{"_id":"629a5139c1c6ac5e593c59b7","slug":"ngt-balrampur-news-lko6336030121","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुआंव नाले पर हुए अतिक्रमण व प्रदूषण के मामले में कार्रवाई के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुआंव नाले पर हुए अतिक्रमण व प्रदूषण के मामले में कार्रवाई के आदेश
विज्ञापन
फोटो-6-बलरामपुर के सुआंव नाले के अगल-बगल किया गया अतिक्रमण।-संवाद
- फोटो : BALRAMPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलरामपुर। शहर के बीच बह रहे सुआंव नाला जो पहले सुआंव नदी थी के ऊपर हुए अतिक्रमण व प्रदूषण का संज्ञान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने लिया है। स्थानीय संस्था की शिकायत पर एनजीटी ने जांच कर चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। इस आदेश पर अमल होने से कई सरकारी व प्राइवेट भवन अतिक्रमण की जद में आ सकते हैं।
विदित हो कि पर्यावरण वन एवं वन्य जीव संरक्षण समिति के अध्यक्ष पाटेश्वरी प्रसाद सिंह ने एनजीटी से की गई शिकायत में कहा है कि गोंडा गजेटियर के अनुसार सुआंव नदी के तौर पर दर्ज है। बाद में कुआना व सुआंव नदी के बीच वनों को काटकर कृषि योग्य भूमि बनाई गई। आजादी से पूर्व तत्कालीन राजा बलरामपुर ने सुआंव नदी के तट पर भगवतीगंज बसा दिया। राज परिवार ने नगर को बाढ़ से बचाने के लिए सुआंव के किनारे तटबंध भी बनवाए। अब सरकार ने इस नदी को सुआंव नाले का नाम दे दिया है। इसके किनारे अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट व कम्यूनिटी सेंटर बनवाए जा रहे हैं।
कई अन्य लोगों ने भी नाले की जमीन पर अतिक्रमण किया है। कई औद्योगिक संस्थानों का गंदा पानी व कचरा भी इसी नाले में बहाया जा रहा है। इस सब वजहों से नगर के पर्यावरण तथा सुआंव के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसी शिकायत पर सुनवाई के बाद एनजीटी के न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी तथा डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने पर्यावरण वन एवं जलवायु मंत्रालय उत्तर प्रदेश, जलशक्ति मंत्रालय केंद्र सरकार, जल शक्ति मंत्रालय उत्तर प्रदेश, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा डीएम बलरामपुर की संयुक्त समिति बनाकर आदेश दिया है कि चार सप्ताह के भीतर बैठक कर संबंधित क्षेत्र का दौरा कर जांच करें। प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर अतिक्रमण हटवाते हुए जांच रिपोर्ट पेश की जाए। एनजीटी ने डीएम बलरामपुर को सुआंव के किनारे हो रहे अवैध निर्माण को तत्काल रोकने का भी आदेश दिया है। इस संबंध में डीएम श्रुति ने बताया कि उन्हें अभी तक आदेश की प्रति नहीं मिली है। कॉपी मिलते ही आदेश का अनुपालन कराया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विदित हो कि पर्यावरण वन एवं वन्य जीव संरक्षण समिति के अध्यक्ष पाटेश्वरी प्रसाद सिंह ने एनजीटी से की गई शिकायत में कहा है कि गोंडा गजेटियर के अनुसार सुआंव नदी के तौर पर दर्ज है। बाद में कुआना व सुआंव नदी के बीच वनों को काटकर कृषि योग्य भूमि बनाई गई। आजादी से पूर्व तत्कालीन राजा बलरामपुर ने सुआंव नदी के तट पर भगवतीगंज बसा दिया। राज परिवार ने नगर को बाढ़ से बचाने के लिए सुआंव के किनारे तटबंध भी बनवाए। अब सरकार ने इस नदी को सुआंव नाले का नाम दे दिया है। इसके किनारे अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट व कम्यूनिटी सेंटर बनवाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
कई अन्य लोगों ने भी नाले की जमीन पर अतिक्रमण किया है। कई औद्योगिक संस्थानों का गंदा पानी व कचरा भी इसी नाले में बहाया जा रहा है। इस सब वजहों से नगर के पर्यावरण तथा सुआंव के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसी शिकायत पर सुनवाई के बाद एनजीटी के न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी तथा डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने पर्यावरण वन एवं जलवायु मंत्रालय उत्तर प्रदेश, जलशक्ति मंत्रालय केंद्र सरकार, जल शक्ति मंत्रालय उत्तर प्रदेश, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा डीएम बलरामपुर की संयुक्त समिति बनाकर आदेश दिया है कि चार सप्ताह के भीतर बैठक कर संबंधित क्षेत्र का दौरा कर जांच करें। प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर अतिक्रमण हटवाते हुए जांच रिपोर्ट पेश की जाए। एनजीटी ने डीएम बलरामपुर को सुआंव के किनारे हो रहे अवैध निर्माण को तत्काल रोकने का भी आदेश दिया है। इस संबंध में डीएम श्रुति ने बताया कि उन्हें अभी तक आदेश की प्रति नहीं मिली है। कॉपी मिलते ही आदेश का अनुपालन कराया जाएगा।
विज्ञापन