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Balrampur News: बिना बजट अटका आठ अरब की 74 परियोजनाओं का काम
Sat, 23 Mar 2024 01:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 23 Mar 2024 01:26 PM IST
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बलरामपुर। जिले में संचालित विकास कार्यों के क्रियान्वयन में कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी काफी भारी पड़ रही है। बजट राशि न मिलने से 8 आठ अरब के खर्च से पूरी होने वाली 74 परियोजनाओं का काम भी बीच में अटक गया है। इन सभी परियोजनाओं का कार्य वित्तीय वर्ष 2022 में ही पूरा होना था। इसके बावजूद पहले तो कार्य की शुरुआत में हुई देरी, इसके बाद कार्यदायी संस्थाओं की तरफ से आवंटित बजट राशि के खर्च का हिसाब समय पर नहीं दिया गया। इससे आवंटित बजट की बाकी किस्त राशि न मिल पाने से ही परियोजनाओं का काम बीच में अटक गया है।
जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल की जुड़ी 74 परियोजनाओं के लिए करीब आठ अरब की स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2019-20 में हुई थी। इनके कार्य का आवंटन 13 कार्यदायी संस्थाओं को करते हुए 5.41 अरब रुपये भी कार्य कराने के लिए जारी हुए थे। इसमें से 4.71 अरब रुपये भी निर्माण कार्य पर खर्च भी कर दिए। लेकिन समय से किसी भी किस्त का उपभोग प्रमाणपत्र शासन को उपलब्ध नहीं कराया। अभी भी आवंटित किस्त राशि का 69.80 करोड़ रुपया कार्यदायी संस्थाओं के पास उपलब्ध है। हिसाब-किताब न मिलने से ही बजट की अवशेष किस्त राशि भी रोक दी गई है। इसी कारण मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी विकास योजनाओं का कार्य भी अधूरा पड़ा है।
अब वित्तीय वर्ष बीतने के बाद चुनाव पूरे होने पर परियोजनाओं में लापरवाही संस्थाओं को भारी पड़ेगी। इसके चलते ही चुनाव के दौरान सभी कार्यदायी संस्थाएं खर्च का हिसाब दुरुस्त करने में जुटी हैं। ताकि नए वित्तीय वर्ष में वह बजट का हिसाब दे कर किस्त की बाकी राशि प्राप्त कर सकें। डीएम अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि सभी कार्यदायी संस्थाओंं को परियोजनाओं के निर्माण पर अब तक खर्च हुई धनराशि का उपभोग प्रमाण पत्र शासन को भेजने का निर्देश दिया गया है। ताकि कार्यदायी संस्थाओं को बची हुई बजट राशि सीधे आवंटित होने से अटका निर्माण कार्य जल्दी पूरा हो सके।
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जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल की जुड़ी 74 परियोजनाओं के लिए करीब आठ अरब की स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2019-20 में हुई थी। इनके कार्य का आवंटन 13 कार्यदायी संस्थाओं को करते हुए 5.41 अरब रुपये भी कार्य कराने के लिए जारी हुए थे। इसमें से 4.71 अरब रुपये भी निर्माण कार्य पर खर्च भी कर दिए। लेकिन समय से किसी भी किस्त का उपभोग प्रमाणपत्र शासन को उपलब्ध नहीं कराया। अभी भी आवंटित किस्त राशि का 69.80 करोड़ रुपया कार्यदायी संस्थाओं के पास उपलब्ध है। हिसाब-किताब न मिलने से ही बजट की अवशेष किस्त राशि भी रोक दी गई है। इसी कारण मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी विकास योजनाओं का कार्य भी अधूरा पड़ा है।
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अब वित्तीय वर्ष बीतने के बाद चुनाव पूरे होने पर परियोजनाओं में लापरवाही संस्थाओं को भारी पड़ेगी। इसके चलते ही चुनाव के दौरान सभी कार्यदायी संस्थाएं खर्च का हिसाब दुरुस्त करने में जुटी हैं। ताकि नए वित्तीय वर्ष में वह बजट का हिसाब दे कर किस्त की बाकी राशि प्राप्त कर सकें। डीएम अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि सभी कार्यदायी संस्थाओंं को परियोजनाओं के निर्माण पर अब तक खर्च हुई धनराशि का उपभोग प्रमाण पत्र शासन को भेजने का निर्देश दिया गया है। ताकि कार्यदायी संस्थाओं को बची हुई बजट राशि सीधे आवंटित होने से अटका निर्माण कार्य जल्दी पूरा हो सके।
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