{"_id":"677d65b071f9df544204806f","slug":"tiger-footprints-seen-in-khairman-reservoir-of-sohelwa-balrampur-news-c-99-1-brp1010-119304-2025-01-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: सोहेलवा के खैरमान जलाशय में दिखे बाघ के पगचिह्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: सोहेलवा के खैरमान जलाशय में दिखे बाघ के पगचिह्न
विज्ञापन
बनकटवा रेंज के खैरमान जलाशय में मिला बाघ का पगचिह्न।-संवाद
हरैया सतघरवा (बलरारामपुर)। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के वनकटवा रेंज के खैरमान जलाशय में बाघ के पगचिह्न दिखाई देने से जहां ग्रामीण सहम उठे हैं। वहीं वन्यजीव प्रेमी इसे पर्यावरण के लिए सुखद संकेत बता रहे हैं। प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. एम. सेम्मारन का कहना है कि पगचिह्न की जानकारी मिली है। पगचिह्न बाघ के हैं या तेंदुए के, इसकी जानकारी के लिए वन कर्मियों को जांच के निर्देश दिए हैं।
वन्यजीव प्रेमी निहारिका सिंह का कहना है कि यह पगचिह्न बड़े आकार का है, जो बाघ का हो सकता है। बाघ का जंगल में विचरण करना सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के लिए सुखद संकेत है। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग 452 वर्ग किलोमीटर में फैला है। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस जंगल में अनेक वन्यजीव विचरण करते हैं। मंगलवार के सुबह जंगलवर्ती गांव के लोग खैरमान जलाशय के तरफ घुमने गए तो उन्हें जलाशय में बड़े आकार के पगचिह्न दिखे। गांव वालों का अनुमान है कि यह पगचिह्न बाघ के ही हैं। ग्रामीण राकेश कुमार, विकास कुमार, सुनील कुमार, बिक्रम, मनोज कुमार ने बताया कि इस जलाशय में जंगली जानवर पानी पीने के लिए नियमित आते रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक जंगल में जलस्रोत सूखे पड़े हैं। इससे वह पानी पीने के लिए जलाशय तक आ जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम ने अभी कुछ स्पष्ट नहीं किया है। पगचिह्न की जांच के बाद ही स्थिति साफ होने का दावा किया जा रहा है।
दो साल पहले तीन बाघ होने की भेजी गई थी रिपोर्ट
सोहेलवा वन क्षेत्र में बाघ होने की पुष्टि पहले भी हो चुकी है। वन विभाग ने दो साल पहले जंगल में लगे कैमरों से मिले फुटेज के आधार पर माना था कि तीन बाघ जंगल में हैं। इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई थी, ताकि बाघ के संरक्षण की दिशा में प्रयास हो सकें। डीएफओ ने बताया कि बाघ की पुष्टि होने पर फिर रिपोर्ट भेजी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
वन्यजीव प्रेमी निहारिका सिंह का कहना है कि यह पगचिह्न बड़े आकार का है, जो बाघ का हो सकता है। बाघ का जंगल में विचरण करना सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के लिए सुखद संकेत है। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग 452 वर्ग किलोमीटर में फैला है। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस जंगल में अनेक वन्यजीव विचरण करते हैं। मंगलवार के सुबह जंगलवर्ती गांव के लोग खैरमान जलाशय के तरफ घुमने गए तो उन्हें जलाशय में बड़े आकार के पगचिह्न दिखे। गांव वालों का अनुमान है कि यह पगचिह्न बाघ के ही हैं। ग्रामीण राकेश कुमार, विकास कुमार, सुनील कुमार, बिक्रम, मनोज कुमार ने बताया कि इस जलाशय में जंगली जानवर पानी पीने के लिए नियमित आते रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक जंगल में जलस्रोत सूखे पड़े हैं। इससे वह पानी पीने के लिए जलाशय तक आ जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम ने अभी कुछ स्पष्ट नहीं किया है। पगचिह्न की जांच के बाद ही स्थिति साफ होने का दावा किया जा रहा है।
विज्ञापन
दो साल पहले तीन बाघ होने की भेजी गई थी रिपोर्ट
सोहेलवा वन क्षेत्र में बाघ होने की पुष्टि पहले भी हो चुकी है। वन विभाग ने दो साल पहले जंगल में लगे कैमरों से मिले फुटेज के आधार पर माना था कि तीन बाघ जंगल में हैं। इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई थी, ताकि बाघ के संरक्षण की दिशा में प्रयास हो सकें। डीएफओ ने बताया कि बाघ की पुष्टि होने पर फिर रिपोर्ट भेजी जाएगी।
विज्ञापन