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धीमी गति से घट रहा राप्ती का पानी, बढ़ी परेशानी
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बलरामपुर के रजवापुर जाने वाले मार्ग पर बाढ़ के पानी से होकर जाते लोग।
- फोटो : BALRAMPUR
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बलरामपुर। राप्ती नदी का जलस्तर धीमी गति से घटना शुरू हो गया है। गुरुवार को राप्ती नदी खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। राप्ती नदी के बाढ़ से जिले के करीब 150 गांवों के लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
लोगों के घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। सड़कों पर भी बाढ़ का पानी बह रहा है। दतरंगवा डिप पर बाढ़ का पानी होने से लोगों को नाव के सहारे पार करना पड़ रहा है। पहाड़ी नालों में भी बाढ़ आने से तुलसीपुर तहसील के कई गांवों में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
थाना महराजगंज तराई के 12 से अधिक गांवों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को आवागमन के साथ-साथ छतों पर खाना बनाने की मजबूरी बन गई है। तुलसीपुर ब्लॉक के बरगदही के प्रधान प्रतिनिधि मंगल देव सिंह, श्याम बहादुर सिंह, अरुण प्रताप सिंह, मनोज सिंह, दिनेश सिंह व चंद्रभान पाठक आदि ने बताया कि बाढ़ का पानी गांव के चारों तरफ अभी भी भरा हुआ है।
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खरझार पहाड़ी नाले के बाढ़ का पानी पहाड़ों पर हुई बारिश के चलते आया है। हरैया थाना परिसर में अभी भी बाढ़ का पानी बह रहा है। हरैया बाजार के कई घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। ललिया थाना क्षेत्र के कोड़री-ललिया मार्ग पर राप्ती नदी के बाढ़ का पानी अभी भी भरा हुआ है।
झिन्ने नाला व लौकहवा के पास जहदी पर लोग बाढ़ के भरे पानी से आवागमन करने को विवश है। राप्ती नदी का जलस्तर धीमी गति से घटने के कारण बाढ़ लोगों को परेशान कर रही है। लालपुर फगुईया, गोसाईपुरवा, कोड़री, झौहन्ना, बढ़ईपुरवा, काशीपुर, लौकहवा, इटहिया, पिठ्ठा, नरयनापुर, साखीरेत, रजगढ़वा, पतझी व उपाध्यायपुरवा आदि गांव में बाढ़ का पानी भरा हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी से भारी परेशानी हो रही है। संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। सैकड़ों एकड़ में लगी फसलें तबाह हो गई है। कौवापुर रेलवे स्टेशन के पास बाढ़ का पानी बह रहा है जिससे लोग आवागमन कर रहे है।
हरैया सतघरवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत नेवलगंज का मजरा गौरीपुरवा जमधरा पहाड़ी नाले के आगोश में आ गया है जिससे लोगों में भय का माहौल है। ग्रामीण रमेश, रामराज, बालकराम, प्रधान अमिरिका, सुरेंद्र कुमार पांडेय व प्रधान राम निवास गौतम आदि ने बताया कि जमधरा पहाड़ी नाला गौरीपुरवा को एक बार पूरी तरह से काट चुका है।
वहां से उजड़ कर लोग अलग बसे थे लेकिन फिर से पहाड़ी नाला कटान करके गांव के करीब पहुंच गया है। यदि प्रशासन की तरफ से ठोस इंतजाम नहीं किया गया तो लोगों को भारी दुश्वारियां झेलनी पड़ेगी। सीएमओ डॉ. सुनील कुमार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों से अपील किया है कि संक्रामक बीमारियों से बचने के लिए पानी उबाल कर पीएं।
फ्रंट लाइन वर्कर गांव में रहकर बाढ़ पीड़ितों के स्वास्थ्य पर नजर रखें। सीएमओ ने स्वास्थ्य व प्रशासनिक टीम के साथ बाढ़ राहत चौकियों का निरीक्षण कर जायजा लिया। प्रशासन की तरफ से नाव व एंबुलेंस की ड्यूटी लगाई गई है।
उतरौला तहसील में स्थापित बाढ़ राहत चौकी महुआधनी पर सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद पाई गई। इस दौरान सीएमएस डॉ. सुशील कुमार, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंघल, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अरुण कुमार व एमओआईसी डॉ. चंद आदि मौजूद रहे।
