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Balrampur News: अब किताबों और अखबारों से गढ़ेंगे नई पीढ़ी का भविष्य
Thu, 16 Jul 2026 08:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 16 Jul 2026 08:27 PM IST
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फोटो-1-बलरामपुर के परिषदीय स्कूल में अखबार पढ़ते विद्यार्थी ।-संवाद
बलरामपुर। मोबाइल स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता के दौर में अब बलरामपुर के विद्यालयों में किताबों और अखबारों की दुनिया फिर से जीवंत होगी। नए शैक्षिक सत्र से जिले के 1814 परिषदीय और 171 माध्यमिक विद्यालयों समेत कुल 1985 विद्यालयों में सब कुछ छोड़कर पढ़ें अभियान शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करना, भाषा कौशल और सामान्य ज्ञान को मजबूत बनाना तथा समसामयिक घटनाओं के प्रति समझ विकसित करना है।
बीएसए विकास चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि अभियान के तहत विद्यालयों में प्रतिदिन समाचार पत्र पढ़ने की व्यवस्था की जाएगी। दिन की प्रमुख खबरों पर शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर चर्चा करेंगे। इससे बच्चों को केवल घटनाओं की जानकारी ही नहीं मिलेगी, बल्कि वे सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों को समझने के साथ अपनी राय रखने का अभ्यास भी कर सकेंगे।
पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कराई जाएगी। वर्ष भर में 20 से अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुपर-20 पाठक और 30 से अधिक पुस्तकें पढ़ने वालों को सुपर-30 पाठक के रूप में सम्मानित किया जाएगा। विद्यालयों में पढ़ी गई पुस्तकों और समाचार पत्रों पर आधारित मासिक पठन प्रश्नोत्तरी उत्सव भी आयोजित किए जाएंगे।
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प्रत्येक सप्ताह एक निर्धारित कालांश केवल पठन गतिविधियों के लिए रखा जाएगा। इस दौरान प्रधानाध्यापक, शिक्षक और विद्यार्थी अपनी पसंद की पुस्तक, पत्रिका या समाचार पत्र पढ़ेंगे। स्थानीय साहित्यकारों और लेखकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों में साहित्य और समाज के प्रति रुचि बढ़ाई जाएगी।
जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अन्य विद्यालयी पुस्तकालयों को अभियान का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। इन पुस्तकालयों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बदलाव की नई उम्मीद
शिक्षा विभाग का मानना है कि यह अभियान बच्चों को मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों पर अधिक समय बिताने की प्रवृत्ति से दूर कर पुस्तकों की ओर आकर्षित करेगा। नियमित समाचार पत्र पढ़ने और चर्चा करने से विद्यार्थियों में भाषा कौशल, अभिव्यक्ति क्षमता, तर्क शक्ति और समसामयिक विषयों की समझ विकसित होगी। साथ ही पुस्तक पढ़ने की आदत उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए मजबूत आधार देगी।
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बीएसए विकास चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि अभियान के तहत विद्यालयों में प्रतिदिन समाचार पत्र पढ़ने की व्यवस्था की जाएगी। दिन की प्रमुख खबरों पर शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर चर्चा करेंगे। इससे बच्चों को केवल घटनाओं की जानकारी ही नहीं मिलेगी, बल्कि वे सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों को समझने के साथ अपनी राय रखने का अभ्यास भी कर सकेंगे।
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पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कराई जाएगी। वर्ष भर में 20 से अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुपर-20 पाठक और 30 से अधिक पुस्तकें पढ़ने वालों को सुपर-30 पाठक के रूप में सम्मानित किया जाएगा। विद्यालयों में पढ़ी गई पुस्तकों और समाचार पत्रों पर आधारित मासिक पठन प्रश्नोत्तरी उत्सव भी आयोजित किए जाएंगे।
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प्रत्येक सप्ताह एक निर्धारित कालांश केवल पठन गतिविधियों के लिए रखा जाएगा। इस दौरान प्रधानाध्यापक, शिक्षक और विद्यार्थी अपनी पसंद की पुस्तक, पत्रिका या समाचार पत्र पढ़ेंगे। स्थानीय साहित्यकारों और लेखकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों में साहित्य और समाज के प्रति रुचि बढ़ाई जाएगी।
जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अन्य विद्यालयी पुस्तकालयों को अभियान का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। इन पुस्तकालयों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बदलाव की नई उम्मीद
शिक्षा विभाग का मानना है कि यह अभियान बच्चों को मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों पर अधिक समय बिताने की प्रवृत्ति से दूर कर पुस्तकों की ओर आकर्षित करेगा। नियमित समाचार पत्र पढ़ने और चर्चा करने से विद्यार्थियों में भाषा कौशल, अभिव्यक्ति क्षमता, तर्क शक्ति और समसामयिक विषयों की समझ विकसित होगी। साथ ही पुस्तक पढ़ने की आदत उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए मजबूत आधार देगी।