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जीएसटी के बाद पूजा सामग्री में महंगाई की मार
Updated Sun, 09 Jul 2017 11:55 PM IST
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बांदा। जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने के बाद एक तरफ जहां पूजन सामग्री के भाव बढ़ गए हैं तो दूसरी तरफ पूजन सामग्री की आवक बंद हो जाने से इसकी किल्लत पैदा हो गई है। पूजन सामग्री की किल्लत और महंगाई होना कष्टदायक है।
नागा स्वामी मंदिर, बबेरू के महंत उदय बाबा ने कहा कि भतीजे वरुण का आईएएस में चयन हुआ है। इसी उपलक्ष्य में काली देवी मंदिर में भंडारा कराया है। पहले 100 गरीबों व साधु-संतों को खिलाने में 25 से 30 हजार खर्च होता था। अब 50 से 60 हजार रुपये खर्च हुआ है।
प्रदेश की सत्ता में संत को मुखिया बनाया गया है। ऐसे में पूजन-सामग्री महंगी होना भक्तों के लिए कष्टकारक है। इस पर अंकुश लगना चाहिए। दुकानदार दिलीप कुमार बोले कि जीएसटी की वजह से फुटकर व्यवसायियों की आफत है। खासकर पूजन सामग्री के दुकानदार पिस रहे हैं।
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थोक व्यवसायी आर्डर व बिल लगाने के बावजूद माल नहीं दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर खरीदारी में बढ़ाकर दाम वसूले जा रहे हैं। मजबूरी में पीतल के घंटा, सिंहासन, शंख आदि महंगे दामों में ग्राहकों को देने पड़ते हैं। पूजन सामग्री विक्रेता ने कहा कि सावन के एक दिन पहले से दुकान में ग्राहकों की लंबी लाइन लगती थी। नौकर रखने पड़ते थे। इस बार जीएसटी ने धंधा चौपट कर दिया।
ग्राहक घंटा, चुनरी, नारियल, चंदन आदि पुराने भावों पर मांगते हैं। कहां से दें ? दुकान का खर्च निकालना मुश्किल पड़ रहा है। दिन भर की 20 हजार की बिक्री दो हजार रुपये की भी नहीं रह गई। डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्य कर संजय कुशवाहा ने बताया कि जीएसटी का पूजन सामग्री पर कोई असर नहीं हुआ है। जो दाम बढ़े बताए जा रहे हैं वह स्थानीय दुकानदारों ने खुद बढ़ा रखे हैं।
व्यापारियों पर अभी सख्ती नहीं की जा रही है। इसलिए वे वाणिज्य कर के पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने में हीलाहवाली कर रहे हैं। पंजीयन कराकर जीएसटी के बिल से माल मंगाएं तो कोई दिक्कत नहीं है। टिन नंबर पर बिलिंग का काम नहीं हो रहा है। फिर भी व्यापारी इसी का इस्तेमाल करने पर आमादा हैं। व्यापारियों को रजिस्ट्रेशन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि जीएसटी जल्द ही ढर्रे पर आ जाए।
-पीतल का900 रुपये वाला घंटा 1100 का हुआ
-सामग्री आवक न होने से सावन में श्रद्धालु परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
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नागा स्वामी मंदिर, बबेरू के महंत उदय बाबा ने कहा कि भतीजे वरुण का आईएएस में चयन हुआ है। इसी उपलक्ष्य में काली देवी मंदिर में भंडारा कराया है। पहले 100 गरीबों व साधु-संतों को खिलाने में 25 से 30 हजार खर्च होता था। अब 50 से 60 हजार रुपये खर्च हुआ है।
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प्रदेश की सत्ता में संत को मुखिया बनाया गया है। ऐसे में पूजन-सामग्री महंगी होना भक्तों के लिए कष्टकारक है। इस पर अंकुश लगना चाहिए। दुकानदार दिलीप कुमार बोले कि जीएसटी की वजह से फुटकर व्यवसायियों की आफत है। खासकर पूजन सामग्री के दुकानदार पिस रहे हैं।
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थोक व्यवसायी आर्डर व बिल लगाने के बावजूद माल नहीं दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर खरीदारी में बढ़ाकर दाम वसूले जा रहे हैं। मजबूरी में पीतल के घंटा, सिंहासन, शंख आदि महंगे दामों में ग्राहकों को देने पड़ते हैं। पूजन सामग्री विक्रेता ने कहा कि सावन के एक दिन पहले से दुकान में ग्राहकों की लंबी लाइन लगती थी। नौकर रखने पड़ते थे। इस बार जीएसटी ने धंधा चौपट कर दिया।
ग्राहक घंटा, चुनरी, नारियल, चंदन आदि पुराने भावों पर मांगते हैं। कहां से दें ? दुकान का खर्च निकालना मुश्किल पड़ रहा है। दिन भर की 20 हजार की बिक्री दो हजार रुपये की भी नहीं रह गई। डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्य कर संजय कुशवाहा ने बताया कि जीएसटी का पूजन सामग्री पर कोई असर नहीं हुआ है। जो दाम बढ़े बताए जा रहे हैं वह स्थानीय दुकानदारों ने खुद बढ़ा रखे हैं।
व्यापारियों पर अभी सख्ती नहीं की जा रही है। इसलिए वे वाणिज्य कर के पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने में हीलाहवाली कर रहे हैं। पंजीयन कराकर जीएसटी के बिल से माल मंगाएं तो कोई दिक्कत नहीं है। टिन नंबर पर बिलिंग का काम नहीं हो रहा है। फिर भी व्यापारी इसी का इस्तेमाल करने पर आमादा हैं। व्यापारियों को रजिस्ट्रेशन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि जीएसटी जल्द ही ढर्रे पर आ जाए।
-पीतल का900 रुपये वाला घंटा 1100 का हुआ
-सामग्री आवक न होने से सावन में श्रद्धालु परेशान
अमर उजाला ब्यूरो