{"_id":"5f5662e98ebc3e439c752cb1","slug":"so-was-the-illegal-business-of-firecrackers-in-the-city-for-five-years-balrampur-news-lko538976197","type":"story","status":"publish","title_hn":"तो क्या पांच सालों से नगर में हो रहा था पटाखों का अवैध कारोबार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तो क्या पांच सालों से नगर में हो रहा था पटाखों का अवैध कारोबार
विज्ञापन
बलरामपुर। नगर के मोहल्ला गदुरहवा निवासी अकरम करीब पांच साल से अपने घर पर पटाखों का अवैध कारोबार कर रहा था। यह खुलासा धमाका होने के बाद मोहल्ले के लोगों ने किया है। गत माह बढ़या भैसाही गांव में आईएस के संदिग्ध आतंकी अबू युसुफ के घर से बरामद बारूद के बाद भी पुलिस ने जिले के पटाखा व्यवसायियों की कुंडली क्यों नहीं खंगाली यह बात लोगों के समझ में नहीं आ रही है।
विदित हो कि मो. अकरम ने रेडीमेड पटाखा बेचने का लाइसेंस ले रखा है। यह लाइसेंस उसने बिजलीपुर में किराए पर लिए गए गोदाम को दिखाकर वर्ष 2015 में लिया है। सूत्रों की मानें तो अकरम घर पर पटाखों का अवैध निर्माण करवाता था। धमाके के बाद दूर-दूर तक बिखरे आतिशबाजी के कागजों को देखकर यह बात पूरी तरह से प्रमाणित हो रही है।
अकरम की नगर में पड़ोस के पास जूते-चप्पल की भी दुकान है। धमाके के बाद मामले को छिपाने के लिए उसने रसोई गैस सिलेंडर में विस्फोट होने की कहानी भी बनाई लेकिन मौके पर पहुंचे एसपी ने बारूद की गंध होने की बात कहकर उसकी कहानी को झूठा करार दे दिया। अब सवाल यह उठता है कि आतंकी कनेक्शन व बारूद आदि की बरामदगी के बाद पुलिस ने जिले के पटाखा व्यवसायियों की कुंडली क्यों नहीं खंगाली।
विज्ञापन
अबू युसुफ की निशानदेही पर दिल्ली की स्पेशल पुलिस टीम तथा एटीएस ने उतरौला में दो तीन पटाखा व्यवसायियों से पूछताछ की थी लेकिन जिले की पुलिस अभी तक इन व्यवसायियों के प्रति क्यों संवेदनहीन बनी रही? जबकि अबू यूसुफ ने यह भी कहा था कि उसने पटाखों की दुकान से लहसुन बम खरीदकर बारूद इकट्ठा किया था।
25 लोगों को मिला है लाइसेंस
अग्निशमन विभाग के प्रभारी राजमंगल सिंह का कहना है कि जिले में कुल 25 लोगों को रेडीमेड पटाखे बेचने का लाइसेंस दिया गया है। इनमें से दो लाइसेंस अभी निलंबित है। अकरम ने बिजलीपुर के पते पर लाइसेंस लिया है। जिले में पटाखा बनाने का लाइसेंस किसी को नहीं दिया गया है। कुछ लाइसेंसधारी साल में 25 किलोग्राम, कुछ 50 किग्रा तथा कुछ 12.5 किलोग्रमा रेडीमेड पटाखा बेच सकते हैं। सभी की मात्रा निर्धारित है।
मच सकती थी भारी तबाही
जिस मोहल्ले में धमाका हुआ है उस मोहल्ले की आबादी करीब 15 हजार है। धमाके के समय कई लोग घरों में ही थे। अगर विस्फोट थोड़ा और ज्यादा होता तो अन्य कई लोग भी इसकी चपेट में आते। घटना स्थल पर जिस तरह का मंजर दिख रहा है उसे देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि विस्फोटक काफी खतरनाक था। विस्फोट किससे हुआ इस बात का पता फोरेंसिक टीम की जांच के बाद ही चल पाएगा।
विज्ञापन
विदित हो कि मो. अकरम ने रेडीमेड पटाखा बेचने का लाइसेंस ले रखा है। यह लाइसेंस उसने बिजलीपुर में किराए पर लिए गए गोदाम को दिखाकर वर्ष 2015 में लिया है। सूत्रों की मानें तो अकरम घर पर पटाखों का अवैध निर्माण करवाता था। धमाके के बाद दूर-दूर तक बिखरे आतिशबाजी के कागजों को देखकर यह बात पूरी तरह से प्रमाणित हो रही है।
विज्ञापन
अकरम की नगर में पड़ोस के पास जूते-चप्पल की भी दुकान है। धमाके के बाद मामले को छिपाने के लिए उसने रसोई गैस सिलेंडर में विस्फोट होने की कहानी भी बनाई लेकिन मौके पर पहुंचे एसपी ने बारूद की गंध होने की बात कहकर उसकी कहानी को झूठा करार दे दिया। अब सवाल यह उठता है कि आतंकी कनेक्शन व बारूद आदि की बरामदगी के बाद पुलिस ने जिले के पटाखा व्यवसायियों की कुंडली क्यों नहीं खंगाली।
विज्ञापन
अबू युसुफ की निशानदेही पर दिल्ली की स्पेशल पुलिस टीम तथा एटीएस ने उतरौला में दो तीन पटाखा व्यवसायियों से पूछताछ की थी लेकिन जिले की पुलिस अभी तक इन व्यवसायियों के प्रति क्यों संवेदनहीन बनी रही? जबकि अबू यूसुफ ने यह भी कहा था कि उसने पटाखों की दुकान से लहसुन बम खरीदकर बारूद इकट्ठा किया था।
25 लोगों को मिला है लाइसेंस
अग्निशमन विभाग के प्रभारी राजमंगल सिंह का कहना है कि जिले में कुल 25 लोगों को रेडीमेड पटाखे बेचने का लाइसेंस दिया गया है। इनमें से दो लाइसेंस अभी निलंबित है। अकरम ने बिजलीपुर के पते पर लाइसेंस लिया है। जिले में पटाखा बनाने का लाइसेंस किसी को नहीं दिया गया है। कुछ लाइसेंसधारी साल में 25 किलोग्राम, कुछ 50 किग्रा तथा कुछ 12.5 किलोग्रमा रेडीमेड पटाखा बेच सकते हैं। सभी की मात्रा निर्धारित है।
मच सकती थी भारी तबाही
जिस मोहल्ले में धमाका हुआ है उस मोहल्ले की आबादी करीब 15 हजार है। धमाके के समय कई लोग घरों में ही थे। अगर विस्फोट थोड़ा और ज्यादा होता तो अन्य कई लोग भी इसकी चपेट में आते। घटना स्थल पर जिस तरह का मंजर दिख रहा है उसे देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि विस्फोटक काफी खतरनाक था। विस्फोट किससे हुआ इस बात का पता फोरेंसिक टीम की जांच के बाद ही चल पाएगा।