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Balrampur News: अंतरराष्ट्रीय मैत्री द्वार से नेपाल से दोस्ती का रंग होगा गाढ़ा
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बलरामपुर के भारत-नेपाल सीमा पर भारतमैत्री प्रवेश द्वार के लिए चिह्नित जमीन।-संवाद
जरवा (बलरामपुर)। भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जरवा-कोयलाबास में अब मैत्री प्रवेश द्वार का निर्माण तय हो गया है। वर्ष 2021 से निर्माण की कवायद अब जाकर धरातल पर उतर सकी है। एसएसबी नौवीं वाहिनी चौकी को थोड़ा पीछे करने और तीन शीशम के पेड़ हटाने की तैयारी पूरी हो गई है। तिरंगा लाइट से जगमग इस द्वार से दोनों देश के रिश्ते और मजबूत होंगे। वहीं निगरानी में भी सहूलियत मिलेगी।
30 नवंबर 2021 को सीमा पर मैत्री द्वार के निर्माण की नींव रखी गई थी। उस समय एक करोड़ 14 लाख रुपये का बजट तय हुआ था। अब इसकी लागत बढ़कर एक करोड़ 23 लाख हो गई है। शिलान्यास के बाद दो वर्ष तक कार्य रुका रहा। वर्ष 2023 में निर्माण शुरु हुआ तो सीमा से छह किलोमीटर अंदर जरवा के टढ़वा में कार्य शुरू कर दिया गया। इसका स्थानीय लोगाें ने विरोध किया। इसके बाद कार्य रुक गया और प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराई।
तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने उस समय शासन स्तर से पैरवी करके सीमा पर ही निर्माण तय कराया। तय हुआ कि देश का इंच भी नहीं छोड़ा जाएगा और कोयलाबास के पास ही निर्माण होगा। इसके बाद से निर्माण का इंतजार हो रहा था, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बीते दिनों स्थल का निरीक्षण किया और बताया कि वन विभाग से भी एनओसी मिल गई है। अब इसी महीने निर्माण कार्य शुरु हो जाएगा। पेड़ों को हटाने के लिए वन निगम गोंडा जिम्मेदारी दी गई है। (संवाद)
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पांच खंडों में बनेगा प्रवेश द्वार
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर प्रवेश द्वार पांच खंडों में बनेगा। बीच में एक बड़ा गेट और आगे-पीछे दो-दो छोटे गेट बनाए जाएंगे। गेट को तिरंगा से लाइट से जगमग करने के लिए सौर ऊर्जा का सिस्टम भी लगेगा। - राकेश कुमार मल्ल, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी
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30 नवंबर 2021 को सीमा पर मैत्री द्वार के निर्माण की नींव रखी गई थी। उस समय एक करोड़ 14 लाख रुपये का बजट तय हुआ था। अब इसकी लागत बढ़कर एक करोड़ 23 लाख हो गई है। शिलान्यास के बाद दो वर्ष तक कार्य रुका रहा। वर्ष 2023 में निर्माण शुरु हुआ तो सीमा से छह किलोमीटर अंदर जरवा के टढ़वा में कार्य शुरू कर दिया गया। इसका स्थानीय लोगाें ने विरोध किया। इसके बाद कार्य रुक गया और प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराई।
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तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने उस समय शासन स्तर से पैरवी करके सीमा पर ही निर्माण तय कराया। तय हुआ कि देश का इंच भी नहीं छोड़ा जाएगा और कोयलाबास के पास ही निर्माण होगा। इसके बाद से निर्माण का इंतजार हो रहा था, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बीते दिनों स्थल का निरीक्षण किया और बताया कि वन विभाग से भी एनओसी मिल गई है। अब इसी महीने निर्माण कार्य शुरु हो जाएगा। पेड़ों को हटाने के लिए वन निगम गोंडा जिम्मेदारी दी गई है। (संवाद)
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पांच खंडों में बनेगा प्रवेश द्वार
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर प्रवेश द्वार पांच खंडों में बनेगा। बीच में एक बड़ा गेट और आगे-पीछे दो-दो छोटे गेट बनाए जाएंगे। गेट को तिरंगा से लाइट से जगमग करने के लिए सौर ऊर्जा का सिस्टम भी लगेगा। - राकेश कुमार मल्ल, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी