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Balrampur News: अब सांस लेगी सुआंव नदी, आसपास निर्माण और खेती पर रोक
Sun, 14 Jun 2026 10:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 14 Jun 2026 10:53 PM IST
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फोटो-17-बलरामपुर में स्थित सुआंव नदी।-संवाद
बलरामपुर। राजस्व रिकॉर्ड में वर्षों से नाला दर्ज रही सुआंव नदी को अब उसका वास्तविक स्वरूप वापस दिलाने की कवायद तेज हो गई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर नदी के करीब 120 किलोमीटर लंबे हिस्से को सक्रिय बाढ़ क्षेत्र (फ्लड जोन) घोषित किया गया है। इसके बाद प्रशासन ने शहरी क्षेत्र में नदी के किनारे 45 मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 100 दूरी तक किसी भी तरह के निर्माण या अतिक्रमण पर रोक लगा दी है।
राजस्व, सिंचाई और वन विभाग की संयुक्त टीम नदी के दोनों किनारों का सीमांकन कर रही है और पिलर लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों का लक्ष्य बारिश शुरू होने से पहले यह काम पूरा करना है।
हाल ही में सुआंव नदी को राजस्व अभिलेखों में आधिकारिक रूप से नदी का दर्जा मिला है। इसके बाद यह पहला बड़ा संरक्षण अभियान माना जा रहा है। सर्वे के दौरान नदी किनारे बने मकानों और अन्य निर्माणों को भी चिह्नित किया जा रहा है। साथ ही लगभग 45 गांवों के लोगों की सूची तैयार की जा रही है। भविष्य में नदी के चौड़ीकरण और किनारों पर पौधरोपण के लिए इन क्षेत्रों में खेती पर भी रोक लगाई जा सकती है।
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अधिकारी पुराने नक्शों, राजस्व रिकॉर्ड और नए सर्वे के आधार पर नदी की वास्तविक चौड़ाई और बाढ़ क्षेत्र तय कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से अतिक्रमण, मिट्टी पाटकर निर्माण और खेती के विस्तार के कारण कई जगह नदी का दायरा काफी सिमट गया है। इससे बरसात के समय पानी के बहाव में बाधा आती है और आसपास के इलाकों में जलभराव व कटान की समस्या बढ़ जाती है। इसी वजह से एनजीटी ने नदी के बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित करने के निर्देश दिए थे। -संवाद
सुआंव नदी
सुआंव नदी का उद्गम गोपियापुर क्षेत्र की अड़ारपाकड़ झील से माना जाता है। करीब 120 किलोमीटर लंबी यह नदी बलरामपुर और आसपास के इलाकों से होकर बहती है और उतरौला क्षेत्र के रसूलाबाद के पास राप्ती नदी में मिल जाती है। स्थानीय लोग हमेशा से इसे नदी मानते रहे हैं, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में नाला दर्ज होने के कारण इसके संरक्षण के लिए योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रही थीं। अब नदी का दर्जा मिलने और सीमांकन शुरू होने से इसके संरक्षण की उम्मीद बढ़ गई है।
अधिशासी अभियंता सरयू ड्रेनेज खंड अनिल कुमार ने बताया कि नदी को विकसित करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। अतिक्रमण मुक्त किए जाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। नदी के चौड़ीकरण के साथ ही कटानरोधी कार्य भी होना है।
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राजस्व, सिंचाई और वन विभाग की संयुक्त टीम नदी के दोनों किनारों का सीमांकन कर रही है और पिलर लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों का लक्ष्य बारिश शुरू होने से पहले यह काम पूरा करना है।
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हाल ही में सुआंव नदी को राजस्व अभिलेखों में आधिकारिक रूप से नदी का दर्जा मिला है। इसके बाद यह पहला बड़ा संरक्षण अभियान माना जा रहा है। सर्वे के दौरान नदी किनारे बने मकानों और अन्य निर्माणों को भी चिह्नित किया जा रहा है। साथ ही लगभग 45 गांवों के लोगों की सूची तैयार की जा रही है। भविष्य में नदी के चौड़ीकरण और किनारों पर पौधरोपण के लिए इन क्षेत्रों में खेती पर भी रोक लगाई जा सकती है।
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अधिकारी पुराने नक्शों, राजस्व रिकॉर्ड और नए सर्वे के आधार पर नदी की वास्तविक चौड़ाई और बाढ़ क्षेत्र तय कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से अतिक्रमण, मिट्टी पाटकर निर्माण और खेती के विस्तार के कारण कई जगह नदी का दायरा काफी सिमट गया है। इससे बरसात के समय पानी के बहाव में बाधा आती है और आसपास के इलाकों में जलभराव व कटान की समस्या बढ़ जाती है। इसी वजह से एनजीटी ने नदी के बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित करने के निर्देश दिए थे। -संवाद
सुआंव नदी
सुआंव नदी का उद्गम गोपियापुर क्षेत्र की अड़ारपाकड़ झील से माना जाता है। करीब 120 किलोमीटर लंबी यह नदी बलरामपुर और आसपास के इलाकों से होकर बहती है और उतरौला क्षेत्र के रसूलाबाद के पास राप्ती नदी में मिल जाती है। स्थानीय लोग हमेशा से इसे नदी मानते रहे हैं, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में नाला दर्ज होने के कारण इसके संरक्षण के लिए योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रही थीं। अब नदी का दर्जा मिलने और सीमांकन शुरू होने से इसके संरक्षण की उम्मीद बढ़ गई है।
अधिशासी अभियंता सरयू ड्रेनेज खंड अनिल कुमार ने बताया कि नदी को विकसित करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। अतिक्रमण मुक्त किए जाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। नदी के चौड़ीकरण के साथ ही कटानरोधी कार्य भी होना है।

फोटो-17-बलरामपुर में स्थित सुआंव नदी।-संवाद

फोटो-17-बलरामपुर में स्थित सुआंव नदी।-संवाद