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धूमधाम से मनाई गई आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक की जयंती
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बलरामपुर। विश्व आयुर्वेद परिषद बलरामपुर अवध प्रांत की तरफ से आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक की जयंती धूमधाम से मनायी गई। इस दौरान अवध प्रांत चिकित्सक प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. प्रांजल त्रिपाठी के नेतृत्व में परिषद का गठन भी किया गया।
मुख्य अतिथि क्षेत्रीय आयुर्वेद यूनानी अधिकारी डा. दिग्विजय नाथ सिंह ने कहा कि महर्षि चरक ने औषधि चिकित्सा के सिद्घांतों का प्रतिपादन कर नई जिंदगी दी। आयुर्वेद के सूत्रों की गलत ढंग से व्याख्या करने से उसका अर्थ बदल जाता है।
किसी भी चिकित्सा पद्घति के विकास के लिए सरकारी तंत्र का सहयोग जरूरी है। डा. प्रांजल त्रिपाठी ने विश्व आयुर्वेद परिषद के बारे में जानकारी देते हुए कहाकि विश्व को आयुर्वेद का संदेश देने वाले आयुर्वेद के सिद्धांत और व्यवहार दोनों ही आज अपने देश में ही उपेक्षा के शिकार हैं।
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याद रहे ये केवल आयुर्वेद की हानि ही नहीं है अपितु देश के सभी नागरिकों एवं विश्व की रोगत्रस्त मानवता की हानि है। इस ज्ञान को दोबारा स्थापित करने के लिए विश्व आयुर्वेद परिषद का गठन किया गया।
समारोह को डा. देवेश चंद्र श्रीवास्तव, डा. राकेश चंद्र, डा. कौशल्या गुप्ता, डा. प्रदीप कुमार, डा. निधि त्रिपाठी व डा. केके राणा आदि ने भी संबोधित किया। इस दौरान अवध प्रांत चिकित्सक प्रकोष्ठ परिषद बलरामपुर का गठन भी किया गया।
वरिष्ठ चिकित्सक डा. के के राणा, डा. कौशल्या गुप्ता, डा. राकेश चंद्र श्रीवास्तव, डा. देवेश चंद्र श्रीवास्तव, डा. प्रदीप कुमार व डा. सीमा पांडेय ने सदस्यता ग्रहण की।
मुख्य अतिथि ने विश्व आयुर्वेद परिषद की आजीवन सदस्यता ग्रहण कर चुके डा. प्रदीप दुबे, डा. श्वेता चंदेल, डा. ईश देव आर्य, डा. अभिषेक सिन्हा, डा. संतोष कुमार को सम्मानित भी किया। समारोह का संचालन डा. शहंशाह आलम ने किया। इस अवसर पर राकेश पांडेय, शहजाद, अतुल व सुधांशु आदि मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि क्षेत्रीय आयुर्वेद यूनानी अधिकारी डा. दिग्विजय नाथ सिंह ने कहा कि महर्षि चरक ने औषधि चिकित्सा के सिद्घांतों का प्रतिपादन कर नई जिंदगी दी। आयुर्वेद के सूत्रों की गलत ढंग से व्याख्या करने से उसका अर्थ बदल जाता है।
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किसी भी चिकित्सा पद्घति के विकास के लिए सरकारी तंत्र का सहयोग जरूरी है। डा. प्रांजल त्रिपाठी ने विश्व आयुर्वेद परिषद के बारे में जानकारी देते हुए कहाकि विश्व को आयुर्वेद का संदेश देने वाले आयुर्वेद के सिद्धांत और व्यवहार दोनों ही आज अपने देश में ही उपेक्षा के शिकार हैं।
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याद रहे ये केवल आयुर्वेद की हानि ही नहीं है अपितु देश के सभी नागरिकों एवं विश्व की रोगत्रस्त मानवता की हानि है। इस ज्ञान को दोबारा स्थापित करने के लिए विश्व आयुर्वेद परिषद का गठन किया गया।
समारोह को डा. देवेश चंद्र श्रीवास्तव, डा. राकेश चंद्र, डा. कौशल्या गुप्ता, डा. प्रदीप कुमार, डा. निधि त्रिपाठी व डा. केके राणा आदि ने भी संबोधित किया। इस दौरान अवध प्रांत चिकित्सक प्रकोष्ठ परिषद बलरामपुर का गठन भी किया गया।
वरिष्ठ चिकित्सक डा. के के राणा, डा. कौशल्या गुप्ता, डा. राकेश चंद्र श्रीवास्तव, डा. देवेश चंद्र श्रीवास्तव, डा. प्रदीप कुमार व डा. सीमा पांडेय ने सदस्यता ग्रहण की।
मुख्य अतिथि ने विश्व आयुर्वेद परिषद की आजीवन सदस्यता ग्रहण कर चुके डा. प्रदीप दुबे, डा. श्वेता चंदेल, डा. ईश देव आर्य, डा. अभिषेक सिन्हा, डा. संतोष कुमार को सम्मानित भी किया। समारोह का संचालन डा. शहंशाह आलम ने किया। इस अवसर पर राकेश पांडेय, शहजाद, अतुल व सुधांशु आदि मौजूद रहे।