{"_id":"687a9a9dcfc5c36c84099101","slug":"to-spend-foreign-funds-changur-used-to-get-the-registry-done-at-the-purchase-price-balrampur-news-c-13-1-lko1062-1298584-2025-07-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: विदेशी फंड खपाने के लिए छांगुर खरीद मूल्य पर कराता था रजिस्ट्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: विदेशी फंड खपाने के लिए छांगुर खरीद मूल्य पर कराता था रजिस्ट्री
Sat, 19 Jul 2025 12:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 19 Jul 2025 12:33 AM IST
विज्ञापन
बलरामपुर के मधपुर उतरौला में स्थित छांगुर का घर।
बलरामपुर। अवैध धर्मांतरण से विदेशों से मिलने वाले फंड को खपानेे के लिए छांगुर व उनके सहयोगी कई दावपेच चलते थे। जमीनों की खरीद के लिए तय मालियत पर रजिस्ट्री कराने के बजाय बिक्री का तय मूल्य दिखाकर ही रजिस्ट्री कराता था। जिससे बैंकों में जमा धनराशि निकालने में आसानी होती थी। यह अलग बात है कि जो बिक्री मूल्य रजिस्ट्री या बैनामे में दिखाए जाते थे, उतने जमीन के मालिक को मिलते नहीं थे। यहीं से बैंकों से रुपये हड़पने और फिर उसका उपयोग दूसरे कार्यों के लिए करना आसान हो जाता था।
सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी विजय शंकर ने बताया कि अक्सर ऐसा होता है कि काला धन को सफेद करने के लिए बैनामों में स्टांप बढ़े हुए बिक्री मूल्य पर लोग चुकाते हैं। इससे स्टांप चोरी जैसे आरोपों से तो बचत होती ही है, खरीद-बिक्री में रुपयों को बचाना भी आसान होता है। बताया कि जमीन का सौदा करके किसी को अधिक रुपये देकर वापस भी लोग ले लेते हैं। इस तरह अभिलेखों में सही दिखते हैं जबकि हेराफेरी बड़ी रहती है। छांगुर के मामले में ऐसे ही संकेत मिले हैं। बैनामों के अभिलेखों को ईडी ले गई है।
अवैध धर्मांतरण की कमान संभालने की तैयारी कर रहा था रशीद
बलरामपुर। छांगुर की गिरफ्तारी के बाद मधपुर का रशीद शाह ही अवैध धर्मांतरण की कमान को संभालने की तैयारी कर रहा था। वह आजमगढ़ में छांगुर के भतीजे के साथ धर्मांतरण कराने में लगा था। इस मामले में आजमगढ़ में केस भी दर्ज हुआ था। एसटीएफ ने बृहस्पतिवार को आरोपी को गिरफ्तार कर उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
विज्ञापन
रशीद ने छांगुर की गिरफ्तारी के बाद उसके परिजनों से भी भेंट की थी। जानकारी हासिल की थी और छांगुर की कोठी में रहने वाले करीब 55 लोगों को एक बार फिर जोड़ने में जुटा था। उसकी सक्रियता की खबर एसटीएफ को लग चुकी थी। इसके बाद एसटीएफ ने जाल बुना था। छांगुर से पूर्व में जुड़े रहे एक व्यक्ति ने बताया कि रशीद भी काफी सक्रिय रहता था। उसकी मंशा भी छांगुर से मिलती थी इसलिए उसको भतीजे के साथ छांगुर ने लगाया था। फिलहाल रशीद की गिरफ्तारी से लोग सहमे हुए हैं।
विज्ञापन
सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी विजय शंकर ने बताया कि अक्सर ऐसा होता है कि काला धन को सफेद करने के लिए बैनामों में स्टांप बढ़े हुए बिक्री मूल्य पर लोग चुकाते हैं। इससे स्टांप चोरी जैसे आरोपों से तो बचत होती ही है, खरीद-बिक्री में रुपयों को बचाना भी आसान होता है। बताया कि जमीन का सौदा करके किसी को अधिक रुपये देकर वापस भी लोग ले लेते हैं। इस तरह अभिलेखों में सही दिखते हैं जबकि हेराफेरी बड़ी रहती है। छांगुर के मामले में ऐसे ही संकेत मिले हैं। बैनामों के अभिलेखों को ईडी ले गई है।
विज्ञापन
अवैध धर्मांतरण की कमान संभालने की तैयारी कर रहा था रशीद
बलरामपुर। छांगुर की गिरफ्तारी के बाद मधपुर का रशीद शाह ही अवैध धर्मांतरण की कमान को संभालने की तैयारी कर रहा था। वह आजमगढ़ में छांगुर के भतीजे के साथ धर्मांतरण कराने में लगा था। इस मामले में आजमगढ़ में केस भी दर्ज हुआ था। एसटीएफ ने बृहस्पतिवार को आरोपी को गिरफ्तार कर उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
विज्ञापन
रशीद ने छांगुर की गिरफ्तारी के बाद उसके परिजनों से भी भेंट की थी। जानकारी हासिल की थी और छांगुर की कोठी में रहने वाले करीब 55 लोगों को एक बार फिर जोड़ने में जुटा था। उसकी सक्रियता की खबर एसटीएफ को लग चुकी थी। इसके बाद एसटीएफ ने जाल बुना था। छांगुर से पूर्व में जुड़े रहे एक व्यक्ति ने बताया कि रशीद भी काफी सक्रिय रहता था। उसकी मंशा भी छांगुर से मिलती थी इसलिए उसको भतीजे के साथ छांगुर ने लगाया था। फिलहाल रशीद की गिरफ्तारी से लोग सहमे हुए हैं।