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स्कंदमाता की पूजा अर्चना के लिए देवी मंदिरों में जुटे श्रद्घालु
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फोटो-5/6-बलरामपुर के बिजलेश्वरी देवी मंदिर पर श्रीयंत्र की पूजा अर्चना करते श्रद्घालु।-संवाद
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। नवरात्र पंचमी के दिन देवी मंडपों में नारी व मातृ शक्ति की अधिष्ठात्री देवी स्कन्द माता की आराधना पूरे विधि विधान के साथ की गई। बुधवार को जिले के सभी मंदिरों में स्कंदमाता की पूजा-अर्चना के लिए पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने स्कंदमाता की पूजा अर्चना कर परिवार की खुशहाली एवं सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। शक्तिपीठ देवी पाटन एवं बिजलेश्वरी देवी मंदिर में सैकड़ों लोगों ने बच्चों का मुंडन, जनेऊ एवं कर्ण छेदन संस्कार भी कराया।
मां दुर्गा की पांचवी शक्ति को स्कंदमाता के रूप में माना गया है। नवरात्र पंचमी के दिन देवी के इसी स्वरूप की पूजा का विधान है। ऐसी मान्यता है कि तारकासुर को वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु भगवान शंकर के पुत्र के हाथों ही होगी। तारकासुर का संघार करने के लिए भगवान शंकर का माता पार्वती के साथ मंगल परिणय हुआ। दोनो के मांगलिक मिलन से कार्तिकेय जी का जन्म हुआ। तभी से कार्तिकेय जी को प्रथम प्रसूत संतान कहा जाता है। बाद मे कार्तिकेय जी ने ही तारकासुर का संघार कर पृथ्वी को उसके पाप के भार से मुक्त कराया। शंकर-पार्वती के मांगलिक मिलन को ही विवाह परंपरा का प्रारंभ माना जाता है।
मान्यता है कि देवी स्कंदमाता की पूजा-अर्चना से भक्तों का मांगलिक जीवन सुखमय होता है। इसी मान्यता के अनुरुप नवरात्र पंचमी के दिन शक्ति पीठ देवी पाटन मंदिर में नारी व मातृ शक्ति की अधिष्ठात्री देवी स्कंदमाता की पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। सुबह से लेकर देर रात तक लोगों ने कतारबद्ध होकर देवी का दर्शन किया। इसके अतिरिक्त बिजलीपुर स्थित मां बिजलेश्वरी देवी मंदिर, तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, उतरौला स्थित ज्वाला देवी मंदिर, पेहर स्थित मां दुर्गा मंदिर, जरवा स्थित रहिया देवी मंदिर तथा बलरामपुर नगर स्थित झारखंडी मंदिर, कालीथान, समय माता मंदिर एवं बडिक़ी बहिनी मंदिर में भी देर रात तक श्रद्धालुओं ने माता रानी का दर्शन कर परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
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मुंडन, जनेऊ एवं कर्णछेदन संस्कार
शक्तिपीठ देवी पाटन, बिजलेश्वरी देवी, रहिया देवी एवं ज्वाला देवी मंदिर में शुक्रवार को मुंडन, जनेऊ एवं कर्ण छेदन संस्कार के लिए भारी भीड़ जुटी। लोगों ने अपने बच्चों का मुंडन, जनेऊ अथवा कर्ण छेदन संस्कार कराने के बाद देवी का दर्शन कराकर बच्चे की लंबी आयु का आशीर्वाद मांगा।
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मां दुर्गा की पांचवी शक्ति को स्कंदमाता के रूप में माना गया है। नवरात्र पंचमी के दिन देवी के इसी स्वरूप की पूजा का विधान है। ऐसी मान्यता है कि तारकासुर को वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु भगवान शंकर के पुत्र के हाथों ही होगी। तारकासुर का संघार करने के लिए भगवान शंकर का माता पार्वती के साथ मंगल परिणय हुआ। दोनो के मांगलिक मिलन से कार्तिकेय जी का जन्म हुआ। तभी से कार्तिकेय जी को प्रथम प्रसूत संतान कहा जाता है। बाद मे कार्तिकेय जी ने ही तारकासुर का संघार कर पृथ्वी को उसके पाप के भार से मुक्त कराया। शंकर-पार्वती के मांगलिक मिलन को ही विवाह परंपरा का प्रारंभ माना जाता है।
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मान्यता है कि देवी स्कंदमाता की पूजा-अर्चना से भक्तों का मांगलिक जीवन सुखमय होता है। इसी मान्यता के अनुरुप नवरात्र पंचमी के दिन शक्ति पीठ देवी पाटन मंदिर में नारी व मातृ शक्ति की अधिष्ठात्री देवी स्कंदमाता की पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। सुबह से लेकर देर रात तक लोगों ने कतारबद्ध होकर देवी का दर्शन किया। इसके अतिरिक्त बिजलीपुर स्थित मां बिजलेश्वरी देवी मंदिर, तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, उतरौला स्थित ज्वाला देवी मंदिर, पेहर स्थित मां दुर्गा मंदिर, जरवा स्थित रहिया देवी मंदिर तथा बलरामपुर नगर स्थित झारखंडी मंदिर, कालीथान, समय माता मंदिर एवं बडिक़ी बहिनी मंदिर में भी देर रात तक श्रद्धालुओं ने माता रानी का दर्शन कर परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
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मुंडन, जनेऊ एवं कर्णछेदन संस्कार
शक्तिपीठ देवी पाटन, बिजलेश्वरी देवी, रहिया देवी एवं ज्वाला देवी मंदिर में शुक्रवार को मुंडन, जनेऊ एवं कर्ण छेदन संस्कार के लिए भारी भीड़ जुटी। लोगों ने अपने बच्चों का मुंडन, जनेऊ अथवा कर्ण छेदन संस्कार कराने के बाद देवी का दर्शन कराकर बच्चे की लंबी आयु का आशीर्वाद मांगा।