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Balrampur News: साइबर आतंकी फाइनेंस नेटवर्क चला रहा था सस्पियर
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सस्पियर।
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बलरामपुर। आर्थिक रूप से कमजोर बैंक खातों को खरीदकर देशभर में फैले साइबर ठगी के पैसों को पाकिस्तान तक पहुंचाने वाले सरगना सस्पियर की परतें एक-एक कर खुलती जा रही हैं। जांच एजेंसियों ने अब इस नेटवर्क को साइबर आतंकी फाइनेंस नेटवर्क के रूप में चिह्नित किया है। जांच सिर्फ फ्रॉड तक सीमित नहीं, बल्कि अब सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों की फंडिंग से जुड़ गया है।
जांच में सामने आया है कि सस्पियर के गिरोह का संचालन सिर्फ एक जिले या राज्य तक सीमित नहीं था। गिरोह के तार बलरामपुर, बहराइच, सिद्धार्थनगर, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और दिल्ली तक फैले थे। हर राज्य में स्थानीय एजेंट जरूरतमंदों से खाते खरीदने, केवाईसी करवाने और ठगी के पैसे को जमा-निकासी करने का काम करते थे। गरीब, अशिक्षित या मजदूर तबके के खाताधारकों को पांच से दस हजार रुपये में खाता बेचने के लिए तैयार किया जाता था। खाते से संबंधित मोबाइल सिम और मोबाइल नंबर से यूपीआई आधारित वॉलेट एक्टिव किए जाते थे।
जांच एजेंसियां और फोरेंसिक साइबर सेल जुटे
जांच एजेंसियां गिरोह की पूरी जानकारी जुटा रही हैं। 12 से ज्यादा मोबाइल नंबरों के साथ ही 40 के करीब संदिग्ध खातों की पड़ताल हो रही है। सस्पियर की गिरफ्तारी के पहले ही 16 खातों की जांच हुई थी। पूरे खुलासे में पहली कड़ी के रूप में मिले ललिया के सत्यदेव के खातों की जांच से बड़े सुराग मिले हैं। इसी तरह अन्य खातों की जांच में भी नई जानकारी मिल रही है। तीन टेलीग्राम ग्रुप और छह फर्जी मोबाइल एप की निगरानी की गई है।
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जांच में सामने आया है कि सस्पियर के गिरोह का संचालन सिर्फ एक जिले या राज्य तक सीमित नहीं था। गिरोह के तार बलरामपुर, बहराइच, सिद्धार्थनगर, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और दिल्ली तक फैले थे। हर राज्य में स्थानीय एजेंट जरूरतमंदों से खाते खरीदने, केवाईसी करवाने और ठगी के पैसे को जमा-निकासी करने का काम करते थे। गरीब, अशिक्षित या मजदूर तबके के खाताधारकों को पांच से दस हजार रुपये में खाता बेचने के लिए तैयार किया जाता था। खाते से संबंधित मोबाइल सिम और मोबाइल नंबर से यूपीआई आधारित वॉलेट एक्टिव किए जाते थे।
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जांच एजेंसियां और फोरेंसिक साइबर सेल जुटे
जांच एजेंसियां गिरोह की पूरी जानकारी जुटा रही हैं। 12 से ज्यादा मोबाइल नंबरों के साथ ही 40 के करीब संदिग्ध खातों की पड़ताल हो रही है। सस्पियर की गिरफ्तारी के पहले ही 16 खातों की जांच हुई थी। पूरे खुलासे में पहली कड़ी के रूप में मिले ललिया के सत्यदेव के खातों की जांच से बड़े सुराग मिले हैं। इसी तरह अन्य खातों की जांच में भी नई जानकारी मिल रही है। तीन टेलीग्राम ग्रुप और छह फर्जी मोबाइल एप की निगरानी की गई है।
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