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Balrampur News: कहीं सड़ने लगा धान, कहीं फूटने लगे अंकुर

Sat, 01 Nov 2025 10:23 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Nov 2025 10:23 PM IST
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Somewhere the paddy started rotting, somewhere the sprouts started sprouting.
बलरामपुर के श्रीदत्तगंज में धूप निकलने के बाद फसल सहेजते किसान। संवाद
बलरामपुर। तीन दिनों तक हुई लगातार बारिश ने जिले भर के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में पकी और कटी हुई धान की फसलें पानी में डूब गईं। कई जगहों पर दाने सड़ने और अंकुर फूटने लगे हैं। किसानों की हालत खराब है। शनिवार सुबह धूप निकलने से थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन नुकसान की भरपाई मुश्किल लग रही है।
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उतरौला, श्रीदत्तगंज और जरवा क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में धान की फसलें बारिश से चौपट हो गई हैं। उतरौला क्षेत्र के किसान राधेश्याम, लल्लन वर्मा, महेश प्रसाद और रामशब्द साहू ने बताया कि धान पक चुका था, कटाई शुरू भी कर दी थी, लेकिन बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। जो फसल कटी पड़ी थी, वह खेतों में सड़ रही है। किसान शेषराम मौर्य ने बताया कि हवा और पानी से धान गिर गया है। अब खेत सूखने में हफ्तों लगेंगे, तब तक दाने पूरी तरह खराब हो जाएंगे। श्रीदत्तगंज क्षेत्र में किसानों ने धूप निकलते ही खेतों की ओर रुख किया। वे पानी निकालने और भीगे धान को ऊंचे स्थानों पर रखने में जुट गए।
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किसान अय्यूब खान (71) ने बताया कि आठ बीघे में से सात बीघे धान कट चुका है। धूप न निकलने से फसल खराब हो जाएगी। रामफेर ने कहा कि उनका कटा धान बारिश में भीग गया था, जो अब सड़ने लगा है।
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जरवा क्षेत्र में फसलें अंकुरित, रबी की बोआई भी प्रभावित

विकासखंड गैसड़ी के सीमाई इलाकों में स्थिति और खराब है। भगवानपुर, दत्तापुर और कुरकुटपुरवा गांवों में खेतों में जलभराव इतना है कि कटा धान जमकर अंकुरित हो गया है। किसान अजय सिंह और विजय प्रताप ने बताया कि धान की बालियों में अंकुर निकल आए हैं। अब यह फसल पूरी तरह बेकार हो गई है। दत्तापुर के मोहन और ननकन ने बताया कि सरसों और मसूर की बोआई कर चुके थे, लेकिन पानी भरने से बीज सड़ गए। अब फसल चक्र भी बिगड़ जाएगा। गन्ने की फसल को भी नुकसान हुआ है।
धूप ने दी थोड़ी राहत, पर चिंता बरकरार
शनिवार को सुबह निकली हल्की धूप ने किसानों के चेहरों पर कुछ उम्मीद जगाई है। खेतों में पानी निकालने का काम शुरू हो गया है। अगर अगले कुछ दिन मौसम साफ रहा, तो कुछ फसलें बचाई जा सकती हैं। किसान रामशब्द साहू ने कहा कि अब बस मौसम पर ही भरोसा है। अगर धूप निकलती रही, तो शायद कुछ धान बचा लिया जाए। पुरैना बुलंद, बांक भवानी, मलमलिया, मटियारिया कर्मा, मिलौली बाघाजोत, महुआ धनी, पिपरा राम और भुरकुंडा जैसे गांवों में किसान पूरी तरह टूट चुके हैं। खेतों में मेहनत, उम्मीदें और पूंजी तीनों पानी में बह गई हैं। मौसम साफ होने की आस के साथ किसान फिर एक बार खेतों में जुट गए हैं, लेकिन यह सर्द हवा अब उनके लिए राहत नहीं, बल्कि संघर्ष का नया मौसम लेकर आई है।

कृषि विभाग ने शुरू किया सर्वे

कृषि विभाग ने विभिन्न तहसीलों से नुकसान का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। आपदा विभाग ने भी सभी विकासखंडों से रिपोर्ट तलब की है। जिला कृषि अधिकारी उपेंद्र नाथ खरवार ने बताया कि बारिश से धान की फसल के नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। टीमें खेतों का निरीक्षण कर रही हैं। रिपोर्ट के बाद राहत प्रस्ताव भेजा जाएगा। जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नियमों के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल अभी मौसम साफ रहने की उम्मीद है।
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