लोगों को छोट़ी व बांसी मछलियों का सेवन न करने की सलाह दी गई है। एडीएम वित्त एवं राजस्व अरुण कुुमार शुक्ल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में नजर रखी जा रही है। राप्ती का पानी धीरे-धीरे घट रहा है। राप्ती नदी का जलस्तर गुरुवार को खतरे के निशान 104.62 मीटर की तुलना में 104.85 मीटर तक पहुंच गया है जो खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर ऊपर है।
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लोगों के घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। सड़कों पर भी बाढ़ का पानी बह रहा है। दतरंगवा डिप पर बाढ़ का पानी होने से लोगों को नाव के सहारे पार करना पड़ रहा है। पहाड़ी नालों में भी बाढ़ आने से तुलसीपुर तहसील के कई गांवों में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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थाना महराजगंज तराई के 12 से अधिक गांवों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को आवागमन के साथ-साथ छतों पर खाना बनाने की मजबूरी बन गई है। तुलसीपुर ब्लॉक के बरगदही के प्रधान प्रतिनिधि मंगल देव सिंह, श्याम बहादुर सिंह, अरुण प्रताप सिंह, मनोज सिंह, दिनेश सिंह व चंद्रभान पाठक आदि ने बताया कि बाढ़ का पानी गांव के चारों तरफ अभी भी भरा हुआ है।
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खरझार पहाड़ी नाले के बाढ़ का पानी पहाड़ों पर हुई बारिश के चलते आया है। हरैया थाना परिसर में अभी भी बाढ़ का पानी बह रहा है। हरैया बाजार के कई घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। ललिया थाना क्षेत्र के कोड़री-ललिया मार्ग पर राप्ती नदी के बाढ़ का पानी अभी भी भरा हुआ है।
झिन्ने नाला व लौकहवा के पास जहदी पर लोग बाढ़ के भरे पानी से आवागमन करने को विवश है। राप्ती नदी का जलस्तर धीमी गति से घटने के कारण बाढ़ लोगों को परेशान कर रही है। लालपुर फगुईया, गोसाईपुरवा, कोड़री, झौहन्ना, बढ़ईपुरवा, काशीपुर, लौकहवा, इटहिया, पिठ्ठा, नरयनापुर, साखीरेत, रजगढ़वा, पतझी व उपाध्यायपुरवा आदि गांव में बाढ़ का पानी भरा हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी से भारी परेशानी हो रही है। संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। सैकड़ों एकड़ में लगी फसलें तबाह हो गई है। कौवापुर रेलवे स्टेशन के पास बाढ़ का पानी बह रहा है जिससे लोग आवागमन कर रहे है।
हरैया सतघरवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत नेवलगंज का मजरा गौरीपुरवा जमधरा पहाड़ी नाले के आगोश में आ गया है जिससे लोगों में भय का माहौल है। ग्रामीण रमेश, रामराज, बालकराम, प्रधान अमिरिका, सुरेंद्र कुमार पांडेय व प्रधान राम निवास गौतम आदि ने बताया कि जमधरा पहाड़ी नाला गौरीपुरवा को एक बार पूरी तरह से काट चुका है।
वहां से उजड़ कर लोग अलग बसे थे लेकिन फिर से पहाड़ी नाला कटान करके गांव के करीब पहुंच गया है। यदि प्रशासन की तरफ से ठोस इंतजाम नहीं किया गया तो लोगों को भारी दुश्वारियां झेलनी पड़ेगी। सीएमओ डॉ. सुनील कुमार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों से अपील किया है कि संक्रामक बीमारियों से बचने के लिए पानी उबाल कर पीएं।
फ्रंट लाइन वर्कर गांव में रहकर बाढ़ पीड़ितों के स्वास्थ्य पर नजर रखें। सीएमओ ने स्वास्थ्य व प्रशासनिक टीम के साथ बाढ़ राहत चौकियों का निरीक्षण कर जायजा लिया। प्रशासन की तरफ से नाव व एंबुलेंस की ड्यूटी लगाई गई है।
उतरौला तहसील में स्थापित बाढ़ राहत चौकी महुआधनी पर सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद पाई गई। इस दौरान सीएमएस डॉ. सुशील कुमार, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंघल, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अरुण कुमार व एमओआईसी डॉ. चंद आदि मौजूद रहे।
लोगों को छोट़ी व बांसी मछलियों का सेवन न करने की सलाह दी गई है। एडीएम वित्त एवं राजस्व अरुण कुुमार शुक्ल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में नजर रखी जा रही है। राप्ती का पानी धीरे-धीरे घट रहा है। राप्ती नदी का जलस्तर गुरुवार को खतरे के निशान 104.62 मीटर की तुलना में 104.85 मीटर तक पहुंच गया है जो खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर ऊपर है।