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Balrampur News: इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक की नियुक्ति में फर्जीवाड़े की जांच शुरू
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बलरामपुर के तुलसीपुर मार्ग स्थित डीएवी इंटर कॉलेज। संवाद
बलरामपुर। शहर के डीएवी इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक पद पर हुई पुरानी नियुक्ति को लेकर अब शासन स्तर पर जांच शुरू हो गई है। विद्यालय के प्रबंधक संजय तिवारी की लिखित शिकायत के बाद प्रमुख सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशक, देवीपाटन मंडल अयोध्या कौस्तुभ सिंह ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि सभी पक्षों को 10 फरवरी को अपने-अपने साक्ष्य के साथ कार्यालय बुलाया गया है।
प्रकरण वर्ष 1991 में हुई सहायक अध्यापक (हिंदी) पद पर अशोक कुमार तिवारी की नियुक्ति से जुड़ा है। उपलब्ध अभिलेख में 11 जुलाई 1991 को उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया है, जबकि शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति की पूरी चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और उससे जुड़े कई दस्तावेज में विरोधाभास है। प्रबंधक का कहना है कि नियुक्ति के समय समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशन का स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है, चयन समिति की कार्यवाही रजिस्टर और अनुमोदन आदेश की प्रतियों में भी तिथियों व विवरण का मेल नहीं बैठता। इसके अलावा वेतन भुगतान अभिलेख, सेवा पुस्तिका और उपस्थिति रजिस्टर में भी अलग-अलग तिथियां दर्ज होने का आरोप लगाया गया है, जिससे नियुक्ति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले की सुनवाई 10 फरवरी को तय कर विद्यालय प्रबंधन, संबंधित शिक्षक तथा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से सभी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। जांच अधिकारी की ओर से जारी नोटिस में नियुक्ति पत्र, चयन समिति की कार्यवाही, अनुमोदन आदेश, सेवा पुस्तिका, उपस्थिति रजिस्टर और वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही संबंधित पक्षों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को भी कहा गया है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल मंडलीय जांच शुरू होने के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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प्रकरण वर्ष 1991 में हुई सहायक अध्यापक (हिंदी) पद पर अशोक कुमार तिवारी की नियुक्ति से जुड़ा है। उपलब्ध अभिलेख में 11 जुलाई 1991 को उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया है, जबकि शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति की पूरी चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और उससे जुड़े कई दस्तावेज में विरोधाभास है। प्रबंधक का कहना है कि नियुक्ति के समय समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशन का स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है, चयन समिति की कार्यवाही रजिस्टर और अनुमोदन आदेश की प्रतियों में भी तिथियों व विवरण का मेल नहीं बैठता। इसके अलावा वेतन भुगतान अभिलेख, सेवा पुस्तिका और उपस्थिति रजिस्टर में भी अलग-अलग तिथियां दर्ज होने का आरोप लगाया गया है, जिससे नियुक्ति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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मामले की सुनवाई 10 फरवरी को तय कर विद्यालय प्रबंधन, संबंधित शिक्षक तथा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से सभी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। जांच अधिकारी की ओर से जारी नोटिस में नियुक्ति पत्र, चयन समिति की कार्यवाही, अनुमोदन आदेश, सेवा पुस्तिका, उपस्थिति रजिस्टर और वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही संबंधित पक्षों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को भी कहा गया है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल मंडलीय जांच शुरू होने के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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