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स्वास्थ्य विभाग की एसयूवी में नंबर प्लेट फर्जी
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बलरामपुर। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से स्वास्थ्य विभाग को वाहन उपलब्ध कराने वाली कार्यदायी संस्था जमकर मनमानी कर रही है। अस्पताल में डॉक्टरों को आवागमन के लिए उपलब्ध कराए गए वाहन फर्जी कॉमर्शियल (पीली) नंबर प्लेटें लगाकर फर्राटा भर रहे हैं। इससे न सिर्फ सरकार को प्रतिमाह हजारों रुपये का चूना लग रहा है बल्कि एनएचएम के निर्धारित नियमों को दरकिनार कर प्रतिमाह 32,932 रुपये का भुगतान भी लिया जा रहा है। मामला खुलने के बाद इन वाहनों से फर्राटा भरने वाले साहब जानकारी न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
मामला नहर बालागंज के निकट स्थित जिला क्षय रोग चिकित्सालय का है। यहां तैनात जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. सजीवन लाल को आवागमन के लिए एसयूवी (बोलेरो) कार्यदायी संस्था ने उपलब्ध कराई है। इस वाहन पर व्यावसायिक (कॉमर्शियल) वाहन के लिए निर्धारित पीली नंबर प्लेट (यूपी-47 टी-3293) लगी है, लेकिन ये एसयूवी सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में निजी वाहन के रूप में दर्ज है। ऐसे में गाड़ी पर फर्जी तरीके से पीली नंबर प्लेट लगाकर उसका संचालन किया जा रहा है।
अधिकारी से साठगांठ कर निजी वाहन पर फर्जी तरीके से पीली नंबर प्लेट लगाकर चलाने का ये खेल सरकारी रकम डकारने के लिए किया जा रहा है। नियमानुसार स्वास्थ्य विभाग में गाड़ी लगाने के लिए वाहन का व्यावसायिक (कॉमर्शियल) पंजीकरण होना अनिवार्य है। मगर विभाग को वाहन उपलब्ध कराने वाली कार्यदायी संस्था निजी वाहन पर ही पीली नंबर प्लेट लगाकर प्रतिमाह 32,932 रुपये का भुगतान ले रही है।
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सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी अरविंद कुमार यादव ने बताया कि यूपी-47 टी-3293 नंबर की बोलेरो विभाग में निजी वाहन के रूप में पंजीकृत है। पहले इसका पंजीकरण कॉमर्शियल वाहन के तौर पर था, लेकिन अप्रैल 2022 में वाहन स्वामी ने इसका पंजीकरण व्यावसायिक से हटाकर निजी में करा दिया है। वाहन की जांच कराई जाएगी।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संजीवन लाल का कहना है कि क्षय रोग चिकित्सालय को आवागमन के लिए मिली एसयूवी (बोलेरो) का निजी पंजीकरण होने की जानकारी नहीं है। गाड़ी पर पीली नंबर प्लेट लगी है। इस बारे में अधिक जानकारी नहीं है। ठेकेदार से जानकारी ली जाएगी।
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मामला नहर बालागंज के निकट स्थित जिला क्षय रोग चिकित्सालय का है। यहां तैनात जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. सजीवन लाल को आवागमन के लिए एसयूवी (बोलेरो) कार्यदायी संस्था ने उपलब्ध कराई है। इस वाहन पर व्यावसायिक (कॉमर्शियल) वाहन के लिए निर्धारित पीली नंबर प्लेट (यूपी-47 टी-3293) लगी है, लेकिन ये एसयूवी सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में निजी वाहन के रूप में दर्ज है। ऐसे में गाड़ी पर फर्जी तरीके से पीली नंबर प्लेट लगाकर उसका संचालन किया जा रहा है।
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अधिकारी से साठगांठ कर निजी वाहन पर फर्जी तरीके से पीली नंबर प्लेट लगाकर चलाने का ये खेल सरकारी रकम डकारने के लिए किया जा रहा है। नियमानुसार स्वास्थ्य विभाग में गाड़ी लगाने के लिए वाहन का व्यावसायिक (कॉमर्शियल) पंजीकरण होना अनिवार्य है। मगर विभाग को वाहन उपलब्ध कराने वाली कार्यदायी संस्था निजी वाहन पर ही पीली नंबर प्लेट लगाकर प्रतिमाह 32,932 रुपये का भुगतान ले रही है।
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सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी अरविंद कुमार यादव ने बताया कि यूपी-47 टी-3293 नंबर की बोलेरो विभाग में निजी वाहन के रूप में पंजीकृत है। पहले इसका पंजीकरण कॉमर्शियल वाहन के तौर पर था, लेकिन अप्रैल 2022 में वाहन स्वामी ने इसका पंजीकरण व्यावसायिक से हटाकर निजी में करा दिया है। वाहन की जांच कराई जाएगी।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संजीवन लाल का कहना है कि क्षय रोग चिकित्सालय को आवागमन के लिए मिली एसयूवी (बोलेरो) का निजी पंजीकरण होने की जानकारी नहीं है। गाड़ी पर पीली नंबर प्लेट लगी है। इस बारे में अधिक जानकारी नहीं है। ठेकेदार से जानकारी ली जाएगी।