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Balrampur News: छांगुर से सांठगांठ रखने वाले अफसर और कर्मियों की बढ़ेगी मुश्किल

Sun, 20 Jul 2025 10:50 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jul 2025 10:50 PM IST
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Officers and employees who are in cahoots with Changur will face more trouble
बलरामपुर के रफीनगर उतरौला में छांगुर के सहयोगी नीतू के शो रूम ।-संवाद
बलरामपुर। छांगुर से सांठगांठ रखने वाले प्रशासनिक और राजस्व कर्मियों की मुश्किलें अब बढ़ गई हैं। एटीएस के निशाने पर एक के बाद एक ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्होंने छांगुर को लाभ दिया और फिर उससे लाभ भी लिया। माना जा रहा है कि इस लाभ देने में राजस्व कर्मियों के साथ ही कुछ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।
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एटीएस ने अपनी जांच रिपोर्ट में इसके संकेत भी दिए हैं कि तहसील उतरौला में छांगुर की गहरी पैठ रही है। अब एटीएस उसी जांच रिपोर्ट के आधार छानबीन में जुटी है और गिरफ्तारी भी कर रही है। जनपद न्यायालय में कार्यरत बाबू राजेश उपाध्याय की गिरफ्तारी के साथ ही एटीएस की जांच का दायरा बढ़ गया है।
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उतरौला सिविल जूनियर डिवीजन न्यायालय में वर्ष 2022 से 2024 तक तैनात रहे कर्मचारी व अधिकारी एटीएस के निशाने पर हैं। यही नहीं, जिले के कुछ आईपीएस अधिकारियों के मिलीभगत की भी शिकायते हुई हैं। एटीएस अभी छांगुर से जुड़े लोगों के बारे में पूरे सबूत जुटा रही है, जिनमें फिलहाल राजस्व कर्मी व अधिकारी शामिल हैं।
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हाल ही में नीतू व छांगुर की जिस कोठी को ढहाया गया, वह बंजर की जमीन पर बनी थी। इसके अलावा तालाब की जमीन छांगुर के नाम होना और नाबालिग से जमीन खरीद के बाद दाखिल खारिज होने के मामले की तह तक जाने से कई बड़े राज सामने आएंगे। इससे कई अधिकारियों की भी मुश्किल बढ़ेगी।

विदेश में नौकरी दिलाने का लालच देकर करा रहा था धर्मांतरण
बलरामपुर।
छांगुर ने अवैध धर्मांतरण की मुहिम तेज करने के लिए बड़ी रणनीति तैयार की थी। नवीन रोहरा के नाम से पनामा में कंपनी बनाने के साथ ही सऊदी अरब में रोजगार की व्यवस्था भी की थी। धर्मांतरण के लिए लोगों को विदेश में नौकरी का लालच देने की बात भी सामने आई है। इसमें नवीन के साथ ही सऊदी में काम करने वाले कुछ लोगों से छांगुर ने संपर्क साधा था। ईडी की जांच में मिले अभिलेख में इसके ठोस साक्ष्य मिले हैं।
विदेशी फंड को छुपाने के लिए तीन ट्रस्ट और कई विदेशी बैंकों में खाते भी खुलवाने के रिकॉर्ड मिले हैं। इन सबके पीछे नवीन और नीतू के अलावा कुछ और लोग भी थे, जिन्होंने छांगुर की मदद की थी। एक केंद्रीय विभाग में भी छांगुर की पैठ होने के सबूत मिले हैं। बताया जा रहा है कि अभी उस अभिलेख की पड़ताल हुई है। पूरी जांच से यह तो साफ हो गया है कि छांगुर विदेश में अड्डे बनाने के साथ ही कारोबार को बढ़ाकर धर्मांतरण करने वालों को काम भी दिलाता था।

गिरफ्तारी से पहले कॉम्प्लेक्स बेचने उतरौला आई थी नीतू
बलरामपुर। छांगुर की राजदार नीतू रोहरा ने गिरफ्तारी से पहले बड़ा दांव चला था। एटीएस ने बीते आठ अप्रैल को छांगुर के बेटे महबूब और नीतू के पति नवीन को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद छांगुर बाहर भागने को तैयार नहीं था। इसी तरह नीतू भी पति को छुड़ाने के लिए फरार नहीं हुई। एटीएस की गिरफ्तारी से दोनों के कदम थम गए थे और लखनऊ में ही डेरा डाल दिया था। पहले तो उन्होंने एफआईआर को चुनौती दी। याचिका खारिज हुई तो दोनों कहीं भागने की तैयारी में थे। बताया जा रहा है कि नीतू मई महीने में गुपचुप उतरौला आई थी और दोनों कॉम्प्लेक्स में एक का सौदा करना चाहती थी। स्थानीय कुछ लोगों से संपर्क भी साधा था।

उस समय खरीदार उसकी मजबूरी का फायदा उठाना चाहते थे। कॉम्प्लेक्स का सौदा वह नहीं कर सकी, क्योंकि औने-पौने दाम पर ही लोग खरीदना चाहते थे। इसके बाद नीतू लखनऊ लौट गई। इसके कुछ दिन बाद एटीएस ने छांगुर और नीतू को पांच जुलाई को गिरफ्तार कर लिया। अब इस सौदे के लिए नीतू के आने की खासी चर्चा है।
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