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15 रिपोर्ट और निगेटिव, 56 के नमूने जांच को भेजे
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बांदा। संक्रमण के संदिग्ध नमूनों की झांसी लैब में जांच की शुरुआत के बाद यहां के नमूनों की निगेटिव रिपोर्ट आने का सिलसिला जारी है। सोमवार को 15 सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके पहले भी तीन दिनों से नमूनों की रिपोर्ट लगातार निगेटिव आ रही है। अब तक कुल 396 निगेटिव रिपोर्ट आ चुकी हैं। सोमवार को 56 और नमूने भेजे गए हैं। इन्हें मिलाकर झांसी लैब से 70 नमूने जांच के लिए लंबित हैं। इनमें एक पूर्व पॉजिटिव का सैंपल भी शामिल है।
मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि सोमवार को प्राप्त जांच रिपोर्टों में बांदा के सभी 15 रिपोर्ट निगेटिव आई हैं। उधर, मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि लैब से 14 नमूनों की रिपोर्ट आनी बाकी है। इनमें शिव गांव का संक्रमित भी शामिल है। इसके अलावा सोमवार को 56 और नमूने भेजे गए हैं। इन सभी को मेडिकल कालेज में क्वारंटीन में रखा गया है। ये सभी महानगरों से लौटने वाले मजदूर है। इनके अलावा 3 अन्य लोगों को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।
गांव वालों ने किशोर को नहीं घुसने दिया
बांदा। पहली रिपोर्ट में पॉजिटिव मिले किशोर मजदूर की दो लगातार निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद उसे मेडिकल कालेज से छुट्टी दे दी गई। उसे गांव में घर पर ही क्वारंटीन के लिए एंबुलेंस से रवाना कर दिया गया, लेकिन जब यह किशोर मजदूर अपने गांव रजवा डेरा (माचा, तिंदवारी) पहुंचा तो गांव वाले विरोध पर उतर आए और उसे गांव में दाखिल नहीं होने दिया। अंतत: किशोर उसी एंबुलेंस वापस ले आया गया। अब उसे कृषि विश्वविद्यालय में बनाए गए विशेष क्वारंटीन वार्ड में रखा गया है। यहां वह 14 दिन रहेगा।
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मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि सोमवार को प्राप्त जांच रिपोर्टों में बांदा के सभी 15 रिपोर्ट निगेटिव आई हैं। उधर, मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि लैब से 14 नमूनों की रिपोर्ट आनी बाकी है। इनमें शिव गांव का संक्रमित भी शामिल है। इसके अलावा सोमवार को 56 और नमूने भेजे गए हैं। इन सभी को मेडिकल कालेज में क्वारंटीन में रखा गया है। ये सभी महानगरों से लौटने वाले मजदूर है। इनके अलावा 3 अन्य लोगों को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।
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गांव वालों ने किशोर को नहीं घुसने दिया
बांदा। पहली रिपोर्ट में पॉजिटिव मिले किशोर मजदूर की दो लगातार निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद उसे मेडिकल कालेज से छुट्टी दे दी गई। उसे गांव में घर पर ही क्वारंटीन के लिए एंबुलेंस से रवाना कर दिया गया, लेकिन जब यह किशोर मजदूर अपने गांव रजवा डेरा (माचा, तिंदवारी) पहुंचा तो गांव वाले विरोध पर उतर आए और उसे गांव में दाखिल नहीं होने दिया। अंतत: किशोर उसी एंबुलेंस वापस ले आया गया। अब उसे कृषि विश्वविद्यालय में बनाए गए विशेष क्वारंटीन वार्ड में रखा गया है। यहां वह 14 दिन रहेगा।
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