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Balrampur News: राप्ती का बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा चिंता, 170 गांवों में बाढ़ का खतरा
Thu, 06 Aug 2026 10:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 06 Aug 2026 10:51 PM IST
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फोटो-22-बलरामपुर के मैटहवा गांव के पास बना तटबंध।-संवाद
बलरामपुर। जिले में पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के चलते राप्ती नदी और पहाड़ी नालों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। फिलहाल कहीं बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन नदी का बढ़ता जलस्तर और मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने प्रशासन के साथ तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। महराजगंज तराई, ललिया, हरैया सतघरवा और उतरौला तहसील के करीब 170 गांव संभावित बाढ़ की जद में हैं।
सबसे अधिक चिंता महराजगंज तराई के रामगढ़ मैटहवा गांव को लेकर है। यहां तटबंध का करीब 15 से 20 मीटर हिस्सा पहली ही बाढ़ में कट चुका है। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रही और राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ा तो इसी कटाव वाले हिस्से से पानी गांव में घुस सकता है। इससे ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ गई है और वे सुबह-शाम नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं।
ग्राम प्रधान तुलाराम ने बताया कि कटे तटबंध की सूचना कई बार अधिकारियों को दी जा चुकी है। अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया, लेकिन बरसात के कारण स्थायी मरम्मत नहीं हो सकी। ग्रामीण अवधेश के अनुसार, खरझार पहाड़ी नाले और राप्ती का पानी सबसे पहले रामगढ़ मैटहवा को प्रभावित करता है। बाढ़ आने पर घरों में पानी भर जाता है और भोजन, पेयजल तथा पशुओं को सुरक्षित रखने की समस्या खड़ी हो जाती है।
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ग्रामीण ओमप्रकाश ने बताया कि बाढ़ के दौरान कंपोजिट विद्यालय परिसर तक पानी पहुंच जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई कई दिनों तक प्रभावित रहती है। वहीं नियाज ने कहा कि पंचायत भवन और मुख्य सड़क तक जाने वाले मार्गों पर एक-दो फीट पानी भरते ही गांव का संपर्क टूटने लगता है।
ललिया क्षेत्र के गंगाबख्श भागड़, चौका कला, लालपुर फगुईया, गोसाईं पुरवा, साहिबा नगर और चेतरा पुरवा भी संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों में शामिल हैं। हरैया सतघरवा ब्लॉक में उदईपुर खैरहनिया के पास पहाड़ी नाले में उफान आने पर भुजेहरा, खैरहनिया, गंजड़ी, नरायनापुर, नबीनगर और धनौढ़ा गांव प्रभावित हो सकते हैं। उतरौला तहसील के आधा दर्जन गांव भी प्रशासन की निगरानी सूची में हैं।
प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने, बिजली के उपकरण बंद रखने, जलभराव और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा है। किसी भी आपात स्थिति में कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम 9170277336, टोल फ्री 05263-1077, एम्बुलेंस 108 और राज्य आपदा हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करने की अपील की गई है।
बारिश थमी तो राहत, बढ़ी तो मुश्किल
फिलहाल जिले में बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन अगले कुछ दिनों की बारिश हालात तय करेगी। यदि वर्षा थम गई तो स्थिति सामान्य बनी रह सकती है। वहीं लगातार बारिश और नेपाल से पानी छोड़े जाने की स्थिति में राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा और गहरा जाएगा। फिलहाल नदी किनारे बसे गांवों की निगाहें आसमान और राप्ती नदी, दोनों पर टिकी हैं।
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सबसे अधिक चिंता महराजगंज तराई के रामगढ़ मैटहवा गांव को लेकर है। यहां तटबंध का करीब 15 से 20 मीटर हिस्सा पहली ही बाढ़ में कट चुका है। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रही और राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ा तो इसी कटाव वाले हिस्से से पानी गांव में घुस सकता है। इससे ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ गई है और वे सुबह-शाम नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं।
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ग्राम प्रधान तुलाराम ने बताया कि कटे तटबंध की सूचना कई बार अधिकारियों को दी जा चुकी है। अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया, लेकिन बरसात के कारण स्थायी मरम्मत नहीं हो सकी। ग्रामीण अवधेश के अनुसार, खरझार पहाड़ी नाले और राप्ती का पानी सबसे पहले रामगढ़ मैटहवा को प्रभावित करता है। बाढ़ आने पर घरों में पानी भर जाता है और भोजन, पेयजल तथा पशुओं को सुरक्षित रखने की समस्या खड़ी हो जाती है।
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ग्रामीण ओमप्रकाश ने बताया कि बाढ़ के दौरान कंपोजिट विद्यालय परिसर तक पानी पहुंच जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई कई दिनों तक प्रभावित रहती है। वहीं नियाज ने कहा कि पंचायत भवन और मुख्य सड़क तक जाने वाले मार्गों पर एक-दो फीट पानी भरते ही गांव का संपर्क टूटने लगता है।
ललिया क्षेत्र के गंगाबख्श भागड़, चौका कला, लालपुर फगुईया, गोसाईं पुरवा, साहिबा नगर और चेतरा पुरवा भी संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों में शामिल हैं। हरैया सतघरवा ब्लॉक में उदईपुर खैरहनिया के पास पहाड़ी नाले में उफान आने पर भुजेहरा, खैरहनिया, गंजड़ी, नरायनापुर, नबीनगर और धनौढ़ा गांव प्रभावित हो सकते हैं। उतरौला तहसील के आधा दर्जन गांव भी प्रशासन की निगरानी सूची में हैं।
प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने, बिजली के उपकरण बंद रखने, जलभराव और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा है। किसी भी आपात स्थिति में कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम 9170277336, टोल फ्री 05263-1077, एम्बुलेंस 108 और राज्य आपदा हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करने की अपील की गई है।
बारिश थमी तो राहत, बढ़ी तो मुश्किल
फिलहाल जिले में बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन अगले कुछ दिनों की बारिश हालात तय करेगी। यदि वर्षा थम गई तो स्थिति सामान्य बनी रह सकती है। वहीं लगातार बारिश और नेपाल से पानी छोड़े जाने की स्थिति में राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा और गहरा जाएगा। फिलहाल नदी किनारे बसे गांवों की निगाहें आसमान और राप्ती नदी, दोनों पर टिकी हैं।

फोटो-22-बलरामपुर के मैटहवा गांव के पास बना तटबंध।-संवाद

फोटो-22-बलरामपुर के मैटहवा गांव के पास बना तटबंध।-संवाद