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Balrampur News: पक्की सड़क से थारू जनजाति का सफर बनेगा सुगम

Tue, 30 Dec 2025 10:34 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Dec 2025 10:34 PM IST
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The journey of the Tharu tribe will become easier with the paved road
बलरामपुर के परशुरामपुर में भूमि पूजन करते डीएम विपिन कुमार जैन ।-स्रोत: विभाग
गैसड़ी। नेपाल सीमा से सटे पचपेड़वा ब्लॉक के ग्राम परशुरामपुर थारू जनजाति को वन अधिकार अधिनियम का लाभ दिलाने के लिए डीएम विपिन कुमार जैन ने पहल की है। डीएम ने परशुरामपुर गांव में सड़क निर्माण के लिए सोमवार की शाम भूमि पूजन किया। कहा कि गांव में पक्की सड़क बनने से थारू जनजाति का सफर सुगम बनेगा। ग्रामीणों को जंगली जानवरों के हमलों से बचाने की हर संभव कोशिश की जाएगी।
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डीएम ने कहा कि बीते एक माह में जंगली जानवरों के हमले में तीन लोगों की जान चली गई है। बीते दिनों नेपाल सीमा से सटे भांभर रेंज के विशुनपुर कोडर गांव निवासी कमला (25), नेपाल की महिला उर्मिला (25), एवं बेलभरिया गांव के मजरे सड़वा निवासी बिकाई गौतम की जंगली जानवर के हमले में मौत हो गई थी। डीएफओ गौरव गर्ग को निर्देश दिया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीम (क्विक रिस्पॉन्स टीम) को अलर्ट मोड पर रखें। घटनास्थल और आसपास के जंगल क्षेत्र में ड्रोन कैमरों के जरिये 24 घंटे निगरानी भी कराएं। इसमें कोई लापरवाही न बरती जाए। डीएम की पहल पर ग्रामीणों ने संतोष जताया। इस दौरान सीडीओ हिमांशु गुप्त, एसडीएम तुलसीपुर राकेश कुमार जयंत व बीडीओ मौजूद रहे।
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अभी तक नहीं मिले बाघ के पगचिह्ल
डीएफओ ने डीएम को बताया कि मंगलवार तक यहां बाघ के पगचिह्न नहीं मिले हैं। प्रतिदिन सभी टीमें कार्य कर रही हैं। सुबह सात से 10 बजे तक टीमें गांवों में जाकर जंगली जानवरों के पगचिह्न की तलाश कर रही हैं। हिरन व सुअर के पगचिह्न मिले हैं, लेकिन अभी बाघ पगचिह्न नहीं मिले हैं। जबकि जंगल के अंदर तेंदुए के पगचिह्न मिले हैं। दोपहर एक से तीन बजे तक सभी टीमें ग्रामीणों को जागरूक कर रही हैं। साथ ही कतर्निया से डॉक्टर बुलाए गए हैं, जो बाघ होने की जांच करेंगे।
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चार हाई-रिजॉल्यूशन ट्रैकिंग कैमरों से हो रही निगरानी
-डीएफओ ने बताया कि जंगली जानवरों की हर मूवमेंट पर नजर रखने के लिए चार हाई-रिजॉल्यूशन ट्रैकिंग कैमरे लगाए गए हैं। जहां कैमरे लगाए गए हैं वहां जंगली जानवरों के आने-जाने की संभावना सबसे अधिक है। बिशुनपुर कोडर, बेइलिया व परसरामपुर सहित आठ गांवों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। वन विभाग की ट्रैकिंग टीम लगातार पगचिह्न, खून के निशान व अन्य संकेतों के आधार पर जंगली जानवरों की लोकेशन ट्रेस कर रही है। गांवों में जाकर मुनादी व जागरूकता कार्यक्रम कराए जा रहे हैं। हादसों के बाद वन विभाग व स्थानीय पुलिस की संयुक्त गश्त बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। ग्रामीणों को सलाह दी जा रही है कि कोई भी व्यक्ति अकेले जंगल में न जाएं। सुबह-शाम विशेष सावधानी बरतें। बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों को बिना जरूरत बाहर न भेजें। जंगल से सटे रास्तों पर समूह में ही आवाजाही करें।
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रिपोर्ट :: मंगल देव गिरि
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