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बलरामपुर का आतंकी कनेक्शन जुड़ने से सदमे में पुलिस महकमा

Mon, 24 Aug 2020 10:00 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2020 10:00 PM IST
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Police in shock due to terrorist connection of Balrampur
बलरामपुर/उतरौला। आईएस के आतंकी का कनेक्शन जिले से जुड़ने के बाद स्थानीय पुलिस व खुफिया तंत्र सदमे में दिख रहा है। बीते तीन दिनों से पुलिस का कोई अधिकारी न तो फोन उठा रहा है और न ही कॉलबैक कर रहा है। इससे पहले घटना व गुडवर्क सोशल मीडिया बलरामपुर पुलिस ग्रुप पर बाइट की वीडियो के साथ धड़ल्ले से पोस्ट कर दिया जाता था। पुलिस को बढ़या भैसाही गांव में दो साल से चल रही आतंकी साजिश की भनक न मिलने का मलाल है।
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आईएस आतंकी अबू यूसुफ विस्फोटक व अन्य सामग्री खरीद रहा था और उसने पूरे परिवार का पासपोर्ट भी वर्ष 2017 में ही बनवा लिया। उस समय उसके सबसे छोटे बच्चे की उम्र मात्र छह माह की थी। नेपाल की खुली संवेदनशील सीमा से जुड़े इस जनपद की पुलिस खुफिया तंत्र इस मामले में इतना फेल क्यों रहा यह सवाल यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
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अबू यूसुफ यहां से सारा सामान लेकर दिल्ली तक पहुंच गया और यहीं की पुलिस को भनक तक नहीं लगी। उसकी गिरफ्तारी यदि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल न करती तो वह कितनी खतरनाक साजिश को अंजाम देता इसका अंदाजा उसके पास से बरामद विस्फोटक व अन्य सामान को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है।
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पहले भी बन चुका है फर्जी पासपोर्ट
वर्ष 2007 में दाऊद गिरोह के जेल में बंद शूटर अशफाक का पासपोर्ट यहां से बन गया था। उस समय भी पुलिस की भारी किरकिरी हुई थी। बताया जा रहा है कि अशफाक के पूर्वज उतरौला कोतवाली क्षेत्र के ग्राम नगवा में रहते थे और कई दशक पूर्व यहां विस्थापित हो गए। उसके बाद परिवार का कोई भी व्यक्ति यहां नहीं लौटा। इसके बाद भी उसका पासपोर्ट कैसे बना यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।
पासपोर्ट बनते समय होती है पुलिस जांच
किसी व्यक्ति को पासपोर्ट बनवाते समय पुलिस तथा एलआईयू के अफसर व्यक्ति के संबंध में विस्तृत छानबीन करते हैं। यही नहीं वह व्यक्ति किस काम के लिए पासपोर्ट बनवा रहा है और कहां जाएगा इस बात की भी पूछताछ होती है। ऐसे में वर्ष 2017 में जब अबू यूसुफ ने पत्नी व चार नाबालिग बच्चों का पासपोर्ट बनवाया तो पुलिस व खुफिया विभाग को इसके खतरनाक मंसूबों की भनक क्यों नहीं लगी।
जिले में निवास करते हैं सात विदेशी
वर्तमान समय में एलआईयू विभाग के पास जिले में निवास कर रही तीन पाकिस्तानी मूल की महिलाएं, दो रूसी महिला तथा दो म्यांमार के बौद्ध भिक्षुओं का विवरण तो है लेकिन कौन विदेश जा रहा है या कौन विदेश से आ रहा है इसकी जानकारी पूछने पर विभाग के अफसरों का कहना है कि वह विवरण एयरपोर्ट स्थित इमीग्रेशन विभाग के पास होता है।
हर साल जिले में बिकता है 363 किग्रा. बारूद का बना रेडीमेड पटाखा
जिले में आतिशबाजी की दुकान के लिए कुल 26 लोगों को स्थायी लाइसेंस दिया गया है। यह लोग पूरे साल में कुल 362.50 किलोग्राम बारूद का रेडीमेड पटाखा बेच सकते हैं। जिले में आतिशबाजी निर्माण का लाइसेंस किसी के पास नहीं है। ऐसे में अबू यूसुफ ने करीब 9 किलोग्राम बारूद कैसे इकट्ठा किया इसका जवाब किसी के पास नहीं है। फायर सर्विस प्रभारी का कहना है कि जिले में खुली बारूद का व्यापार ही नहीं होता जबकि यूसुफ ने पूछताछ में यह बताया कि उसने थोड़ा-थोड़ा रेडीमेड लहसुन बम आदि खरीदकर बारूद इकट्ठा किया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने क्षेत्र के पटाखा विक्रेताओं को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।
उतरौला नगर से ही खरीदा छर्रा व अन्य सामान
अबू यूसुफ ने बम बनाने के लिए छर्रा, बैट्री, तार व बारूद आदि उतरौला नगर से खरीद रहा था और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग सकी जबकि इसी नगर में उतरौला कोतवाली भी है। प्रेशर कूकर बम बनाने के लिए कूकर भी वह घर से ही दिल्ली ले गया था। यह बात उसकी पत्नी ने ही बताया। अब सवाल यह उठता है कि डायल 112, बीट दरोगा व सिपाही यूसुफ के मंसूबों का पता लगा पाने में नाकाम क्यों रहे।
नव धनाढ्यों की नहीं खंगाली कुंडली
देखते ही देखते लाखों करोड़ों के मालिक बने रलोगों की कुंडली खंगालने का दावा तो पुलिस ने कई बार किया लेकिन आज तक इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई जा सकी है। जिले में कई ऐसे नवधनाढ्य हैं जिनकी पड़ताल किया जाना जरूरी है। हो सकता है कि इनमें से कोई अबू यूसुफ को भी मदद करता रहा हो।
नेपाली अपराधी भी रहते हैं सक्रिय
जिले की खुली सीमा के पगडंडी रास्तों से नेपाली व स्थानीय अपराधियों की साठगांठ बनी रहती है। मादक द्रव्य, जाली नोट, हथियार व अन्य प्रतिबंधित सामानों की तस्करी का खेल हमेशा चलता रहता है। ऐसे में इन रास्तों का आसानी से फायदा देशद्रोही तत्व भी उठा सकते हैं। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का भी संबंध है। स्थानीय पुलिस नेपाल सीमा पर सुरक्षा में लगे एसएसबी के साथ लगातार समन्वय भी स्थापित करती रहती हैं। केंद्रीय और प्रदेश का खुफिया तंत्र भी नेपाल सीमा व जिले में सक्रिय रहता है। ऐसे में अबू यूसुफ की दो साल से चल रही साजिश पुलिस व खुफिया तंत्रों की नजर में क्यों नहीं आई इस सवाल का जवाब अब यहां के लोग मांगने लगे हैं।

बनाई जा रही है रणनीति
बढ़या भैसाही गांव में चल रही अबू युसुफ की आतंकी साजिश की भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लग सकी। इस घटना के बाद अब ऐसे तत्वों पर कड़ी नजर रखने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। शीघ्र ही इस रणनीति पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. राकेश सिंह, डीआईजी देवीपाटन मंडल गोंडा
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