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Balrampur News: थारू संस्कृति को मिलेगा वैश्विक पाठशाला का मंच

Mon, 08 Dec 2025 10:52 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Dec 2025 10:52 PM IST
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Tharu culture will get a platform at the global school
बलरामपुर में ​स्थित मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ।-संवाद
बलरामपुर। तराई की मिट्टी में रची-बसी थारू संस्कृति की पहचान अब विश्व पटल पर बनाई जाएगी। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में जल्द ही थारू समाज की परंपरा, लोककला, इतिहास और जीवन शैली पर आधारित विशेष पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। आने वाले सत्र से थारू स्टडी सेंटर की स्थापना का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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विश्वविद्यालय की इस पहल से न केवल जनजातीय विरासत का संरक्षण होगा, बल्कि देश-विदेश के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी थारू संस्कृति को समझने के नए द्वार खुलेंगे। खास बात यह है कि सीमापार नेपाल के युवा भी यहां पढ़ सकेंगे, जिससे भारत-नेपाल के रोटी-बेटी का संबंध और मजबूत होगा। कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने बताया कि प्रस्तावित पाठ्यक्रम में थारू समुदाय के इतिहास, लोकगीत-लोकनृत्य, आस्था, वेश-भूषा, वन आधारित आजीविका, पारंपरिक उपचार पद्धतियों और सामाजिक संरचना पर गहन अध्ययन शामिल किया जाएगा। छात्रों को फील्ड स्टडी के लिए थारू बहुल गांवों में भेजा जाएगा, ताकि वे संस्कृति को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें।पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन सांस्कृतिक विशेषज्ञों, थारू समाज के प्रतिनिधियों और सामाजिक शोधकर्ताओं से संवाद कर रहा है। पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वह अध्ययन, शोध और रोजगार तीनों को सार्थक दिशा दे सके।
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जीवंत सभ्यता है थारू संस्कृति
थारू समाज की सांस्कृतिक पहचान अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट है। थारू समुदाय की विरासत केवल जनजातीय संस्कृति नहीं, बल्कि एक जीवंत सभ्यता है। विश्वविद्यालय का दायित्व है कि इसे शोध और अध्ययन के माध्यम से संरक्षित किया जाए। नेपाल के युवाओं को भी यहां अध्ययन करने का अवसर मिलेगा, जिससे दोनों देशों का सांस्कृतिक रिश्ता और प्रगाढ़ होगा।
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- प्रो. रवि शंकर सिंह, कुलपति मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय
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