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Banda News: महिला से दुष्कर्म में 10 साल की सजा
Fri, 02 Jun 2023 11:51 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 02 Jun 2023 11:51 PM IST
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बांदा। मानसिक बीमार अनुसूचित जाति की महिला से दुष्कर्म में दोषी को न्यायाधीश ने 10 वर्ष की सजा और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। प्रकरण की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससीएसटी की अदालत में चल रही थी। मुकदमा में 13 वर्ष बाद फैसला आया है।
मटौंध थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता की मां की तहरीर पर पुलिस ने 15 जनवरी 2010 को मटौंध कस्बा के मोहल्ला घुरहा थोक निवासी भूरा सिंह के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया था। तहरीर में पीड़ित मां ने बताया था उसकी बेटी मानसिक बीमार है। इसी के चलते शादी के बाद पति ने उसे साथ रखने से मना कर दिया था। तब से बेटी मायके में मेरे साथ रह रही है। 15 जनवरी को सुबह 10 बजे बेटी बिना बनाए खेतों की तरफ निकल गई थी।
इसी दौरान भूरा सिंह ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घर आकर बेटी ने मां को आपबीती बताई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया। जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इस पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। मुकदमा की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससीएसटी अनु सक्सेना की अदालत में चल रही थी।
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विशेेष लोक अभियोजक विमल सिंह और महेंद्र कुमार द्विवेदी ने सात गवाह पेश किए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने अपने 23 पेज के फैसले में भूरा सिंह को दोषी करार दिया। जज ने जुर्माना की आधी धनराशि पीड़िता की मां को देने का आदेश दिया है, क्योंकि मुकदमा के दौरान पीड़िता की मौत हो गई थी। मुकदमे में 13 वर्ष बाद फैसला आया है।
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मटौंध थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता की मां की तहरीर पर पुलिस ने 15 जनवरी 2010 को मटौंध कस्बा के मोहल्ला घुरहा थोक निवासी भूरा सिंह के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया था। तहरीर में पीड़ित मां ने बताया था उसकी बेटी मानसिक बीमार है। इसी के चलते शादी के बाद पति ने उसे साथ रखने से मना कर दिया था। तब से बेटी मायके में मेरे साथ रह रही है। 15 जनवरी को सुबह 10 बजे बेटी बिना बनाए खेतों की तरफ निकल गई थी।
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इसी दौरान भूरा सिंह ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घर आकर बेटी ने मां को आपबीती बताई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया। जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इस पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। मुकदमा की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससीएसटी अनु सक्सेना की अदालत में चल रही थी।
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विशेेष लोक अभियोजक विमल सिंह और महेंद्र कुमार द्विवेदी ने सात गवाह पेश किए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने अपने 23 पेज के फैसले में भूरा सिंह को दोषी करार दिया। जज ने जुर्माना की आधी धनराशि पीड़िता की मां को देने का आदेश दिया है, क्योंकि मुकदमा के दौरान पीड़िता की मौत हो गई थी। मुकदमे में 13 वर्ष बाद फैसला आया है।