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Balrampur News: धान के लिए बारिश बनी आफत, पछेती खेती को फायदा

Sat, 04 Oct 2025 10:44 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 04 Oct 2025 10:44 PM IST
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Rains spell disaster for paddy, benefits late-season cultivation
बलरामपुर के रेहरा बाजार में बारिश के चलते गिरी धान की फसल ।-संवाद
बलरामपुर। शुक्रवार व शनिवार को जिले में हुई झमाझम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश से धान को फसल हो भारी नुकसान पहुंचने का अंदेशा है। जिले में करीब 18 फीसदी धान की फसल बारिश से प्रभावित हुई है। हालांकि पछेती फसल के लिए बारिश फायदेमंद है।
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मौसम विभाग के अनुसार बीते दो दिनों में जिले में औसतन 25 से 35 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सबसे अधिक बारिश बनकटवा में 9 मिमी, हरैया सतघरवा में 7 मिमी और रेहरा बाजार 5.5 मिमी दर्ज की गई। जिले में एक लाख किसानों ने 1,12,249 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की है। बारिश से तीनों तहसील सदर, उतरौला और तुलसीपुर की फसलें प्रभावित हुई हैं।
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ललिया के किसान मनीष मिश्रा ने कहा कि हमारे खेत में धान कटाई के लिए तैयार था, लेकिन बारिश से फसल गिर गई। अब कटाई मुश्किल हो गई है। पानी भरा रहा या और बारिश हुई तो भारी नुकसान होगा। महराजगंज तराई के किसान राजेश कुमार ने कहा कि बारिश से धान की बालियां काली पड़ गई हैं, मंडी में दाम कम मिलेंगे। सब्जी के किसानों को भी नुकसान हुआ है। वहीं पछती करने वाले किसान अब्दुल अजीज ने कहा कि सुगंधित धान की फसल में बाली अभी पकी नहीं थी। इस बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ी है, उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है। आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि इस बारिश से किसानों को ज्यादा नुकसान नहीं होगा।
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2022 में हुई थी सर्वाधिक बारिश
अक्तूबर 2022 में रिकाॅर्ड बारिश हुई थी। उस समय धान व गन्ने की करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी। 75 हजार किसानों को नुकसान हुआ था। आपदा विभाग के मुताबिक उस वर्ष एक हजार मिली मीटर बारिश हुई थी। जितनी बारिश पूरे वर्षाकाल में हुई थी उतनी बारिश पांच अक्तूबर से 10 अक्तूबर के बीच हुई थी। 450 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे, जिसमें 354 गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए थे, चार लाख आबादी प्रभावित हुई थी। 2022 की तरह 2017 और 2014 में बारिश हुई थी। 2023 व 2024 सामान्य बारिश हुई।
बारिश और बाढ़ से नुकसान में तय है राहत राशि
आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि बारिश और बाढ़ से फसल के नुकसान की राशि तय है। किसी भी किसान को एक हजार से कम सहायता राशि नहीं दी जाती है। इसके अलावा एक हेक्टेयर यानी 12.5 बीघे धान की फसल के नुकसान पर 8500 रुपये अनुदान दिया जाता है। इसके लिए कृषि और राजस्व विभाग की रिपोर्ट पर अनुदान दिया जाता है।
पकी बालियों को होगा नुकसान

जिन खेतों में बालियां पक चुकी हैं, उनमें नुकसान हुआ है। फसल गिरने से दाने जमने और सड़न की आशंका रहती है। यदि गिरी हुई फसल को 1-2 दिन के भीतर काटा नहीं गया, तो उपज घटेगी और चावल नहीं बनेगा। वहीं, जिन फसलों की बाली अभी पकी नहीं है, उनमें बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ी है। ऐसे किसानों के लिए बारिश फायदेमंद है।

- डॉ. सियाराम कनौजिया, कृषि वैज्ञानिक
क्षति का कराया जाएगा आंकलन
जिले की बलरामपुर, तुलसीपुर और उतरौला क्षेत्रों में विभागीय टीमें फसल क्षति का सर्वे कर रही हैं। रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को राहत या मुआवजा दिया जाएगा। गिरी हुई फसल को तुरंत न काटें। पहले खेत का पानी निकल जाने दें, ताकि दानों में सड़न न बढ़े और उपज कम न हो। फसल का बीमा है तो नुकसान का दावा कर सकते हैं।
- उपेंद्र नाथ खरवार, जिला कृषि अधिकारी
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