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14 वर्ष से नहीं हुई आयुर्वेदिक दवाओं की सैंपलिंग
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बलरामपुर। जिले का आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। विभाग द्वारा यहां गत 14 वर्षों से आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवाखाने से कोई भी सैंपल लेकर जांच के लिए नहीं भेजा गया। ऐसे में नेपाल सीमा व दूरदराज के गांवों में चल रहे आयुर्वेदिक स्टोरों पर धड़ल्ले से प्रतिबंधित व आयुर्वेद के नाम पर नकली दवाएं बिक रहीं हैं। जो कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है, मगर विभागीय अधिकारी उदासीन बने हुए हैं।
एलोपैथी की दर्ज पर आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवाओं के मेडिकल स्टोर पर भी दवाएं बिकती हैं। मरीजों की सुरक्षा के लिए विभाग को समय-समय पर इन स्टोरों से दवाओं के सैंपल लेकर जांच करानी चाहिए। गत 14 वर्षों से जिले में छह बार क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी बदले मगर किसी ने भी दवाओं की सैंपलिंग कराने में जरा भी रुचि नहीं दिखाई।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. दिग्विजय नाथ ने बताया कि कोविड शुरू होने से पहले एक दुकान से दवा का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था, लेकिन वह संबंधित स्टोर व सैंपल में भेजी गई दवा का नाम नहीं बता सके। उन्हें इस सैंपल के परिणाम की भी कोई जानकारी नहीं है।
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एलोपैथी की दर्ज पर आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवाओं के मेडिकल स्टोर पर भी दवाएं बिकती हैं। मरीजों की सुरक्षा के लिए विभाग को समय-समय पर इन स्टोरों से दवाओं के सैंपल लेकर जांच करानी चाहिए। गत 14 वर्षों से जिले में छह बार क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी बदले मगर किसी ने भी दवाओं की सैंपलिंग कराने में जरा भी रुचि नहीं दिखाई।
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क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. दिग्विजय नाथ ने बताया कि कोविड शुरू होने से पहले एक दुकान से दवा का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था, लेकिन वह संबंधित स्टोर व सैंपल में भेजी गई दवा का नाम नहीं बता सके। उन्हें इस सैंपल के परिणाम की भी कोई जानकारी नहीं है।
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