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तेजी से बदल रहे तुलसीपुर सीट के सियासी समीकरण
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बलरामपुर। तुलसीपुर विधान सभा सीट के सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। पार्टी से बगावत कर निर्दल प्रत्याशी को समर्थन देने पर सपा को अपने जिला उपाध्यक्ष को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा है। वहीं टिकट कटने से नाराज बसपा नेता भी निर्दल प्रत्याशी के समर्थन में मैदान में आ गए हैं। भतीजे को बसपा से टिकट मिलने पर वरिष्ठ कांग्रेसी अब भतीजे का समर्थन कर रहे हैं।
सपा से टिकट न मिलने पर जेल में रहते हुए पूर्व सांसद रिजवान जहीर की बेटी जेबा रिजवान बागी उम्मीदवार के तौर पर निर्दल चुनाव मैदान में उतरी है। उनके समर्थक जेबा तथा पूर्व सांसद के पूरे परिवार को पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष की हत्या में निर्दोष बताकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश में जुटे हैं। बीते दिनों सपा के जिला उपाध्यक्ष व पूर्व ब्लाक प्रमुख विजय यादव ने भी पार्टी से बगावत का सुर बुलंद कर दिया। विजय यादव जेबा रिजवान के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण विजय यादव को बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा है। सपा के साथ ही इस सीट पर बसपा नेता भी बागी तेवर दिखा रहे हैं। बसपा से इस सीट पर पहले राजेंद्र प्रसाद वर्मा को टिकट दिया गया था। बाद में बसपा ने इनका टिकट काटकर कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष भुवन प्रताप सिंह को प्रत्याशी बना दिया। टिकट कटने से आहत राजेंद्र प्रसाद ने भी अब बागी तेवर दिखाना शुरू कर दिए हैं। राजेंद्र प्रसाद भी खुलकर जेबा के चुनाव प्रचार में जुट कर प्रचार का मंच साझा कर रहे हैं।
कांग्रेस छोड़कर बसपा से प्रत्याशी बनने के बाद भुवन प्रताप सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी दीपांकर सिंह के सामने भी मुसीबत खड़ी कर दी है। यह सिलसिला अभी यही थमता नहीं दिख रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी के कई और लोगों के भी पाला बदलने की उम्मीद जतायी जा रही है। क्षेत्रीय नेताओं के इस बगावती तेवर से चुनाव लड़ रहे सपा, बसपा तथा कांग्रेस प्रत्याशियों को डैमेज कंट्रोल करने में भी पसीना छूटने लगा है। मतदान तिथि करीब आने के साथ ही तेजी से बदल रहे सियासी समीकरणों के चलते तुलसीपुर सीट का चुनाव खासा दिलचस्प होता नजर आने लगा है।
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सपा से टिकट न मिलने पर जेल में रहते हुए पूर्व सांसद रिजवान जहीर की बेटी जेबा रिजवान बागी उम्मीदवार के तौर पर निर्दल चुनाव मैदान में उतरी है। उनके समर्थक जेबा तथा पूर्व सांसद के पूरे परिवार को पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष की हत्या में निर्दोष बताकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश में जुटे हैं। बीते दिनों सपा के जिला उपाध्यक्ष व पूर्व ब्लाक प्रमुख विजय यादव ने भी पार्टी से बगावत का सुर बुलंद कर दिया। विजय यादव जेबा रिजवान के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण विजय यादव को बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा है। सपा के साथ ही इस सीट पर बसपा नेता भी बागी तेवर दिखा रहे हैं। बसपा से इस सीट पर पहले राजेंद्र प्रसाद वर्मा को टिकट दिया गया था। बाद में बसपा ने इनका टिकट काटकर कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष भुवन प्रताप सिंह को प्रत्याशी बना दिया। टिकट कटने से आहत राजेंद्र प्रसाद ने भी अब बागी तेवर दिखाना शुरू कर दिए हैं। राजेंद्र प्रसाद भी खुलकर जेबा के चुनाव प्रचार में जुट कर प्रचार का मंच साझा कर रहे हैं।
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कांग्रेस छोड़कर बसपा से प्रत्याशी बनने के बाद भुवन प्रताप सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी दीपांकर सिंह के सामने भी मुसीबत खड़ी कर दी है। यह सिलसिला अभी यही थमता नहीं दिख रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी के कई और लोगों के भी पाला बदलने की उम्मीद जतायी जा रही है। क्षेत्रीय नेताओं के इस बगावती तेवर से चुनाव लड़ रहे सपा, बसपा तथा कांग्रेस प्रत्याशियों को डैमेज कंट्रोल करने में भी पसीना छूटने लगा है। मतदान तिथि करीब आने के साथ ही तेजी से बदल रहे सियासी समीकरणों के चलते तुलसीपुर सीट का चुनाव खासा दिलचस्प होता नजर आने लगा है।
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