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दीयों से फैलेगा खुशियों का उजाला
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बलरामपुर। पुरानी परंपरा निभाते हुए इस बार भी लोगों ने मिट्टी के दीयों की जमकर खरीदारी की। दीयों की बंपर बिक्री से कुुम्हारों के चेहरे भी खुशी से खिले नजर आए। कुम्हारों का कहना है कि पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार मिट्टी के दीये खूब बिक रहे हैं। जिले में मिट्टी के दीये व बर्तनों का करीब डेढ़ करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इलेक्ट्रानिक झालरों के बीच दीयों ने भी अपना दमखम कायम रखा है। लोगों ने वोकल फॉर लोकल पर विशेष ध्यान दिया। घरों को रोशन करने के लिए लोगों ने कुम्हारों के हाथ के बने दीयों की जमकर खरीदारी की। कुम्हार वारिस, संतोष, कुंदन व राजू आदि ने बताया कि जिले में बाढ़ की वजह से पहले तो कुछ मायूसी हो रही थी लेकिन दो दिन धनतेरस में मिट्टी के दीयों की खूब बिक्री हुई। 100 से 130 रुपये सैकड़ा की दर से दीये बेचे गए।
धनतेरस के दिन रविवार को दीये खरीदने आए सर्वेश सिंह, मंजू तिवारी, प्रमोद गुप्ता व महेंद्र वर्मा ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक झालरों के अलावा घरों को सजाने के लिए मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं। इन्हीं दीयों से घर में पूजा होती है। आधुनिक युग में भी पुरानी परंपरा को निभाना हम सभी का कर्त्तव्य है। कुम्हार भी दीपावली आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उनकी खुशियों को दोगुना करने के लिए हमें मिट्टी के दीये जरूर खरीदने चाहिए।
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इलेक्ट्रानिक झालरों के बीच दीयों ने भी अपना दमखम कायम रखा है। लोगों ने वोकल फॉर लोकल पर विशेष ध्यान दिया। घरों को रोशन करने के लिए लोगों ने कुम्हारों के हाथ के बने दीयों की जमकर खरीदारी की। कुम्हार वारिस, संतोष, कुंदन व राजू आदि ने बताया कि जिले में बाढ़ की वजह से पहले तो कुछ मायूसी हो रही थी लेकिन दो दिन धनतेरस में मिट्टी के दीयों की खूब बिक्री हुई। 100 से 130 रुपये सैकड़ा की दर से दीये बेचे गए।
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धनतेरस के दिन रविवार को दीये खरीदने आए सर्वेश सिंह, मंजू तिवारी, प्रमोद गुप्ता व महेंद्र वर्मा ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक झालरों के अलावा घरों को सजाने के लिए मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं। इन्हीं दीयों से घर में पूजा होती है। आधुनिक युग में भी पुरानी परंपरा को निभाना हम सभी का कर्त्तव्य है। कुम्हार भी दीपावली आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। उनकी खुशियों को दोगुना करने के लिए हमें मिट्टी के दीये जरूर खरीदने चाहिए।
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