज 35 मीटर चौड़े, 30 मीटर लंबे व तीन मीटर गहरा है।
2.28 लाख रुपये की लागत में 50 फीसदी सरकारी अनुदान है। चित्रकूट में 114 व 126 बड़े तालाब बनाए गए। दोनों जनपदों में 547 तालाब पूरे हो चुके हैं। चालू वर्ष में बांदा में 120 और चित्रकूट में 45 तालाबों में खुदाई का कार्य चल रहा है। इसके बाद भूमि संरक्षण विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजकर 950 तालाबों की स्वीकृति मांगी थी। इनमें चित्रकूट में 275, महोबा, हमीरपुर व बांदा में 225-225 तालाब स्वीकृत हो चुके हैं। इन तालाबों पर प्रति तालाब 1.14 लाख रुपये के हिसाब से 10.84 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। खेत-तालाबों का मकसद किसानों को सिंचाई सुविधा भी उपलब्ध कराना है।
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नियमों में बदलाव
बांदा। तालाबों के प्रति किसानों में रुझान बढ़ाने के लिए शासन ने नियमों में बदलाव कर दिया है। अब किसान खुद तालाब की खुदाई करा सकेंगे। उनके खातों में चार किस्तों में धनराशि भेजी जाएगी। चित्रकूटधाम के भूमि संरक्षण उप निदेशक डॉ. एके सिंह ने बताया कि पहली किस्त में तालाब की 50 फीसदी खुदाई होने पर 57 हजार, पूरी खुदाई होने पर 28 हजार मिलेंगे। मेड़ों की दरेसी व पक्का काम होने पर शेष 28 हजार रुपये भेजे जाएंगे।
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में पिछले साल 547 तालाब खुदवाए गए थे। ज्यादातर का अतापता नहीं है। लक्ष्य एक हजार का था। अब फिर 950 तालाब खुदवाने की तैयारी है। इनमें 10.84 करोड़ रुपये खर्च होंगे। भूमि संरक्षण विभाग की ओर से खेत-तालाब योजना के तहत भेजे प्रस्ताव पर शासन ने मंजूरी दे दी है। बांदा में 20 व चित्रकूट में 45 तालाबों पर काम चल रहा है।
मंडल के सभी 24 ब्लाकों में से 16 में अत्यधिक जल दोहन और वाटर रिचार्ज न होने से डार्क जोन में शामिल हो चुके हैं। वर्ष 2015-16 में 22 मीटर लंबे, 20 मीटर चौड़े और तीन मीटर गहरे तालाब खुदवाए गए थे। एक तालाब में 52 हजार रुपये शासन से अनुदान दिया गया और इतनी ही रकम किसानों को अंशदान के रूप में लगानी पड़ी। वर्ष 2016-17 में बांदा में 150 छोटे और 157 बड़े तालाब खोदे गए। बड़े तालाबों की साइज 35 मीटर चौड़े, 30 मीटर लंबे व तीन मीटर गहरा है।
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2.28 लाख रुपये की लागत में 50 फीसदी सरकारी अनुदान है। चित्रकूट में 114 व 126 बड़े तालाब बनाए गए। दोनों जनपदों में 547 तालाब पूरे हो चुके हैं। चालू वर्ष में बांदा में 120 और चित्रकूट में 45 तालाबों में खुदाई का कार्य चल रहा है। इसके बाद भूमि संरक्षण विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजकर 950 तालाबों की स्वीकृति मांगी थी। इनमें चित्रकूट में 275, महोबा, हमीरपुर व बांदा में 225-225 तालाब स्वीकृत हो चुके हैं। इन तालाबों पर प्रति तालाब 1.14 लाख रुपये के हिसाब से 10.84 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। खेत-तालाबों का मकसद किसानों को सिंचाई सुविधा भी उपलब्ध कराना है।
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नियमों में बदलाव
बांदा। तालाबों के प्रति किसानों में रुझान बढ़ाने के लिए शासन ने नियमों में बदलाव कर दिया है। अब किसान खुद तालाब की खुदाई करा सकेंगे। उनके खातों में चार किस्तों में धनराशि भेजी जाएगी। चित्रकूटधाम के भूमि संरक्षण उप निदेशक डॉ. एके सिंह ने बताया कि पहली किस्त में तालाब की 50 फीसदी खुदाई होने पर 57 हजार, पूरी खुदाई होने पर 28 हजार मिलेंगे। मेड़ों की दरेसी व पक्का काम होने पर शेष 28 हजार रुपये भेजे जाएंगे।